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अध्यात्म और सेवा से ही भारत दुनिया को जीतेगा – गुरुमां आनंदमूर्ति

नारी के बिना दुनिया की कल्पना नहीं – साध्वी श्वेता भारती जी

2100 कन्याओं के पैर धोकर फूलों से किया गया वंदन

गुरुग्राम (विसंकें). हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के दूसरे दिन कन्या पूजन में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी श्वेता भारती जी ने कहा कि नारी के बिना दुनिया की कल्पना भी नहीं की जा सकती. नारी में अपार शक्ति है, इस शक्ति को पहचानने की आवश्यकता है. ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां नारी का वर्चस्व न हो. गुरुग्राम के लेजरवैली में मेले में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं.

दुनिया में महिलाओं के सम्मान को बरकरार रखने के उद्देश्य से मेले में आयोजित कन्या वंदन कार्यक्रम में 2100 कन्याओं का पूजन किया गया. कन्याओं को सामने बैठाकर स्कूल के 2100 छात्रों ने उनके पैर पानी से धोकर पुष्प से पूजे और आरती उतारी. सभी छात्र-छात्राओं ने इस मौके पर भारतीय संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया. कन्या पूजन कार्यक्रम साध्वी श्वेता भारती के सानिध्य में सम्पन्न हुआ. इस दौरान नारी शक्ति के महत्व विषय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए. छोटी-छोटी बच्चियों ने विभिन्न प्रकार के पराम्परागत व संस्कृति को दर्शाते नृत्य प्रस्तुत किए.

साध्वी श्वेता भारती जी ने कहा कि व्यवसायिक क्षेत्र के साथ-साथ आध्यात्मिक क्षेत्र में भी नारियां अग्रणी भूमिका निभा रही है. केवल हिन्दू संस्कृति में ही नारी को देवी की संज्ञा दी गई है. यह संज्ञा नारी में छिपी अपार शक्ति के कारण दी गई है. भारतीय नारी को पाश्चत्य संस्कृति के आवरण को छोड़कर भारत की इस आदर्श शक्ति को आत्मसात करना होगा, तभी समाज में फैली कुरीतियों का निराकरण होगा. कार्यक्रम में मुरथल के स्वामी दयानंद सरस्वती जी, संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख गुणवंत कोठारी जी, मेला समिति के संरक्षक पवन जिंदल जी, प्रांत प्रचारक सुधीर कुमार जी, एक्वालाइट के चेयरमैन अनिल गुप्ता जी, पिरामिड ग्रुप के दिनेश शर्मा, उद्योगपति प्रमोद राधव उपस्थित रहे. विशेष आमंत्रित रेणु पाठक, लता, सरिता व रश्मि आदि भी मौजूद रही.

दोपहर 12 बजे हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में पेंटिंग करने वाले कलाकारों ने अपनी कलम से कई मुद्दों को जिंदा कर दिया. पानीपत के गांव फरीदपुर के कलाकार अनिल की पेंटिंग ने प्राकृतिक और महिला को बराबर का दर्जा दिया. प्रकृति को मां के रूप में दर्शाया गया तो महिलाओं को भी बेटी और मां के रूप में प्रस्तुत किया. अनिल ने कहा कि प्रकृति हमारी मां है और मां तो मां होती ही है. बेटी ही मां बनती है. इसलिए बेटी को बचाओगे तो मां बचेगी. आसाम के नारोत्तम ने प्रकृति को हिन्दू धर्म की संस्कृति से जोड़ा. पेंटिंग में चित्रों से उकेरा गया कि केवल हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है, जो प्राकृति को बचा सकती है, क्योंकि यह संस्कृति ही सब जीवों की रक्षा करने वाली है. दिल्ली की यासमीन ने भी प्राकृतिक की रक्षा का संदेश अपनी पेंटिंग से दिया. प्रतियोगिता में 15 राज्यों के 140 चित्रकारों ने हिस्सा लिया. जिसमें अधिकांश हरियाणा के थे और अधिकांश पेंटिंग प्रकृति और बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रही थी.

अध्यात्म और सेवा से भारत दुनिया को जीतेगा – गुरुमां आनंदमूर्ति

हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले में दोपहर बाद आयोजित संभाषण प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि श्रीचेतन्य आश्रम की अधिष्ठाता गुरुमां आनंदमूर्ति जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता व परम्पराओं से अभिभूत होकर विदेशी संस्कृति के लोग भारत की परम्पराओं को अपना रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि भारत के लोग ही अपनी सनातन संस्कृति से विमुख हो रहे हैं. भोगवाद को देखने के लिए अब विदेश जाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि अपने देश में ही इस संस्कृति की झलक दिखाई दे रही है. ऐसे वातावरण में आध्यात्मिक एवं सेवा कार्यों की आवश्यकता है.

मेले से पहले सभी कालेजों में हुई संभाषण प्रतियोगिता के 15 विजेता विद्यार्थी यहां पहुंचे थे. इन सभी विद्यार्थियों ने मेले में संभाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.  विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुरुमां ने कहा कि हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला आयोजन समिति ने यह आयोजन कर निश्चित तौर पर भटकती हुई भारतीय संस्कृति के पुन: जागरण का सार्थक प्रयास किया है. अश्लीलता व मादक पदार्थों का सेवन ही आधुनिकता नहीं है, बल्कि विचारों में आधुनिकता आनी चाहिए. प्रकृति का पूजन और कन्या वंदन ही हमें सही रास्ते पर ला सकता है. मंदिर में हम जाएं या ना जाएं, लेकिन किसी गरीब, असहाय व जरूरतमंदों की सेवा करना ही परमात्मा की सबसे बड़ी पूजा है. अध्यात्म और सेवा ही भारत की अमूल्य धरोहर है, हमें इसे आत्मसात करना चाहिए.

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