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जनभाषा केंन्द्रों के माध्यम से संस्कृत बनेगी बोलचाल की भाषा

दुर्ग, भिलाई (छत्तीसगढ़). अब वह दिन दूर नहीं जब लोग आम बोलचाल की भाषा में संस्कृत का इस्तेमाल करेंगे. संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए दुर्ग जिले में 20 जनभाषा केन्द्र खोले जा रहे हैं. प्रदेश में दुर्ग जिले में इसकी शुरुआत पहली बार की जा रही है. संस्कृत विद्यामंडलम्‌ और जिला शिक्षा विभाग ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. जनभाषा केन्द्र की कार्ययोजना जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे और संस्कृत विद्यामंडलम्‌ के सदस्य आचार्य नीलेश शर्मा ने तैयार की है. शिक्षामंत्री केदार कश्यप के समक्ष कार्य योजना का प्रस्ताव दिया गया था. प्रस्ताव को मंत्री ने अनुशंसित कर विद्यामडलम्‌ को भेजा. इन केन्द्रों में दुर्ग जिला शिक्षा विभाग के संस्कृत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की खास भूमिका रहेगी. दुर्ग जिले के 186 संस्कृत शिक्षकों में से ऐसे 22 शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्हें संस्कृत में महारत हासिल है. खास बात यह है कि ये शिक्षक समाजसेवी के रूप में जनभाषा केन्द्र का संचालन करेंगे और कोई शुल्क नहीं लेंगे.

आगच्छतु, उपविशतु से होगी शुरूआत

जनभाषा केन्द्र में बोलचाल की भाषा इस तरह लोगों को सिखाई जाएगी. मसलन आइए को आगच्छतु कहेंगे. बैठिए को उपविशतु, नमस्कार को नमोनमः, धन्यवाद को धन्यवादः, खाईए को खादतु, ग्रहण कीजिए को स्वीकारयतु जैसे सरल शब्दों से शुरूआत होगी. आसपास के बच्चे, युवा हों या कोई भी व्यक्ति उन्हें इस केन्द्र से जोड़ेंगे और संस्कृत के ऐसे ही शब्दों की सीख देंगे. जनभाषा केन्द्र गांवों और बस्तियों में शुरू की जा रही है. यहां किसी भी सार्वजनिक भवन में यह केन्द्र हर दिन शाम को दो से तीन घंटे चलेगा.

चयनित संस्कृत शिक्षक इन केन्द्रों को ऐसे युवक के सौंप देंगे जो इसका नियमित व बेहतर संचालन आगे करता रहे. संस्कृत शिक्षक फिर दूसरी जगह केन्द्र शुरू करेंगे. यह सतत प्रक्रिया चलती रहेगी और लोगों के बीच इस तरह संस्कृत प्रचलन में आता रहेगा.

इन स्थानों पर संस्कृत जनभाषा केन्द्र

तिलक स्कूल दुर्ग, बोरई, खुर्सीपार, रिसाली भिलाई, बोरसी दुर्ग, वैशालीनगर भिलाई, मेड़ेसरा, जामुल, अंजोराख, कुरूद, सेलूद, जामगांव आर, खुड़मुड़ी, जामगांव एम, भनसुली, बिरेझर, बोरी, रानीतराई, ओदरहागहन, खपरी, लिटिया में संस्कृत जनभाषा केंद्र खुलेंगे.

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