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देहरादून में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

देहरादून (विसंकें). विश्व संवाद केन्द्र और उत्तरांचल उत्थान परिषद देहरादून द्वारा डीएवी (पीजी) कॉलेज के दीनदयाल सभागार में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया.

मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल से सांसद भगत सिंह कोश्यारी जी ने कहा कि आपातकाल देश के लोकतंत्र पर काला धब्बा था. इसको याद करना और नई पीढ़ी को यह बताना हम सबकी जिम्मेदारी है. भविष्य में देश ऐसे किसी संकट में न फंसे, इसके लिए यह बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि आपातकाल ऐसी घटना है, जिसको याद रखना इसलिए जरूरी है कि हमारी नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक घटना के विषय में जानकारी रहे और भविष्य में ऐसी कोई बुरी घटना ना घटे. ‘जैसे हिटलर को भूलना, हिटलर जैसे हजारों हिटलरों को पैदा करने का संकट मोल लेना हो सकता है, वैसे ही किसी भी ऐतिहासिक घटना को भूलना संकट मोल लेना है और नई पीढ़ी को उस जानकारी से दूर रखना है. आपातकाल ने देश के लोकतंत्र को घायल किया, लेकिन जिस तरह से संघ के लोगों ने इसका अहिंसात्मक विरोध किया, उसने आपातकाल से ज्यादा देश के इतिहास को प्रभावित किया और देश के सामने एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया जो देश की आने वाली पीढ़ियों को बहुत समय तक प्रभावित करेगा. उन्होंने कहा कि कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं कि वे देश के इतिहास को प्रभावित करती हैं. उन्होंने आपातकाल से संबंधित अपने कई मार्मिक संस्मरण सुनाए.

विश्व संवाद केंद्र के निदेशक विजय कुमार जी ने कहा कि 42 साल पहले 25 जून 1975 को भारत के लोकतंत्र के इतिहास में एक घटना घटी, जिसे लोकतंत्र के लिए काला दिन कहा गया. इस दिन केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार ने देश के संविधान का अपहरण करते हुए देश पर आपातकाल घोषित किया और देश की जनता पर उसकी आड़ में तरह तरह के जुल्म ढाये. उन्होंने आपातकाल के दौरान घटी घटनाओं का वर्णन किया और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन के बारे में भी बताया.

विशिष्ट अतिथि उत्तरांचल उत्थान परिषद के अध्यक्ष प्रेम बड़ाकोटी जी ने कहा कि आपातकाल की प्रताड़ना झेलने वाली पीढ़ी के अधिकांश लोग दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका स्मरण नई पीढ़ी के लिए बहुत आवश्यक है. आज के युवाओं को तत्कालीन घटनाओं की जानकारी होना लोकतंत्र की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वालों के संघर्ष को तानाशाही के खिलाफ चुनौती के तौर पर रेखांकित किया.

विशिष्ट अतिथि डॉ. विजयपाल सिंह (आपातकाल के समय जेल में रहे) ने कहा कि उस समय की स्थितियाँ बेहद गम्भीर थीं. आपातकाल के दौरान देहरादून में संघ के कार्यकर्ता रहे हरीश कम्बोज ने भी आपातकाल के संस्मरण सुनाते हुए भूमिगत कार्य योजना के बारे में जानकारी दी. पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गाँववासी ने अपना जेल संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आपातकाल के समय में जब वह जेल गए तो जेल के भीतर बहुत सारे सकारात्मक कार्य भी सत्याग्रहियों द्वारा किए गए.

कार्यक्रम के अध्यक्ष डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेन्द्र भसीन जी ने आयोजन के लिए विश्व संवाद केन्द्र एवं उतरांचल उत्थान परिषद की प्रशंसा की. विश्व संवाद केन्द्र के अध्यक्ष सुरेन्द्र मित्तल जी ने उपस्थित अतिथियों का आभार प्रकट किया. कार्यक्रम में अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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