इतिहास के विकृतिकरण के कारण युवा पीढ़ी को नहीं मिली इतिहास की सही जानकारी – नरेंद्र कुमार जी Reviewed by Momizat on . शिमला (विसंकें). विद्या भारती से संबद्ध हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिरों के आचार्य - दीदीयों (शिक्षकों) का 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हि शिमला (विसंकें). विद्या भारती से संबद्ध हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिरों के आचार्य - दीदीयों (शिक्षकों) का 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हि Rating: 0
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इतिहास के विकृतिकरण के कारण युवा पीढ़ी को नहीं मिली इतिहास की सही जानकारी – नरेंद्र कुमार जी

शिमला (विसंकें). विद्या भारती से संबद्ध हिमाचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिरों के आचार्य – दीदीयों (शिक्षकों) का 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर हिमरश्मि परिसर विकासनगर शिमला में चल रहा है. शिविर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र जी ने शिविरार्थियों के समक्ष भारतीय इतिहास के विकृतिकरण पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारत एक प्राचीन राष्ट्र है, इसे संस्कृति, व्यक्तित्व, इतिहास और कृतित्व के कारण पहचाना जाता है. भारत के जीवन मूल्य काफी दृढ़ रहे हैं. इतिहास के विकृतिकरण पर कहा कि भारतीय संस्कृति पर एक सुनियोजित तरीके से कुठाराघात किया गया. अंग्रेज जो अपने आप को सबसे शिक्षित मानते रहे, उनका अपना इतिहास प्रभावशाली नहीं था. इस कारण उन्होंने 19वीं सदी में भारत के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया. उनका उद्देश्य भारत में ज्यादा से ज्यादा इसाई बनाना था, इसलिए इतिहास में विसंगितियां डालीं. इस देश के वनवासी मूलवासी हैं, हिन्दु नहीं. इस प्रकार की धारणा फैलाकर देश को विभाजित करने का षड्यंत्र आज भी चल रहा है. लार्ड मैकाले ने भ्रम पैदा किया कि भारत का इतिहास बेहूदा है और वेद गडरियों के गीतों पर आधारित रचना है.

नरेंद्र जी ने कहा कि इतिहास में ऐसी बातें भरी पड़ी है कि आर्य बाहर से आए और द्रविड़ तथा आर्यों में आपस में टकराव चलता रहा. आर्य शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा कि आर्य का अर्थ श्रेष्ठ होता है. इसी बात को समझते हुए स्वामी दयांनद ने आर्य समाज की स्थापना की. उन्होंने ऐतिहासिक कालक्रम पर दृष्टिपात करते हुए कहा कि 1891 में कोलकाता में विवेकानंद ने कहा था कि अंग्रेजों द्वारा लिखा गया इतिहास मत पढ़ो, यह महत्वाकांक्षी नहीं है. महात्मा गांधी ने भी कहा है कि अंग्रेजों द्वारा लिखित इतिहास काफी विकृत है. स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी पत्र द्वारा इंदिरा बताया कि हमारे स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला इतिहास ठीक नहीं है. उनका कहना था कि विश्व का सबसे बड़ा नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय मुगल शासक द्वारा जला दिया गया. पुस्तकालय छह महीने तक जलता रहा और भारत के सारे ग्रंथ उसमें नष्ट हो गए. आज केवल शिलालेख जो भारत के विभिन्न स्थानों पर हैं, उनसे ही भारत का इतिहास पता चलता है. खेद प्रकट करते हुए कहा कि आजादी के बाद भी इतिहास को बदला नहीं गया, वही विकृत इतिहास लगातार पढ़ाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास संघर्ष भरा रहा है और हम कभी पराजित नहीं हुए. उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि हमें उदासीनता छोड़कर जागरूक बनना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी को जागरूक बनाया जा सके.

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