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देश को भारत केन्द्रित शिक्षा की आवश्यकता – डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी

अमृतसर में विद्या भारती की अखिल भारतीय साधारण सभा की बैठक 08 से 10 अप्रैल तक

अमृतसर. विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की अखिल भारतीय साधारण सभा – 2017 की बैठक अमृतसर में 08 अप्रैल से 10 अप्रैल तक होगी. जिसमें देशभर के करीब 400 शिक्षाविद् उपस्थित रहेंगे. माधव विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रणजीत एवेन्यू, अमृतसर में साधारण सभा का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी करेंगे. बैठक के दूसरे दिन अलग-अलग विषयों पर आयोजित संगोष्ठी में विद्या भारती के अध्यक्ष डॉ. गोविंद शर्मा जी, राष्ट्रीय मंत्री अवनीश भटनागर जी व्याख्यान देंगे और समापन कार्यक्रम में शिक्षाविदों को विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री काशीपति जी संबोधित करेंगे. साधारण सभा के बारे में जानकारी विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी जी ने माधव विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित प्रेसवार्ता में दी.

उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य शिक्षा के अलग-अलग आयामों पर विचार करते हुए ऐसी शिक्षा का प्रकटीकरण करना है जो भारत केंद्रित हो, जिससे स्कूली छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो. सामाजिक संदर्भों में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका कैसी हो? जिसे प्राप्त कर भारतीय युवा पीढ़ी में अपने गौरवशाली अतीत, सांस्कृतिक धरोहर, साहित्य, दर्शन, श्रद्धा-केन्द्र आदि के प्रति गौरव भाव उत्पन्न हो. जिस आधार पर ऐसे समाज का निर्माण किया जा सके जो भविष्य में अच्छे नागरिकों का निर्माण कर सके. विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने सदैव नवाचार एवं नई तकनीकी का स्वागत किया है. इसके अलावा बैठक में 2016-17 के कार्यों की समीक्षा की जाएगी और 2017-18 के लिए कार्य लक्ष्य निर्धारित किये जाएंगे.

उन्होंने बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान एक ऐसा संगठन जो अपने आप में अनेक विशेषताओं को संजोए हुए है. इसके अन्तर्गत पूरे भारत में 11 क्षेत्र आते हैं. हर ईकाई में लगभग चार, पांच या छह प्रांत आते हैं. जिसमें 13,000 से अधिक औपचारिक विद्या मंदिर चल रहे हैं. औपचारिक शिक्षा के अतिरिक्त ऐसे पिछड़े इलाके जैसे गाँव, नगर की सेवा बस्तियों, विविध संवेदनशील क्षेत्रों जैस सीमा, नक्सल प्रभावित क्षेत्र, जहां शिक्षा पहुंचाना कठिन कार्य है, ऐसे सुदूर हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक 12,500 एकल विद्यालय और सरस्वती संस्कार केन्द्र चल रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहा है. ऐसे सभी स्तरों पर विद्या भारती के कार्य की देखरेख करने वाले कार्यकर्त्ता वार्षिक बैठक हेतु माधव विद्या निकेतन आ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में विद्या भारती भारतीय जीवन-दर्शन, जीवन-मूल्य एवं शिक्षा-दर्शन के अनुरूप कार्य करने के विश्वासी हैं. विद्या भारती के विद्या मंदिरों में शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कार आधारित शिक्षा भी दी जाती है. ताकि आने वाले जीवन में भारत की युवा पीढ़ी स्वस्थ सोच वाला भारतीय नागरिक बन कर निकले अर्थात् ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण हो जो देश-भक्त, चरित्रवान होने के साथ-साथ अपने समाजोपयोगी कार्य से समाज को समर्पित हो. इस प्रकार का प्रयास विद्यामंदिरों में किया जाता है. विद्या भारती के शिक्षा मॉडल के सफलता के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं- भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया – 2017 (एसजीएफआई-2017) में विद्या भारती के 187 विद्यार्थियों ने मेडल प्राप्त किये. केरल राज्य के जनजाति गाँव अट्टापड़ी की वेलमणि नाम की छात्रा विद्या भारती द्वारा संचालित विद्या मंदिर के हॉस्टल में रहकर डॉ. बनी है. ऐसे ही मानस का विद्यार्थी आईएएस ऑफिसर बना. बरनाला का छात्र आसाम में आईएएस बनकर कार्य कर रहा है. पिछले साल असम, उड़ीसा के विद्यार्थियों ने केंद्रीय और राज्य स्तरीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान प्राप्त किया है. 2016 के असम बोर्ड में टॉप करने वाला सरफराज़ हुसैन विद्या मंदिर का छात्र था. विद्या भारती द्वारा नए-नए प्रयोग करते हुए समय के अनुसार नई शिक्षा तकनीक मॉडल का आश्रय लेकर शिक्षा दी जाती है. जिससे नई समर्थ पीढ़ी तैयार हो सके, समर्थ भारत उठ सके.

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