एकात्म मानव दर्शऩ से ही राष्ट्र का स्थायी विकास संभव – डॉ. गुलरेज शेख Reviewed by Momizat on . कोलकत्ता (विसंकें). मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक डॉ. गुलरेज शेख ने कहा कि पं. दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शऩ सदियों के भारतीय विचारों का मं कोलकत्ता (विसंकें). मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक डॉ. गुलरेज शेख ने कहा कि पं. दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शऩ सदियों के भारतीय विचारों का मं Rating: 0
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एकात्म मानव दर्शऩ से ही राष्ट्र का स्थायी विकास संभव – डॉ. गुलरेज शेख

Photos 7.8कोलकत्ता (विसंकें). मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक डॉ. गुलरेज शेख ने कहा कि पं. दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शऩ सदियों के भारतीय विचारों का मंथन है. वर्ष 1947 में जब भारत के कुछ भ्रमित नेताओं ने पूंजीवाद एवं साम्यवाद के आधार पर चलाना चाहा, तो उस समय पं. दीनदयाल जी ने कहा कि भारत किसी आयातितवाद के आधार पर नहीं, अपितु अपने ही भारतीय दर्शऩ से चलेगा, तभी स्थायी विकास संभव है. डॉ. गुलरेज बड़ा बाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्मशती पर आयोजित तीसरे व्याख्यान में पं. दीनदयाल उपाध्याय – एक विचार विषय़ पर आयोजित महाजाति सदन एनेक्सी में संबोधित कर रहे थे.

डॉ. गुलरेज शेख ने कहा कि आर्थिक विकेंद्रीकरण भारतीय सभ्यता का मूल आधार है. भारतीय परंपरा में बेरोजगारी की अवधारणा ही नहीं थी, क्योंकि यहां Mass Production नहीं, बल्कि Production by Masses की व्यवस्था थी और स्वरोजगार के कारण यहां के गांव आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर थे. दीनदयाल जी के विचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत हमेशा से एक राष्ट्र रहा है. देश और राष्ट्र की अवधारणा में अंतर बताते हुए कहा कि सांस्कृतिक एकरूपता राष्ट्र का आधार है. देश कृत्रिम रूप से बनते एवं परिवर्तित होते हैं, जबकि राष्ट्र स्वाभाविक रूप से संस्कृतियों के मेल से पैदा होता है. पं. दीनदयाल जी के विचार से नीतिहीन और भ्रष्ट चुनाव, भ्रष्ट नेतृत्व पैदा करता है. हम हिन्दू हैं, और हिन्दू के रूप में एक हैं, भले ही धर्म या समुदाय अलग हों. इसी डीएनए के आधार पर भारत की अखंडता पुनर्स्थापित हो सकती है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभात खबर के स्थानीय संपादक तारकेश्वर मिश्र ने कहा कि विश्व मानवता का वर्तमान परिस्थितियों में यदि कल्याण संभव है तो वह सिर्फ पं. दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद से ही हो सकता है. दीनदयाल जी की आर्थिक संरचना में राम राज्य की कल्पना निहित थी जो दैहिक, दैविक, एवं भौतिक तापों से मुक्ति का मार्ग है. कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने पं. दीनदयाल जी के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित किए. कार्यक्रम का शुभारंभ इंदु चांडक द्वारा प्रस्तुत हे ज्योति पुरुष शत-शत प्रणाम भावपूर्ण गीत से हुआ. डॉ. तारा दुगड़ ने अतिथियों व गणमान्यजनों का स्वागत किया, मंच संचालन पुस्तकालय के मंत्री महावीर बजाज जी तथा धन्यवाद योगेशराज उपाध्याय जी ने किया. शांतिलाल जैन जी, अरुण प्रकाश मल्लावत जी, राधेश्याम सोनी जी ने माल्यार्पण से अतिथियों का स्वागत किया.

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