गुरू शिवानंद मूर्ति जी के समाधिस्थ होने पर पू. सरसंघचालक जी, सरकार्यवाह जी का शोक संदेश Reviewed by Momizat on . तेलंगाना. पूज्य गुरू शिवानंद मूर्ति 10 जून बुधवार को सुबह वारंगल के गुरुधाम आश्रम में समाधिस्थ हो गए. उनके निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शोक व्यक्त किया. क तेलंगाना. पूज्य गुरू शिवानंद मूर्ति 10 जून बुधवार को सुबह वारंगल के गुरुधाम आश्रम में समाधिस्थ हो गए. उनके निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शोक व्यक्त किया. क Rating: 0
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गुरू शिवानंद मूर्ति जी के समाधिस्थ होने पर पू. सरसंघचालक जी, सरकार्यवाह जी का शोक संदेश

Sadguru_Sivananda_Murty (1)तेलंगाना. पूज्य गुरू शिवानंद मूर्ति 10 जून बुधवार को सुबह वारंगल के गुरुधाम आश्रम में समाधिस्थ हो गए. उनके निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शोक व्यक्त किया. क्षेत्र में गुरू शिवानंद मूर्ति के काफी अनुयायी हैं. उन्होंने विशाखापत्तनम, वारंगल में दो आश्रमों का भी निर्माण किया है. अनुयायियों के अन्तिम दर्शनार्थ उनके शरीर को आश्रम में ही रखा जाएगा. उनका जन्म 21 दिसंबर 1928 को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिला में हुआ था. उनके कार्य को देखते हुए आंध्र विवि ने उन्हें डाक्टरेट की उपाधि से नवाजा है.

पूज्य गुरू शिवानंद मूर्ति के समाधिस्थ होने पर प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी, सह सरकार्यवाह वी भग्गया जी का शोक संदेश……..

पूज्य सद्गुरु शिवानन्द मूर्ती जी की समाधी का समाचार सुनकर गहरा आघात लगा. आप इस आधुनिक युग में सम्पूर्ण हिन्दू समाज को, हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करने के लिए योग्य मार्गदर्शन देने वाले योगीश्वर थे.

पूरे भारतवर्ष के बौद्धिक जगत में एक सांस्कृतिक नवोत्थान उन्होंने लाया. सभी को सत्कर्म एवं समाज सेवा करने की प्रेरणा पूज्य स्वामी जी ने दी. पूजनीय गुरूजी के समय से लेकर अभी तक उन्होंने एक स्वयंसेवक के नाते हम सभी को दिशादर्शन किया. देश की एकात्मता को मजबूत करना एवं उत्तर पूर्व में जागृति लाना, इस दृष्टी को आगे रखकर आसाम में प्रवास किया.

धार्मिक मूल्यों को आधार बनाकर हिन्दू समाज को जगाने के कार्य में स्वामी जी ने अनमोल आदर्श प्रस्तुत किया. ब्रह्मलीन स्वामीजी के चरणकमलों पर हम शत-शत प्रणाम अर्पित करते हैं. उनके परिवार के सब सदस्यों एवं शिष्य अनुयायियों को हम मनपूर्वक शोक व्यक्त करते हैं. आपका पार्थिव शरीर केवल हमारे चर्मचक्षुओं से अदृश्य हुआ होगा. लेकिन उनका धर्मनिष्ठ, सुसंकृत एवं आदर्श शुद्ध ज्वलंत जीवन पूरे समाज एवं समाज के अन्यान्य क्षेत्रों में कार्यरत स्वयंसेवकों के लिए सदा सर्वदा प्रेरणादायी रहेगा.

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