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ग्राम विकास पदयात्रा प्रकृति – समाज – देश के प्रति दायित्वबोध जगाने की यात्रा

भोपाल (विसंकें). ग्राम विकास पदयात्रा प्रकृति – समाज – देश के प्रति दायित्वबोध जगाने की यात्रा है. भारत माता, धरती माता, गंगा माता, गौमाता और तुलसी माता की जय-जयकार करके हम प्रकृति, देश -समाज अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति आभार प्रकट करते हैं. विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसके साथ माता की उपाधि जुडी है.

यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसोदिया जी ने धर्मपुर मंडल के मालवार और टेमरू गाँव में विकास पदयात्रा के दौरान आयोजित सभाओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये. उन्होंने ग्राम विकास प्रमुख सुखराम साहू, व अन्य स्वयंसेवको के साथ विष्णुपुर से मलवर, टेमरू, त्वाकाती, गोल्हाई बुजुर्ग, क्तासुर होते हुए शिवसागर तक 20 किमी. की पदयात्रा की. घोड़ाडोंगरी खंड में ग्राम विकास पद यात्रा पूरे एक माह तक चलेगी. ग्राम विकास पदयात्रा जहां भी पहुंच रही है. वहां ग्रामवासियों द्वारा ग्राम के मेंढे पर पहुंचकर यात्रा का स्वागत किया जा रहा है. यात्रा जिस गाँव से आगे रवाना होती है. उस गाँव का कोई व्यक्ति भारत माता का चित्र और भगवा ध्वज हाथों में लेकर यात्रा की अगुवाई करते हुए चलता है. यात्रा जिस गाँव में पहुंचने वाली होती है, उस गाँव के लोग पहले ही गाँव के बहार मेंढे पर एकत्र रहते हैं और पदयात्रा की अगवानी करते हैं. ग्रामवासियों द्वारा पदयात्रा में रखे जा रहे विषयों को आत्मसात करने का संकल्प भी लिया जा रहा है.

यात्रा 01 जनवरी से ग्राम चोपना से प्रारंभ हुई. अभी तक 10 मंडलों के 49 ग्रामों में पहुंच चुकी है. पदयात्रा के दौरान  मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक सुरेन्द्र सोलंकी जी ने कहा कि ग्राम विकास यात्रा गाँव को स्वावलंबी बनाने, नारी शक्ति के सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार हेतु कौशल विकास, जलसंरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर निकाली जा रही है. महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूती एवं सशक्तिकरण के विषय पर प्रकाश डाला. भारत वर्ष में माता के संस्कारों के कारण ही पुरुष सतमार्ग पर चलकर महापुरुष बने हैं. युवाओं के रोजगार के विषय पर ग्राम विकास समिति द्वारा युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करने की बात कही.

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