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अंग्रेजी शिक्षा ने युवाओं को अपनी ऐतिहासिक विरासत से काटने का कार्य किया है

“स्वयंसिद्ध- 2017”

गोरक्ष. राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के व्यापक सन्दर्भ में कार्य करने का लक्ष्य सामने रखकर अखिल भारतीय छात्र संगठन के रूप में समाज के सभी क्षेत्रों में कार्य करने वाला ऐसा एक संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है. आंदोलनात्मक, प्रतिनिधित्वात्मक कार्यक्रमों के साथ- साथ विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन देने व उन्हें आवश्यक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से संगठन समय-समय पर रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता है. स्वयंसिद्ध- 2017 के तहत ऐसे ही एक कार्यक्रम का आयोजन अ.भा.वि.प. गोरखपुर महानगर (गोरक्ष प्रान्त, उत्तर प्रदेश) द्वारा किया गया. स्वयंसिद्ध- 2017 के तहत दस दिवसीय कार्यक्रम में कुल 15 सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. जनवरी 19 से 29 तक चले, “स्वयंसिद्ध-2017” कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि के संवाद भवन में मुख्य अतिथि महानगर की महापौर डॉ. सत्या पाण्डेय, अ.भा.वि.प. की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. उमा श्रीवास्तव एवं गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया.

इस अवसर पर डॉ. सत्या पाण्डेय ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के अन्दर कोई न कोई प्रतिभा होती है, बस आवश्यकता उसे पहचानने एवं अवसर प्रदान करने की है. उन्होंने पूर्व में अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव भी साझा किए. परिषद् की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. उमा श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को पाठ्येत्तर गतिविधियों में प्रतिभाग करने हेतु प्रोत्साहन देने का कार्य विद्यार्थी परिषद् अपने स्थापना काल से ही करता आ रहा है. आज परिषद सील (Student’s Experience in Interstate Living), वोसी (Worlds Organization for Students & Youth), थिंक इंडिया, मेडीविज़न, सृजन, एग्रिविजन, एसएफडी (Students for Development), सविष्कार, प्रतिभा संगम जैसे अनेकों आयामों के माध्यम से विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास हेतु शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही है. ऐसा ही एक उदाहरण “स्वयंसिद्ध-2017” भी है. उद्घाटन सत्र के पश्चात एकल व समूह गायन प्रतियोगिता में 233 प्रतिभागियों ने देशभक्ति, शास्त्रीय व लोकगीतों की प्रस्तुति दी.

महानगर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित कार्यक्रम के अगले क्रम में एकल व समूह नृत्य प्रतियोगिता में कुल 356 प्रतिभागियों ने भाग लिया. देश प्रेम, सामाजिक विसंगतियों एवं लोक जीवन से जुड़े विषयों पर आधारित नाट्य मंचन प्रतियोगिता, देश भक्ति, समरसता, प्रकृति व अन्य सामाजिक विषयों पर आधारित युवा कवि गोष्ठी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. कन्वेंशन सेंटर, गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित रंगोली, पोस्टर व स्लोगन प्रतियोगिता में रंगों के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ”, नारी सशक्तिकरण जैसे गंभीर मुद्दों पर अपना सन्देश चित्रित किया. साथ ही भ्रूण हत्या, महिला उत्पीडन, दहेज़ प्रथा जैसे सामाजिक कुरीतियों को ख़त्म करने का सन्देश भी विद्यार्थियों ने दिया.

प्रतियोगिताओं के संपन्न होने के पश्चात “स्वयंसिद्ध-2017” कार्यक्रम के दसवें दिन समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के सभागार में हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सांसद, गोरखपुर महन्त योगी आदित्यनाथ जी उपस्थित रहे. इस अवसर पर “स्वयंसिद्ध-2017” कार्यक्रम के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले 1500 प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद् ने अपने रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लक्ष्य को साकार करने में आजादी के बाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. स्वयंसिद्ध- 2017 छात्र शक्ति को राष्ट्र शक्ति के रूप में विकसित करने का एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ है. इसके माध्यम से युवाओं में छिपी रचनाधार्मिता को बाहर निकलने का अवसर प्राप्त हुआ है. एक छात्र संगठन द्वारा इस प्रकार का रचनात्मक प्रयास अभिनंदनीय है. “छात्र कल का नहीं आज का नागरिक है” इस संकल्पना के साथ अ.भा.वि.प. ने शैक्षिक समस्याओं के साथ ही साथ देश की आतंरिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकीकरण, नक्सलवाद, माओवाद आदि समस्याओं के खिलाफ समाधान प्राप्ति तक संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई है. युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए कहा कि देश आगे तब बढ़ता है, जब देश का युवा अपने इतिहास पर गर्व करता है. अंग्रेजी शिक्षा ने युवाओं को उसकी ऐतिहासिक विरासत से काटने का कार्य किया है. आज पुनः भारत के शिक्षालयों में भारत की संस्कृति एवं राष्ट्रवाद के विरोध में स्वर उठ रहे हैं. ऐसे समय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा अपने रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृतिनिष्ठ राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए मील का पत्थर है. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रान्त अध्यक्ष, डॉ. राजशरण शाही ने कहा कि भारत का युवा आज अपने देश की समस्याओं के साथ ही साथ विश्व की समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. आज युवा देश के लिए समस्या नहीं, बल्कि अपने रचनात्मक दृष्टिकोण के कारण सभी समस्याओं का समाधान बनता दिख रहा है.

“स्वयंसिद्ध- 2017” के तहत आयोजित 15 प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्तकर्ता, 71 प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि योगी आदित्यनाथ जी महाराज एवं परिषद् की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. उमा श्रीवास्तव व प्रान्त छात्रा प्रमुख प्रो. सुषमा पाण्डेय द्वारा पुरस्कृत किया गया. इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल के निर्णायकों को भी सम्मानित किया गया.

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