जो स्वयं के लिए कुछ नहीं करता, वह ऋषि है – भय्याजी जोशी Reviewed by Momizat on . राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर चित्रकूट में ग्रामोदय मेला संपन्न चित्रकूट. भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान समाज जीवन के सभ राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर चित्रकूट में ग्रामोदय मेला संपन्न चित्रकूट. भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान समाज जीवन के सभ Rating: 0
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जो स्वयं के लिए कुछ नहीं करता, वह ऋषि है – भय्याजी जोशी

राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर चित्रकूट में ग्रामोदय मेला संपन्न

चित्रकूट. भारत रत्न नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान समाज जीवन के सभी पहलुओं पर कार्य कर रहा है. भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर ग्रामीणजनों को कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन, पशुपालन जैसे अन्य क्षेत्रों की विविध गतिविधियों एवं योजनाओं व प्रगति की जानकारी देने हेतु कार्यक्रमों का आयोजन करता है. इस वर्ष भी विरासत, संस्कृति एवं विकास को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. जिसके अन्तर्गत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ फूड कॉर्नर, मनोरंजन, खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों का स्टॉल, मेले का आकर्षण रहा, साथ ही विभिन्न सेमिनारों का आयोजन भी किया गया. ग्रामोदय मेला-आदि ग्राम कुंभ में पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार की संस्था ट्राइफैड से जुड़े 20 राज्यों से लगभग 200 आदिवासी कलाकारों ने हाथों से बनाई हस्त कला के नायाब उत्पादों के साथ प्रतिभाग किया.

24-27 फरवरी तक आयोजित चार दिवसीय ग्रामोदय मेला-आदि ग्राम कुंभ का समापन संस्थान के विवेकानन्द सभागार में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ. समापन सत्र में म.प्र. की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी, दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन्द्रजीत सिंह, सूर्यप्रताप साही कृषि मंत्री उ.प्र. शासन, अतुल जैन प्रधान सचिव दीनदयाल शोध संस्थान सहित अन्य मंचासीन रहे. आदि कुंभ की भूमिका संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन ने रखी.

सूर्यप्रताप साही ने कहा कि नानाजी एक अच्छे संगठनकर्ता थे. नानाजी जैसे संगठनकर्ता बिरले ही होते हैं. प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग एवं उनकी दूरदृष्टिता का भाव प्रेरणादायी है. संस्थान द्वारा स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्रों की श्रृंखला में चित्रकूट जिले में स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां के बीज भण्डार का प्रत्यक्ष अवलोकन किया है. जहां एक हजार से अधिक प्रकार के बीजों का संकलन किया गया है.

सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि आज हम सब एक श्रेष्ठ महात्मा को श्रद्धांजलि देने के लिये एकत्र हुए हैं. उनके बताए मार्ग पर चलने की शक्ति हमारे अंदर रहे, इसलिये हम सब ऐसे आयोजन करते हैं. समाज में जो स्वयं के लिये कुछ नहीं करता वह ऋषि है. ऋषि मुनि आने वाली पीढ़ी के लिये कुछ देकर जाते हैं. नानाजी का जीवन पर्यन्त चिंतन का विषय रहा कि भारत का गौरव बढ़े. व्यक्ति की ऊंचाई क्या होती है, कोई समाज उनकी परछाई से जानता है. नानाजी ऐसे महापुरूष थे, जिनकी परछाई अनादिकाल रहेगी. कोई भी समाज स्वाभिमान से जीना चाहता है. हम स्वप्न देखेंगे और उन्हें पूरा भी करेंगे. ऐसे चिंतक थे नानाजी देशमुख. आज देश एक विशेष स्थान पर हमारे वीर सैनिकों के शौर्य से पहुंचा है. देश विजय पथ पर चल चुका है. अतः हम सबका भी लक्ष्य होना चाहिए कि इस यज्ञ में हम भी एक आहुति बन अपना जीवन सफल करें.

राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख युग दृष्टा थे. उनका ध्येय वाक्य था ‘हम अपने लिये नहीं अपनों के लिये हैं, अपने वे हैं जो पीड़ित एवं उपेक्षित हैं’. इसी ध्येय वाक्य को अपने अभिन्न सखा पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के नाम दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना कर इसके विविध प्रकल्पों के माध्यम से साकार किया. नानाजी ‘‘युग दधीचि’’ थे. जीवन पर्यन्त राष्ट्र, समाज की सेवा करते हुए भौतिक शरीर छोड़ने के बाद आपने अपनी देह भी दधीचि देह दान संस्था को शोध कार्य के लिये अर्पित करने की वसीयत अपने जीवन काल में ही लिख दी थी. अतः उनका भौतिक शरीर चित्रकूट के पावन भू से वायु मार्ग से दिल्ली ले जाया गया. नानाजी कहते थे – राजनीति में अंतिम व्यक्ति की सेवा, यह सबका लक्ष्य होना चाहिए, जिसे नानाजी ने करके दिखाया. मुझे भगवान राम से वनवासी बन्धु अधिक प्यारे लगते हैं. आपने इन बंधुओं के जीवन को ऊपर उठाने के लिये कृष्णादेवी वनवासी बालिका विद्यालय, रामनाथ आश्रमशाला, परमानन्द आश्रम पद्धति विद्यालय आदि की स्थापना करवायी, जहाँ से शिक्षा लेकर आज वनवासी छात्र-छात्राएं विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं.

दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन्द्रजीत सिंह ने आदि ग्राम कुंभ के समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने कहा कि विदेशी को देश अनुकूल एवं देश को समाजानुकूल चलाने का प्रयास होना चाहिए. हम सब भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी के मानस पुत्र हैं. नानाजी ने पं. जी के एकात्मदर्शन को युगानुकूल बनाया. हम सबका भी इस यज्ञ को आगे बढ़ाने में विशेष दायित्व है. ऐसे ऋषि नानाजी जिनका ध्येय था, मेरा शरीर भी मेरा अपना नहीं है, ऐसे शक्तिमान देव पुरूष द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान के कार्य को आगे बढ़ाने की शक्ति प्रभु हमें दे. इस ऊर्जा को लेकर जब हम अपने-अपने क्षेत्रों में जाएंगे और कुछ नया प्रस्तुत करके दिखाएंगे, वही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

कृषि क्षेत्र में सूचना प्रसारण तकनीक की उपयोगिता पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें 86 कृषि वैज्ञानिक विभिन्न क्षेत्रों से सम्मिलित हुए. कृषि मंत्री सूर्यप्रकाश साही ने कृषिगत क्षेत्रों में विकास के लिये विकसित एवं उन्नत तकनीकों को इजरायल एवं फिलीपींस की तरह भारत में भी उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया.

भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की 9वीं पुण्यतिथि पर दीनदयाल परिसर में श्रद्धा स्थल पर संस्थान के पदाधिकारियों और देशभर से चित्रकूट पहुंचे कार्यकर्ताओं ने विधि-विधान पूर्वक श्रद्धासुमन अर्पित किया. अखण्ड रामचरित मानस पाठ की पूर्णाहुति हवन-पूजन के साथ सम्पन्न हुई. पं. दीनदयाल पार्क में बने श्रद्धास्थल पर पुष्पार्चन का क्रम चलता रहा, दूसरी ओर रामचरित मानस पाठ में भी लोग अपनी आहुति डाल रहे थे.

एक मुट्ठी अनाज एवं एक रुपया सहयोग से विशाल भण्डारा

भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने आम जनता की पहल एवं पुरूषार्थ से चित्रकूट में सामाजिक पुनर्रचना का जो कार्य खड़ा किया, उसमें उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चि करने का प्रयास किया था. उनकी उसी परंपरा को बरकरार रखने के लिये नानाजी की 9वीं पुण्यतिथि पर विशाल भंडारा आम जनमानस के एक मुट्ठी अन्न और 01 रुपए के सहयोग से सम्पन्न हुआ. जिसमें दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं ने टोली बनाकर प्रत्येक गांव एवं घर-घर तक पहुंचकर ग्रामोदय मेला-आदि ग्राम कुंभ का आमंत्रण दिया और सहयोग की अपेक्षा की. जिसमें सभी ग्रामवासियों एवं नगरवासियों अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया.

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