देश को स्वावलंबी बनाने के लिए जनता को भी सक्रिय होने की आवश्यकता – सुरेश भय्या जी जोशी Reviewed by Momizat on . लातूर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि हिन्दुस्थान को स्वाधीनता के पश्चात स्वावलंबी बनाने हेतु केवल नेताओं के ही न लातूर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि हिन्दुस्थान को स्वाधीनता के पश्चात स्वावलंबी बनाने हेतु केवल नेताओं के ही न Rating: 0
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देश को स्वावलंबी बनाने के लिए जनता को भी सक्रिय होने की आवश्यकता – सुरेश भय्या जी जोशी

bhaiyyaji at latur 2लातूर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि हिन्दुस्थान को स्वाधीनता के पश्चात स्वावलंबी बनाने हेतु केवल नेताओं के ही नहीं, किन्तु आम जनता को भी सक्रिय होने की आवश्यकता है. सरकार्यवाह लातूर स्थित एमआईटी अभियांत्रिकी मेडिकल कॉलेज में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान संबोधित कर रहे थे. मंच पर संघ के पूर्व पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. अशोक कुकड़े, सांसद डॉ. सुनील गायकवाड़, विभाग संघचालक व्यंकट सिंह चौहान, महाविद्यालय के संचालक रमेश कराड़ उपस्थित थे. कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. सरिता मंत्री ने प्रस्तुत की.

सरकार्यवाह ने कहा कि हमें गर्व करना चाहिये कि हम स्वाधीन तथा सार्वभौम भारत के नागरिक हैं, मानव कल्याण का संदेश देने वाले भारत के हम नागरिक हैं और इस देश को गुलामी से बाहर निकालकर स्वाधीनता मिलने के पश्चात अपने बलबूते पर खड़ा करने वाले बदलाव के हम साक्षी हैं. देश के संपूर्ण विकास के लिए आम आदमी केवल मूक दर्शक न बने, केवल सरकार पर निर्भर न रहते हुए हर आम आदमी के सक्रिय होने की आवश्यकता है.

हिन्दुस्थान के गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हुए सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि इस देश में ऋषि मुनियों ने, साधु संतों ने, सामाजिक सुधार करने वाले महापुरुषों ने आदर्श स्थापित किए हैं. इस कारण यह देश आदेशों पर ही नहीं, अपितु आदर्शों पर चलने वाला देश है. भारत देश के ताकतवर होने में ही विश्व का कल्याण निहित है. हमारे हर विश्वविद्यालय में विद्वतजन विराजमान हैं. इस देश से जब हमारे लोग बाहर जाते हैं तो शस्त्र लेकर नहीं, बल्कि शास्त्र लेकर जाते हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि हम दुर्बल हैं, हम इतने सक्षम हैं कि हमें कोई मिटा नहीं सकता. यह मिटने वाला देश नहीं, यह जीवित रखने वाला देश है. गणतंत्र दिवस संकल्प लेने का दिन है. हम आज जो कुछ शिक्षा के माध्यम से हासिल करने जा रहे हैं, उसे विश्व कल्याण के लिए समर्पित करने का संकल्प करें. कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, शिक्षार्थी, अध्यापक, संघ के स्वयंसेवक, कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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