क्या है दो करोड़ की फोन कॉल का राज, मुख्य आरोपी तीन साल बाद गिरफ्तार Reviewed by Momizat on . सिलीगुड़ी (उत्तर बंग). ..आखिर दो करोड़ रुपये की विदेशी कॉल्स का राज क्या है, मामले में मुख्य आरोपी के दिमाग में क्या चल रहा था, देश के खिलाफ कोई षडयंत्र तो नहीं सिलीगुड़ी (उत्तर बंग). ..आखिर दो करोड़ रुपये की विदेशी कॉल्स का राज क्या है, मामले में मुख्य आरोपी के दिमाग में क्या चल रहा था, देश के खिलाफ कोई षडयंत्र तो नहीं Rating: 0
You Are Here: Home » क्या है दो करोड़ की फोन कॉल का राज, मुख्य आरोपी तीन साल बाद गिरफ्तार

क्या है दो करोड़ की फोन कॉल का राज, मुख्य आरोपी तीन साल बाद गिरफ्तार

downloadसिलीगुड़ी (उत्तर बंग). ..आखिर दो करोड़ रुपये की विदेशी कॉल्स का राज क्या है, मामले में मुख्य आरोपी के दिमाग में क्या चल रहा था, देश के खिलाफ कोई षडयंत्र तो नहीं रचा जा रहा था. हमारी भारत सरकार, इंटेलीजेंस विभाग, टेलीकॉम मिनिस्ट्री क्या कर रही थी. एक व्यक्ति देश से एक महीने तक मुस्लिम देशों में सैकड़ों कॉल करता है, कांफ्रेंस पर घंटों बातचीत होती है तथा किसी को कोई खबर ही नहीं….यदि कंपनी की ओर से व्यावसायिक हानि की शिकायत नहीं की जाती तो शायद मामले में परतें नहीं खुल पातीं. मोबाइल सिम जारी करने वाली कंपनी ने राजस्व के नुकसान को आधार बनाते हुए पुलिस में शिकायत की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए. कंपनी द्वारा जारी सिम कार्ड (छह सिम कार्ड) से एक महीने में मुस्लिम देशों को सैकड़ों फोन होते हैं, जिन पर घंटों बात होती रहती है. जिससे कंपनी को एक माह में ही करीब 2 करोड़ पांच लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो जाता है, कंपनी की आंखें खुलती हैं तो मामला पुलिस के पास पहुंचता है और जांच शुरू होती है.

आपको अब जरा विस्तार से बताते हैं……वोडाफोन कंपनी की ओर से वर्ष 2012 में आईएसडी कॉल की दरों में भारी कटौती की गई थी, जिसके बाद वर्ष के प्रारंभ में पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिला के हिली थाना के तहत छह व्यक्तियों ने सिम कार्ड लिए, स्थानीय दुकानदारों से सिम कार्ड लिए गए थे. अगले एक डेढ़ माह के अंतराल के दौरान इन छह नंबरों से सीरिया, मोरक्को, आस्ट्रेलिया सहित 20 देशों में प्रतिदिन घंटों तक कांफ्रेंस पर बात की जाती रही. सारी कॉल्स मुंबई से की जाती रहीं. एक माह के अंतराल में सैकड़ों कॉल्स पर कंपनी के होश उड़ गए, जिसके पश्चात कंपनी के सामान्य कार्य विभाग द्वारा छह नंबरों की जानकारी सहित शिकायत पुलिस के पास की गई, मोबाइल कंपनी ने दावा किया कि छह नंबरों से की गई कॉल्स के कारण उसे 2 करोड़ पांच लाख रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है. कंपनी की शिकायत पर मार्च 2012 में पुलिस ने धारा 120 बी, 420, व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की. पुलिस ने जांच के बाद उन छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम पर सिम कार्ड जारी हुए थे, जो बाद में जमानत पर रिहा हो गए. पुलिस को पूछताछ में उन्होंने बताया कि सभी सिम कार्ड हबीबुर रहमान नाम के व्यक्ति को दे दिए थे.

जनवरी 2015 में मामला सीआईडी को सौंपा गया था, जिसके बाद जांच में तेजी देखने को मिली. सीआईडी ने जांच के बाद जून माह में मुंबई से हबीबुर रहमान को गिरफ्तार किया, जिसे पूछताछ के लिए दिनाजपुर लाया गया है. पूर्व में गिरफ्तार व्यक्तियों ने सिम कार्ड (जिनके नाम पर सिम कार्ड थे) हबीबुर को ही देने की बात कही थी, जिसके आधार पर उसकी गिरफ्तारी हुई है. सीआईडी की टीम विभिन्न सवालों के जवाब ढूंढ रही है.

मामले में कुछ सवालों के जवाब ढूंढना अति आवश्यक है, सिम कार्ड का उपयोग किसने और किस उद्देश्य से किया, सिम कार्ड आरोपी ने स्वयं इस्तेमाल किए या फिर आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों को दिए गए थे, सारे मामले की असली जड़ क्या है. कंपनी दो करोड़ के व्यावसायिक नुकसान का दावा कर रही है, इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि सिम कार्ड से एक डेढ़ माह के अंतराल में कितनी फोन कॉल्स की गई होंगी.

सरकारी वकील सुभाष चकी ने बताया कि मोबाइल कंपनी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था, जिसमें मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है. पूछताछ के बाद सारी जानकारी मिल पाएगी. धारा 120बी, 420 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है.

About The Author

Number of Entries : 3580

Comments (1)

Leave a Comment

Scroll to top