देहरादून के ‘हरिक्षेत्र’ में धर्मध्वजा स्थापित Reviewed by Momizat on . देहरादून (विसंकें). समय बहुत बलवान है. इसके थपेड़े न केवल मानव बल्कि नगर, तीर्थ और सभ्यताओं को भी उलट-पलट देते हैं. उत्तराखंड के देहरादून जिले में ऐसा ही एक प्रा देहरादून (विसंकें). समय बहुत बलवान है. इसके थपेड़े न केवल मानव बल्कि नगर, तीर्थ और सभ्यताओं को भी उलट-पलट देते हैं. उत्तराखंड के देहरादून जिले में ऐसा ही एक प्रा Rating: 0
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देहरादून के ‘हरिक्षेत्र’ में धर्मध्वजा स्थापित

देहरादून (विसंकें). समय बहुत बलवान है. इसके थपेड़े न केवल मानव बल्कि नगर, तीर्थ और सभ्यताओं को भी उलट-पलट देते हैं. उत्तराखंड के देहरादून जिले में ऐसा ही एक प्राचीन तीर्थ है हरिपुर, जो कालक्रम में जनमानस से ओझल हो गया. उसे फिर से प्रतिष्ठित करने का प्रयास वहां के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता ‘लोक पंचायत’ के बैनर तले कर रहे हैं.

जैसे गंगा पहाड़ छोड़कर हरिद्वार में मैदान में प्रवेश करती है, ऐसे ही यमुना हरिपुर में मैदान में आती है. प्राचीन ग्रंथों में ‘हरितीर्थ’ के नाम से इसका उल्लेख है. करीब 2,000 वर्ष पूर्व राजा शीलवर्मन का समय क्षेत्र का स्वर्णकाल था. उन्होंने यहां के बाढ़वाला जगत गांव में अश्वमेध यज्ञ किया था. यज्ञ के अवशेष अब भी मिलते हैं. यहां के कालसी गांव में सम्राट अशोक का शिलालेख है. कालसी से हरिवटपुर (प्रचलित नाम हरबटपुर) का पूरा क्षेत्र पावन हरितीर्थ था.

हरिपुर से ऊपर देहरादून जिले की जनजातीय चकराता तहसील है. वहां के लोग पर्वों पर स्नान के लिए आते हैं. पर, यहां कोई सुविधा नहीं है. यमुना पर बने बांध और बिजलीघर से नदी का प्रवाह भी कम रह गया है. यहां शमशान तो है, पर लोगों की इच्छा है कि यहां एक विशाल हरिघाट तथा हरिमंदिर भी बने. लोक पंचायत के कार्यकर्ता इसी में जुटे हैं.

यहां 14 जनवरी (मकर संक्रांति) को विशाल धर्मसभा हुई, जिसमें एक ‘धर्म ध्वजा’ स्थापित की गई. इससे पूर्व महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली. उसके बाद यज्ञ एवं भंडारा भी हुआ. प्रसिद्ध कथाव्यास पं. शिवप्रसाद नौटियाल जी ने कहा कि यह क्षेत्र यमुना का मायका है. अतः इसका महत्व मथुरा और वृंदावन से कम नहीं है. जनता और शासन के सामूहिक प्रयास से इस तीर्थ का पुनरुद्धार होना चाहिए.

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