अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी पर पहुँचा राष्ट्रोदय का संदेश Reviewed by Momizat on . मुरादाबाद (विसंकें). कुछ करने की ठान ली जाये तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रह जाती. आवश्यकता बस मजबूत इच्छा शक्ति की है. यह कहना है सात महाद्वीपों के शिखरों में मुरादाबाद (विसंकें). कुछ करने की ठान ली जाये तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रह जाती. आवश्यकता बस मजबूत इच्छा शक्ति की है. यह कहना है सात महाद्वीपों के शिखरों में Rating: 0
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अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी पर पहुँचा राष्ट्रोदय का संदेश

मुरादाबाद (विसंकें). कुछ करने की ठान ली जाये तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रह जाती. आवश्यकता बस मजबूत इच्छा शक्ति की है. यह कहना है सात महाद्वीपों के शिखरों में से एक अफ्रीका की किलिमंजारो चोटी को फतह कर लौटे विपिन चौधरी का. विपिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं और वर्तमान में मुरादाबाद महानगर में विद्यार्थी प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

विपिन जी ने शिखर पर चढ़ने की शुरुआत 13 दिसम्बर को तंजानिया से की थी. 16 दिसम्बर की रात 12.30 बजे आखिरी पड़ाव पर चढ़ना शुरू किया था और सुबह छह बजे चोटी के ऊपर पहुँच गए. 20 मिनट तक वहाँ पर तिरंगा फहराया. विपिन जी ने बताया कि माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में ऐसा लगा मानो हाथ-पैर सुन्न हो गए हों, लेकिन सफलता की उस घड़ी में भी विपिन को प्रान्त में होने वाला राष्ट्रोदय कार्यक्रम नहीं भूला और उन्होंने तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्रोदय का पोस्टर भी लहराया. मेरठ प्रांत में 25 फरवरी को राष्ट्रोदय (स्वयंसेवक समागम) कार्यक्रम होने वाला है, जिसमें ढाई लाख स्वयंसेवक भाग लेंगे.

दिल्ली के डीएवी कॉलेज से बीकॉम करने वाले विपिन जी के पिता गजेन्द्र सिंह पुलिस विभाग में कार्यरत हैं. जबकि मां पूनम देवी गृहणी हैं. उन्होंने दार्जिलिंग और उत्तरकाशी से पर्वतारोहण का कोर्स किया है. विपिन इससे पहले सिक्किम की रिनोक चोटी एवं उत्तरकाशी की द्रोपदी का डांडा चोटी भी फतह कर चुके हैं. इन चोटियों पर भी उन्होंने तिरंगा के साथ भगवाध्वज फहराया है. अब विपिन का सपना माउंट एवरेस्ट सहित शेष छह चोटियों पर तिरंगा फहराने का है. शहर पहुंचने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, बजरंग दल एवं हिन्दू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने विपिन का स्वागत किया.

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