केरल में राजेश की राजनीतिक हत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. केरल में एसएल राजेश की हत्या एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए 9 अगस्त, 2017 को शाम 4.30 बजे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. स्वत नई दिल्ली. केरल में एसएल राजेश की हत्या एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए 9 अगस्त, 2017 को शाम 4.30 बजे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. स्वत Rating: 0
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केरल में राजेश की राजनीतिक हत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली. केरल में एसएल राजेश की हत्या एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए 9 अगस्त, 2017 को शाम 4.30 बजे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. स्वतंत्र बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों ने जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बस्ती कार्यवाह एस.एल. राजेश की बर्बरतापूर्ण हत्या की गई जो केरल सरकार द्वारा प्रतिरोधी और दमनकारी नीतियों का एक उदाहरण है. सीपीआई (एम) सरकार तानाशाही तरीके से व्यवहार कर रही है, जिससे अन्य विचारधाराओं के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जिंदगी और सम्पत्ति खतरे में है.

दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय आदि के शैक्षणिक समूहो से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और यह नागरिक समाज के क्रोध और पीड़ा को दर्शाता है. राज्य सरकार केरल में अपने स्वयं के लोगों की सुरक्षा के अपने संवैधानिक और नैतिक दायित्वों को निभाने में विफल रही है.

विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं को पनपने के लिए पर्याप्त जगह दी जानी चाहिए. यह देखा गया है कि केरल में एलडीएफ शासन के पिछले 13 महीनों में 14 राजनीतिक हत्याएं हुई हैं. इनमें से चार मारे गए व्यक्ति दलित समुदाय के थे. उन सभी लोगों को बर्बरतापूर्वक मार दिया गया जो एक विशेष विचारधारा के समर्थक थे, अर्थात् राष्ट्रवाद की विचारधारा से संबंध रखते थे. इस तरह की बढ़ती असहिष्णुता गम्भीर चिंता का विषय है. केरल को विचारधारा और राजनीतिक हत्या के युद्धक्षेत्र के रूप में नहीं उभरना चाहिए, बल्कि राज्य को भारत के संविधान की भावना के अनुरूप उभरना चाहिए. शांति और सुरक्षा अनिवार्य है. ऐसी हत्याओं से किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, बल्कि प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारत के सामाजिक ताने – बाने में अस्थिरता पैदा होगी. विरोध प्रदर्शन में सेव सोसायटी, सेव इंडिया के नारे के साथ सबने एकजुटता का भाव प्रकट किया.

इस अवसर पर डॉ. सोनल मानसिंह नृत्यांगना, डॉ. विनय सहरबुद्धे भाजपा नेता, ज्योति शुक्ला अध्यक्ष, राजस्थान वित्त आयोग, गिरीश चंद्र त्रिपाठी उपकुलपति, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, सुदीप्तो सेन, फिल्मकार, अरविन्द श्रीवास्तव अधिवक्ता, प्रो. कपिल कुमार इग्नू, डॉ. आईएम कपाही, डॉ. वीएस नेगी, प्रो.पी.सी झा, डॉ. एस. ओबेरॉय, अश्विनी महाराज, डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री, डॉ. अजय भागी, सुशील पंडित आदि लोग सम्मिलित थे. प्रो. राकेश सिन्हा विरोध प्रदर्शऩ के संयोजक थे.

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