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धर्म संसद में श्रीराम जन्मभूमि पर पारित प्रस्ताव

धर्मसंसद

दिनांक 01 फरवरी, 2019

सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज

प्रस्ताव – श्रीराम जन्मभूमि

श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष 1528 से ही हिन्दू समाज सन्तों के नेतृत्व में निरन्तर करता रहा है. इसी का परिणाम है कि आज वहां गुलामी का प्रतीक बाबरी ढांचा नहीं रहा. आज वहां श्रीरामलला का मन्दिर है, जिसमें निरन्तर पूजा-अर्चना हो रही है. अब भव्य मन्दिर का निर्माण करना शेष है. इसके लिए सन्तों की उच्चाधिकार समिति ने 05 अक्तूबर, 2018 को देशभर में जागरण सभाएं व अन्य कार्यक्रम करने का निर्णय लिया था. 400 से अधिक संसदीय क्षेत्रों में विशाल धर्मसभाओं का आयोजन हुआ. इन सभाओं में करोड़ों रामभक्तों की सहभागिता से यह स्पष्ट हो गया कि श्रीराम जन्मभूमि पर राम मन्दिर के निर्माण का जो संकल्प 1528 में लिया गया था, आज उस संकल्प में और भी दृढ़ता आई है. इस अभियान में नवयुवकों की सहभागिता बहुत ही उत्साहवर्धक रही. अब यह निश्चित हो गया है कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर के निर्माण तक रामभक्त हिन्दू न चैन से बैठेगा और न किसी को बैठने देगा.

श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने अयोध्या में केन्द्र सरकार से अपनी अधिगृहीत जमीन वापस देने की मांग की है. केन्द्र सरकार ने समाज के संकल्प के साथ अपना संकल्प जोड़ा और माननीय सर्वोच्च न्यायालय से इस जमीन को वापस देने के लिए अनुमति प्राप्त करने की याचिका दायर की. धर्मसंसद केन्द्र सरकार के इस प्रयास का स्वागत करती है और विश्वास व्यक्त करती है कि इस गैर विवादित जमीन के साथ ही कथित रूप से विवादित जमीन को भी अतिशीघ्र हिन्दुओं को सौंपने के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

स्वतंत्र भारत में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के इस महायज्ञ का स्वरूप पूर्णरूप से अहिंसक व संवैधानिक मार्ग पर ही चला है. 1950 से हम निरन्तर न्यायपालिका के दरवाजे पर खड़े हैं. परन्तु न्यायपालिका से आधा-अधूरा न्याय 60 वर्ष के बाद 2010 में ही मिल पाया. 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला लम्बित है, लेकिन अभी तक मूल मुद्दे पर सुनवाई भी नहीं हो पाई है. हर बार केवल तारीख ही मिली है, लेकिन जब मुख्य न्यायाधीश ने यह कहा ‘‘यह मामला हमारी प्राथमिकता में नहीं है’’ तो सर्वोच्च न्यायालय के प्रति हिन्दू समाज की आस्थाएं हिल गईं. जो सर्वोच्च न्यायालय आतंकियों व अन्य कुछ मामलों की सुनवाई के लिए रातभर जागता है, उसके लिए करोड़ों रामभक्तों की आस्थाओं से जुड़ा मामला, जिसके लिए लाखों रामभक्तों ने बलिदान दिए, 490 वर्षों से निरन्तर संघर्ष किया जा रहा है, उसकी सुनवाई के लिए केवल तीन मिनट का समय ? हमारे सामाजिक सरोकारों एवं परम्पराओं में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के कारण समाज में पहले से ही असंतोष है. अपने प्रति सम्मान बहाल करने का दायित्व अब सर्वोच्च न्यायालय का ही है. निरर्थक कारणों से सुनवाई टलते रहने के कारण अब सर्वोच्च न्यायालय को ही सिद्ध करना है कि वह इस मामले में भी गम्भीर है. उसे प्रतिदिन सुनवाई कर दो तीन महीने में ही निर्णय देना चाहिए.

सन्त समाज का यह स्पष्ट अभिमत है कि राम मन्दिर सम्पूर्ण राष्ट्र का भी मन्दिर है. न्यायालय के आदेश पर हुई खुदाई के कारण यह पूर्णतः स्पष्ट हो गया है कि वहां पर केवल राम मन्दिर ही था, जिसे विदेशी आक्रान्ता बाबर ने तुड़वाया था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बैंच ने अपने निर्णय में इसे स्वीकार किया है. फिर भी वोट बैंक तथा अन्य निहित स्वार्थों के कारण देश की कथित सैक्युलर बिरादरी ने राम मन्दिर के निर्माण में जिस प्रकार की बाधाएं डाली हैं, सुनवाई को कृत्रिम आधारों पर टलवाने का प्रयास किया है, वह घोर निन्दनीय है. देश विरोधी विदेशी शक्तियों के हस्तक बनकर जेहादी व वामपंथी शक्तियाँ कांग्रेस के नेतृत्व में जिस प्रकार के षड्यंत्र रच रही है, आज वे देश के सामने उजागर हो चुके हैं.

धर्मसंसद का यह अधिवेशन स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देता है कि उपर्युक्त सभी तत्व श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने से विरत हों. हम मन्दिर निर्माण की बाधाओं को हटाने के लिए किसी भी सीमा तक जाकर कष्ट सहने के लिए तैयार हैं, वे बाधाएं चाहे राजनैतिक दल द्वारा या कार्यपालिका अथवा न्यायपालिका के द्वारा ही क्यों न खड़ी की गई हो. जो भी शक्तियां श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण में बाधा उत्पन्न कर रही हैं, वे हमारी दृष्टि में राष्ट्र विरोधी हैं और इन राष्ट्र विरोधी शक्तियों की इस दुरभि संधि से लड़ने के लिए हम हर स्तर पर तैयार हैं. ये शक्तियां हमारी भावनाओं को समझें और उनका आदर करते हुए मन्दिर निर्माण के मार्ग की बाधाओं को दूर करने में सहयोग करें, अन्यथा हिन्दू समाज दुरभि-संधि करने वालों का यथायोग्य उत्तर देने के लिए तैयार रहेगा.

हिन्दू समाज के जागरण के कारण आज राम के अस्तित्व को नकारने वाली, हिन्दू आतंकवाद का भ्रमजाल निर्माण कर हिन्दुओं का दमन करने वाली कांग्रेस मारीच बनकर भ्रम निर्माण करने का प्रयास कर रही है. इन्होंने बार-बार इस पवित्र आन्दोलन को बांटने का व भ्रम फैलाने का प्रयास किया है. ये प्रयास न पहले सफल हुए हैं और न आगे होंगे. उनके ही नेता वकीलों के रूप में सुनवाई टालने के लिए सब प्रकार के अनैतिक षड्यंत्र रचते हैं. कभी उनके नेता हिन्दू धर्म को विभाजनकारी घोषित करते हैं, तो कभी कुम्भ जैसे पवित्र आयोजन के विरुद्ध अश्लील टिप्पणी करते हैं. ये हमेशा राम मन्दिर निर्माण के लिए नहीं अपितु उसके निर्माण को रोकने के लिए ही षड्यंत्र रचते रहे हैं.

वर्तमान केन्द्र सरकार से सन्त समाज की अपेक्षाएं हैं. भूमि वापसी की हमारी प्रार्थना पर तुरन्त कार्यवाही करके इन्होंने अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है. इनके ही कार्यकर्ता राम मन्दिर आन्दोलन के विभिन्न चरणों में हमारे साथ मिलकर संघर्ष करते रहे हैं. राम मन्दिर के निर्माण में विलम्ब अवश्य हुआ है, परन्तु हमें विश्वास है कि वे राम मन्दिर सहित हिन्दू गौरव व राष्ट्रीय हित से जुड़े अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में सार्थक कदम अवश्य उठाएंगे.

अब चुनाव का बिगुल बजने वाला है. चुनाव लोकतंत्र का राष्ट्र पर्व है. सैक्युलर बिरादरी से जुड़ी समस्त राजनीतिक शक्तियाँ अपनी पूरी ताकत के साथ इकट्ठा होकर समाज व राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र रच रही है. अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के कारण वे पवित्र व आध्यात्मिक विषयों को भी विवादित बना देते हैं. सन्त समाज श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के इस पवित्र व महत्व के आन्दोलन को राजनीतिक दलदल में घसीटने का अवसर इस कथित सैक्युलर बिरादरी को नहीं देगा. श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन का प्रारम्भ से विरोधी करने वाली शक्तियां, जिन्होंने पूर्व में मन्दिर निर्माण के लिए कोई प्रयास नहीं किया, ऐसे तत्वों को आगे कर मन्दिर निर्माण में विलम्ब को चुनावी मुद्दा बनाकर मन्दिर निर्माण के सदैव विरोधी रहे राजनैतिक दलों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है. यह धर्मसंसद ऐसे सभी प्रयत्नों की घोर निन्दा करती है तथा समस्त हिन्दू समाज से आग्रह करती है कि इस षड्यंत्र को समझें और ऐसा कोई कदम न उठाए जो मन्दिर विरोधी शक्तियों को लाभ पहुँचे. इसलिए हम आन्दोलन के किसी नये चरण की घोषणा अभी नहीं कर रहे हैं, परन्तु हिन्दू समाज जागरण के कार्यक्रम निरन्तर करता रहेगा.

धर्मसंसद आज जागरण के कुछ कार्यक्रमों की घोषणा कर रही है. हम अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए माँ गंगा के पावन चरणों में बैठकर मन्दिर निर्माण की बाधाओं को दूर करने के लिए भगवती माता गंगा से प्रार्थना करेंगे. कल माघ कृष्ण त्रयोदशी तदनुसार 02 फरवरी, 2019 को गंगा किनारे लोअर संगम पर हजारों रामभक्त माँ गंगा के चरणों में एकत्रित होंगे. तीर्थराज प्रयाग में उपस्थित हजारों रामभक्तों का हम आह्वान करते हैं कि वे प्रातः 10.00 बजे से 11.00 बजे तक उपरोक्त स्थान पर पहुँचें और भगवान राम के भव्य मन्दिर निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी आहूति दें.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तदनुसार 06 अप्रैल, 2019 को आनन्द संवत्सर प्रारम्भ हो रहा है. सूर्योदय से ही पुष्प नक्षत्र प्रारम्भ होगा. यह सर्वार्थ सिद्धि योग की अमृत बेला है. इस दिन जो भी प्रार्थना की जाएगी, वह अवश्य पूरी होती है तथा सब बाधाएं दूर हो जाती हैं. सन्त समाज पूरे देश के रामभक्तों का आह्वान करता है कि उस दिन 13 करोड़ विजय मंत्र श्रीराम जय राम जय जय राम का जाप करे. इस मंत्र का जाप करने के लिए सामूहिक रूप से मन्दिरों में एकत्रित होंगे तो हमारी सामूहिक शक्ति से यह मंत्र अधिक फलदायी होगा. हमें विश्वास है कि जागरण के इन दोनों चरणों का प्रभाव शीघ्र सामने आएगा और भव्य राम मन्दिर के निर्माण में आने वाली बाधाएं दूर होंगी.

 

प्रस्तावक: पूज्य म.म. स्वामी अखिलेश्वरानन्द जी महाराज

अनुमोदक: पूज्य स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज

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