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जेएनयू के पश्चात बंगाल के जादवपुर विवि में देश विरोधी नारे

कोलकाता (विसंकें). जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 9 फरवरी को देश विरोधी नारे लगाए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी मंगलवार को घृणित कार्य को अंजाम दिया. संसद हमले में फांसी पा चुके अफजल गुरु के समर्थन तथा कश्मीर की आजादी के लिए छात्रों की अच्छी खासी तादाद में कोलकाता में रैली निकाली. हैरत की बात है कि छात्रों ने कश्मीर के साथ साथ पूर्वोत्तर के राज्य ‘मणिपुर’ की आजादी के नारे भी लगाए. मंगलवार को मामले का वीडियो सामने आने के बाद छात्रों की हरकत सामने आई. छात्रों की यह हरकत देश के लिए चिंता का विषय है, तो दूसरी ओर उन नेताओं के लिए भी शर्मनाक है जो जेएनयू के छात्रों की तथाकथित ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का समर्थन करते फिर रहे हैं. और पुलिस कार्रवाई के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं.

जादवपुर विवि में छात्र-छात्राएं जो नारे लगा रहे थे – “अफजल बोले आजादी, गिलानी बोले आजादी आजादी, जो तुम न दोगे तो छीन के लेंगे आजादी.” दो विवि की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के टुकड़े करने की मंशा रखने वाले पाकिस्तानी आतंकियों के आकाओं और कश्मीरी अलगाववादियों ने भारत के तथाकथित कुत्सित मानसिकता के सेक्युलरवाद एवं नक्सलवाद सोच वालों के रूप में अपने प्रतिनिधियों को पा लिया है और यह उनके एजेंडे का भारत में दुष्प्रचार कर रहे हैं.

जादवपुर विवि की घटना की कड़ी निंदा करते हुए भाजपा नेता सिद्धार्थनाथ सिंह ने ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार से मांग की कि देशद्रोही छात्रों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए. दूसरी ओर सीपीआई नेता गुरुदास दासगुप्ता ने नारों की निंदा करते हुए कहा कि इन हरकतों से लोकतंत्र कमजोर पड़ जाता है. सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात ने कहा कि वामपंथी दल नारेबाजी का समर्थन तो नहीं करते, लेकिन भारतीय संविधान के अंतर्गत कश्मीर को स्वायत्ता देने की वकालत जरूर करते हैं.

 

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