ताकतवर होती है मर्यादा वाली पत्रकारिता – न्यायमूर्ति मंधाता सिंह जी Reviewed by Momizat on . पटना (विसंकें). बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मंधाता सिंह जी ने कहा कि पत्रकारिता की मर्यादा को ध्यान में रखकर यदि पत्रकारिता की जाए तो खतर पटना (विसंकें). बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मंधाता सिंह जी ने कहा कि पत्रकारिता की मर्यादा को ध्यान में रखकर यदि पत्रकारिता की जाए तो खतर Rating: 0
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ताकतवर होती है मर्यादा वाली पत्रकारिता – न्यायमूर्ति मंधाता सिंह जी

पटना (विसंकें). बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मंधाता सिंह जी ने कहा कि पत्रकारिता की मर्यादा को ध्यान में रखकर यदि पत्रकारिता की जाए तो खतरे काफी हद तक कम हो जाते हैं. एक पत्रकार से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी व्यक्ति, संस्था या व्यवस्था का विरोधी न बनते हुए, त्रुटियों को उजागर करे. ऐसे में एक पत्रकार के विरोध में खड़े कुछ निहित स्वार्थी तत्व का समाज विरोधी बन जाता है. यही लोकमत जागरण है. अपने पेशागत गरिमा को ध्यान में रखकर ईमानदारी से कर्तव्य निर्वहन करने की आवश्यकता है. मर्यादा से युक्त पत्रकारिता ताकत वाली होती है. वे ‘मीडिया की मर्यादा और पत्रकार सुरक्षा कानून’ विषयक संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे.

विश्व संवाद केंद्र सभागार में आयोजित संगोष्ठी में न्यायमूर्ति मंधाता जी ने कहा कि बिहार में पत्रकारों की हत्या हो रही है. लेकिन यह बात भी सामने आ रही है कि कई पत्रकारों की हत्या सिर्फ समाचार संकलन या पत्रकारिता पेशे के कारण नहीं, बल्कि उसकी जड़ें कहीं और भी थी.

संगोष्ठी का विषय प्रवेश में वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वत्व के संपादक तथा एनयूजे (आई) बिहार के उपाध्यक्ष कृष्णकांत ओझा जी ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में समाचार और विचार का प्रसार कर लोकतंत्र को स्वस्थ बनाने के अनुकूल वातावरण बनाना है. लेकिन पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य और कर्म से भटक कर जब एजेंडा तय करने लगे तो यह समाज व देश दोनों के लिए घातक होता है. पत्रकारिता के किसी संगठन, किसी संस्था या व्यक्ति के हथियार के तौर पर उपयोग की प्रवृत्ति बढ़ी है. यही कारण है कि पत्रकार निरपेक्ष ना रह कर कहीं ना कहीं किसी खेमे में खड़े दिखते हैं और आक्रोश के शिकार होते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार एवं बिहार प्रेस मेंस यूनियन के अध्यक्ष एस.एन. श्याम जी ने कहा कि पत्रकारों को अपनी मर्यादा का ख्याल अवश्य करना चाहिए. पत्रकार अपराधी तत्वों के लिए सबसे आसान लक्ष्य है. पत्रकारों की सुरक्षा के लिए 2005 से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की जा रही है. वर्ष 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून राज्य में लागू किया. इसमें सिर्फ पत्रकारों की सुरक्षा की बात नहीं की गई है, बल्कि पत्रकारों द्वारा पीड़ित परिवार की सुरक्षा की व्यवस्था भी की गई है. बिहार में भी इस प्रकार के सुरक्षा कानून की आवश्यकता है. वरिष्ठ पत्रकार एवं बिहार राज्य श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव प्रेम कुमार जी ने कहा कि पत्रकारों की आए-दिन हत्याएं हो रही है. पत्रकार न तो अपनी संस्था में और न ही समाज में सुरक्षित है. अतः पत्रकार सुरक्षा कानून अत्यंत आवश्यक है.

वरिष्ठ पत्रकार चंदन झा ने मीडिया घराने के अंदर दी जाने वाली धमकियों के अनुभव को साझा किया. उन्होंने बताया कि मीडिया हाऊस के अंदर भी दबंग तत्व के लोग खबरों को बेवजह रोकने के लिए धमकी देते हैं. ऑल इंडिया रिपोटर्स एसोसिएशन के बिहार प्रदेश सचिव नीरव समदर्शी जी ने पत्रकारों के मार्यादित व्यवहार और पत्रकार सुरक्षा कानून पर अपने विचार व्यक्त किये. अन्य पत्रकारों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. विश्व संवाद केंद्र के न्यासी हरिशंकर शर्मा जी ने सभी का आभार व्यक्त किया. मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार विजय कृष्ण अग्रवाल जी ने किया.

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