केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या वामदल की सुनियोजित साजिश – जे. नंदकुमार जी Reviewed by Momizat on . रांची. प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या कम्युनिस्ट पार्टी की एक सुनियोजित साजिश है. कम्युनिस्ट रांची. प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या कम्युनिस्ट पार्टी की एक सुनियोजित साजिश है. कम्युनिस्ट Rating: 0
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केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या वामदल की सुनियोजित साजिश – जे. नंदकुमार जी

रांची. प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या कम्युनिस्ट पार्टी की एक सुनियोजित साजिश है. कम्युनिस्ट पार्टी लोकतंत्र की दुश्मन है. इसके लोग केरल में खूनी-खेल खेल रहे हैं. इनका स्वभाव स्वरूप नहीं बदलने वाला. यही नहीं, कम्युनिस्ट पार्टी अपने खूनी खेल में केरल के मुस्लिम समुदाय के उन युवाओं का सहयोग ले रही है, जो आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़े हैं. जे. नंदकुमार जी शनिवार को होटवार स्थित खेलगांव के बिरसा स्टेडियम में प्रज्ञा प्रवाह की गोष्ठी में संबोधित कर रहे थे. गोष्ठी का विषय था – ‘केरल में कम्युनिस्ट आतंक बनाम लोकतंत्र का भविष्य’.

उन्होंने कहा कि हमारे भारत देश के तीन दोष हैं – कम्युनिस्टों का राष्ट्र विरोधी स्वभाव, मुसलमानों का आतंकवाद और ईसाइयों का मिशनरीवाद. देश को इन तीनों दोषों से मुक्त करने के लिए हम सबको एकजुट होने की जरूरत है. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में सुनियोजित तरीके से संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है. सन् 1969 से लेकर अब तक 286 स्वयंसेवकों की हत्या की जा चुकी है. इनमें चार महिलाएं भी हैं. उन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस विचारधारा की कोई जगह नहीं है. वे श्रमिक तानाशाही की बात करते हैं. तानाशाही पूंजीपति की हो या श्रमिक की, दोनों ही खतरनाक हैं. कम्युनिस्ट विचारधारा संविधान के खिलाफ है. वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देते हैं, लेकिन दूसरी विचारधारा को पनपने ही नहीं देते.

केरल एक ऐसा प्रदेश है, जो सर्वाधिक साक्षर है. लेकिन वहां पार्टी पंचायत है. केरल में कम्युनिस्टों ने हर गांव को पार्टी से जोड़ दिया है. जो उनके खिलाफ जाता है, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है. केरल में संघ के इतिहास पर नंदकुमार जी ने कहा कि 1942 में संघ ने यहां काम करना शुरू किया और इसके एक दशक पहले कम्युनिस्ट पार्टी ने. स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद जब यहां आए तो यहां की जाति व्यवस्था को देखकर इसे पागलखाना करार दिया था. इसका लाभ उठाते हुए कम्युनिस्टों ने आक्रामक तरीके से काम करना शुरू किया. उन्हें यहां खुला मैदान मिल गया, जबकि संघ का काम धीमी गति का था. कम्युनिस्टों ने मुस्लिम लीग से हाथ मिला लिया और सत्ता पर काबिज हो गए. अब केरल ही उनके हाथ में है, इसलिए वे और आक्रामक होकर संघ कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या कर रहे हैं.

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