चेतराम जी का राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा Reviewed by Momizat on . शिमला (विसंकें). हिमाचल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन करने वाले चेतराम जी का पार्किंसन नामक लंबी बीमारी के कारण 05 अगस्त 2 शिमला (विसंकें). हिमाचल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन करने वाले चेतराम जी का पार्किंसन नामक लंबी बीमारी के कारण 05 अगस्त 2 Rating: 0
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चेतराम जी का राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा

शिमला (विसंकें). हिमाचल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन करने वाले चेतराम जी का पार्किंसन नामक लंबी बीमारी के कारण 05 अगस्त 2017 को प्रातः शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में निधन हो गया. 05 अगस्त को प्रांत कार्यालय शिमला में रामेश्वर जी की उपस्थिति में स्वयंसेवकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को बिलासपुर संघ कार्यालय में स्वयंसेवकों सहित नगर वासियों ने अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी. उनका अंतिम संस्कार 05 अगस्त को ही सायं 6.00 बजे उनके पैतृक गांव हनुमन्ता (अबोहर, पंजाब) में उनके परिवार, रिश्तेदारों एवं  गांव के प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति में किया गया. वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रेम कुमार जी, बनवीर जी, हिमाचल के प्रांत संघचालक कर्नल रूपचंद जी सहित हिमाचल एवं पंजाब के कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे. 06 अगस्त को अस्थिसंचन की प्रक्रिया को पूरा करके 07 अगस्त दोपहर 2.00 बजे हरिद्वार में उनके परिवार एवं प्रांत कार्यकर्ताओं द्वारा श्री गंगाजी के घाट पर अस्थियों का विसर्जन किया गया.

चेतराम जी का जीवन अनुशासन से बंधा हुआ, अपने प्रति कठोर और संघ कार्य के प्रति अहर्निश समर्पित रहा. उनका जन्म पंजाब के फाजिल्का जिला की अबोहर तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले गांव हनुमंता में 03 अगस्त 1948 को हुआ था. पिता रामप्रताप और माता दाखां देवी की दो भाईयों और पांच बहनों में यह चौथी संतान थे. चेतराम जी विद्यार्थी जीवन में ही संघ के स्वयंसेवक बने. सन् 1971 में सहकारी बैंक की नौकरी छोड़कर प्रचारक के नाते पंजाब में कार्य किया. सन् 1982 में वे हिमाचल आ गये और यहां पर बिलासपुर, मंडी विभाग के विभाग प्रचारक का दायित्व निर्वहन किया. प्रचारक जीवन अपनाने के पश्चात इन्होंने विवाह नहीं किया और पूरा जीवन संघ के नाम कर दिया. वर्ष 2007 में विद्या भारती हिमाचल (हिमाचल शिक्षा समिति) के संरक्षक के नाते हिमाचल में सरस्वती विद्या मंदिरों के विस्तार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. अपने जीवन में बिलासपुर को ही केंद्र बनाकर संघ कार्य में लीन रहने वाले चेतराम जी स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं में पालक के रूप में प्रख्यात थे. चेतराम जी ने शिक्षा समिति के माध्यम से शिक्षा को आगे ले जाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रदेश के अनेक शिक्षक और शिक्षाविद इनको शिक्षा के लिए किये इनके सकारात्मक प्रयासों के कारण जानते हैं. समाज के प्रति चिंतन से ओतप्रोत इनका जीवन कर्मठता और सकारात्मक विचारों के कार्यान्वयन के लिए भी याद किया जाएगा.

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