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औषधीय पौधों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नाना जी द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट, 50 किलोमीटर की परिधि में अपने प्रकल्पों के माध्यम से सामाजिक पुनर्रचना के कार्यों में सतत् प्रयत्नशील है. पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार को व्यवहारिक धरातल पर दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से साकार रूप दिया जा रहा है. ध्येय वाक्य है – हम अपने लिये नहीं अपनों के लिए हैं, अपने वे हैं जो पीड़ित और उपेक्षित हैं.

मध्यप्रदेश के सतना जिले के अन्तर्गत मर्यादा पुरुषोत्तम राम की तपस्थली चित्रकूट का जो भू-भाग आता है, उसमें अधिकतर वनवासी बन्धु निवास करते हैं. जहां प्रचुर मात्रा में औषधीय वनस्पति उपलब्ध है. वनवासी बन्धुओं के उत्थान के साथ-साथ क्षेत्र में पाई जाने वाली औषधियों के संरक्षण, संवर्धन एवं दैनिक जीवन में सदुपयोग तथा इसका प्रत्यक्ष लाभ वनवासी बन्धुओं को मिले, इस दृष्टि से मझगवां ब्लाक में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना के साथ-साथ चित्रकूट में आरोग्यधाम का शुभारंभ एवं 500 औषधीय पौधों की एक वाटिका विकसित करने व इन औषधीय पौधों के लिए आधुनिक तकनीकी से सुसज्जित प्रयोगशाला आयुर्वेद सदन, शुद्ध औषधियों के निर्माण के लिये रसशाला का शुभारंभ करवाया.

इस ज्ञान का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले, इस दृष्टि से संस्थान में समय-समय पर कार्यशालाएं, गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं. जिसमें ज्ञान का आदान-प्रदान होने के साथ-साथ संस्थान के कार्यकर्ताओं को कुछ नवीन प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिलती है.

कार्यक्रमों की इसी श्रृंखला में नानाजी की 9वीं पुण्य तिथि पर आयुष मंत्रालय भारत सरकार, दीनदयाल शोध संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में औषधीय पौधे एवं उनसे निर्मित औषधियों के सम्बंध में दो द्विवसीय (25-26 फरवरी 2019) राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन संस्थान के उद्यमिता परिसर में किया जा रहा है. पंजीयन संस्थान के आरोग्यधाम परिसर स्थित आयुर्वेद सदन में प्रारंभ हो गया है. कार्यशाला में बी फार्मा, एम. फार्मा, डी फार्मा, रसायन विज्ञान, वनस्पति, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान  एवं आयुर्वेद से संबंधित लोग अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए 15 फरवरी तक पंजीयन करवा सकते हैं.

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