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केरल में हो रही हिंसा के खिलाफ गाजियाबाद में विरोध प्रदर्शन

गाजियाबाद (विसंकें). गाजियाबाद के कलैक्ट्रेट पर राष्ट्र जागरण समिति जिला गाजियाबाद द्वारा केरल और पश्चिमी बंगाल में लगातार हो रहे संघ कार्यकर्ताओं पर हमलों के विरोध में विशाल धरने का आयोजन किया गया, जिसमें हज़ारों की संख्या में जनता ने भाग लिया. इस अवसर पर एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री जी को प्रेषित किया गया.

समिति के मंत्री कैलाश चन्द्र जी ने बताया कि किस प्रकार केरल और पश्चिमी बंगाल में सुनियोजित तरीक़े से लगातार हो रही हिंसा को सरकारों संरक्षण प्राप्त है.

पश्चिम बंगाल में हो रहे उत्पीड़न के विषय में मेयर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिन्दू समुदाय के लोगों का अस्तित्व खतरे में है. पीड़ित हिन्दुओं की बात पुलिस और प्रशासन द्वारा भी नहीं सुनी जा रही है. तृणमूल कांग्रेस की सरकार हिन्दू धार्मिक आयोजनों में भी बाधाएं खड़ी कर रही है. राम नवमी की यात्रा निकालने पर पाबन्दी लगाई गई. विद्यालयों में राष्ट्रगीत व सरस्वती वंदना के कार्यक्रमों पर भी प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में सिमुलिया मदरसा जैसी कट्टरपंथी संस्थाएं जिहादी शिक्षा दे रही हैं, बंगलादेशी घुसपैठियों एवं कट्टरपंथियों की आतंकी गतिविधियों पर राज्य सरकार ने आँखें मूंद रखी हैं.

स्वामी श्रद्धानन्द जी ने केरल में हो रहे अत्याचार पर कहा कि केरल में निरंतर जारी रक्तरंजित वामपंथी हिंसा अमन पसंद और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले राष्ट्रवादी लोगों के लिए चिंता का विषय है. केरल में पिनरई विजयन के नेतृत्व में एलडीफ सरकार के गठन के पश्चात हालात और अधिक गंभीर हुए हैं. ऐसा लगता है कि विजयन मुख्यमंत्री के रूप में नहीं एक पार्टी कार्यकर्ता के नाते कार्य कर रहे हैं. भारत के लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों वामपंथी गठबंधन सरकार के शासन में लगातार राजनैतिक हत्याएं हो रही हैं?

खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि सम्पूर्ण राष्ट्र ने एकजुट होकर केरल तथा बंगाल में हो रहे हिन्दू विरोधी तथा देश विरोधी गतिविधियों का विरोध नहीं किया तो कश्मीर जैसा बहुत व्यापक संकट भारत को झेलना पड़ सकता है.

प्रान्त प्रचार प्रमुख अजय मित्तल जी ने कहा कि 1921 में मोपला कांड में कांग्रेस के लचर रवैये के चलते हिन्दुओं में कांग्रेस के प्रति गुस्सा था और इसी का लाभ उठाकर साम्यवाद केरल में अपनी जड़ें ज़माने में सफल हो सका. उसने स्वयं को अन्तर्राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बताकर न्याय के लिए मजदूरों, पीड़ितों के पक्ष में खड़े होने वाली पार्टी के रूप में अपनी छवि गढ़ी. केरल में संघ का कार्य 1940 में प्रारम्भ हुआ, पहले दिन से ही संघ को वामपंथी के विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ा.

अरविन्द ओझा जी ने कहा कि 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया और हमारी हज़ारों किलोमीटर भूमि पर कब्ज़ा कर लिया तो देश इसके खिलाफ एक साथ खड़ा था, लेकिन नंबूदरीपाद और अन्य वामपंथियों का विरोधी तर्क था कि, “जिस भूमि पर चीन ने कब्ज़ा किया है, वह विवादित क्षेत्र है, जिसे चीन अपना और हम अपना क्षेत्र बताते हैं.

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