जनसहभागिता व राष्ट्रीयता एक दूसरे के पूरक हैं – हितेश शंकर जी Reviewed by Momizat on . नोएडा. प्रेरणा शोध संस्थान द्वारा "राष्ट्रीयता में जनसहभागिता" विषय पर प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में केशव संवाद पत्रिका के "राष्ट्रीयत नोएडा. प्रेरणा शोध संस्थान द्वारा "राष्ट्रीयता में जनसहभागिता" विषय पर प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में केशव संवाद पत्रिका के "राष्ट्रीयत Rating: 0
You Are Here: Home » जनसहभागिता व राष्ट्रीयता एक दूसरे के पूरक हैं – हितेश शंकर जी

जनसहभागिता व राष्ट्रीयता एक दूसरे के पूरक हैं – हितेश शंकर जी

नोएडा. प्रेरणा शोध संस्थान द्वारा “राष्ट्रीयता में जनसहभागिता” विषय पर प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में केशव संवाद पत्रिका के “राष्ट्रीयता” अंक का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम का आयोजन शम्भू दयाल पी.जी. कॉलेज, गाजियाबाद के सभागार में किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के गम्भीर विषयों पर शोध एवं अन्वेषण के उपरान्त इस प्रकार की जागरूकता का संचार समाज में करने में प्रेरणा शोध संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. राष्ट्रीयता जनसहभागिता एक दूसरे के पूरक हैं, जनसहभागिता के अभाव में राष्ट्रीयता का महत्व नहीं रह जाता. मुख्य अतिथि खाद्य रसद मन्त्री अतुल गर्ग जी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आज की आवश्यकता है और समाज में सहभागिता के लिये होते रहने चाहिये. कार्यक्रम अध्यक्ष शम्भू दयाल पी.जी. कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मंजू गोयल ने कार्यक्रम को प्रेरणादायी बताया और आयोजन के लिये आयोजकों को धन्यवाद दिया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के संयुक्त प्रचार प्रमुख कृपाशंकर जी ने बताया कि केशव संवाद पत्रिका में राष्ट्रीय महत्व के सारगर्भित विषयों को जन सामान्य के मध्य पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और प्रेरणा जनसंचार शोध संस्थान के माध्यम से पत्रकारिता से सम्बंधित 42 छोटे बड़े कोर्स विद्यार्थियों के लिये चलाये जा रहे हैं और दूर दूर के क्षेत्रों से विद्यार्थियों के अतिरिक्त व्यवसायी, डॉक्टर, एडवोकेट एवं गृहणियां बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

विशिष्ट अतिथि  डॉ. वंदना पाण्डेय, पूर्व डीन, फैकल्टी ऑफ मीडिया स्टडीज, गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय साइंस एंड टैक्नोलॉजी हिसार (हरियाणा) ने पत्रकारिता में राष्ट्रीयता के भाव में कमी का मुख्य कारण पत्रकारिता क्षेत्र में मूल्यपरक पत्रकारों का अभाव बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता के बिना पत्रकारिता की कल्पना भी नहीं की जा सकती. राष्ट्र की संकल्पना व राष्ट्रीयता का भाव ही सच्ची व श्रेष्ठ पत्रकारिता के मूल आधार हो सकते हैं. मंच संचालन डॉ. नीलम पवार जी ने किया. कार्यक्रम संयोजक प्रो. अखिलेश मिश्र रहे.

About The Author

Number of Entries : 3679

Leave a Comment

Scroll to top