नव दधीचि अनंत गोखले पंचतत्व में विलीन Reviewed by Momizat on . लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का 25 मई को प्रातः साढ़े छह बजे (ज्येष्ठ कृष्ण 12, रविवार) यहां संघ कार्यालय ‘भारती लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का 25 मई को प्रातः साढ़े छह बजे (ज्येष्ठ कृष्ण 12, रविवार) यहां संघ कार्यालय ‘भारती Rating: 0
You Are Here: Home » नव दधीचि अनंत गोखले पंचतत्व में विलीन

नव दधीचि अनंत गोखले पंचतत्व में विलीन

लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी का 25 मई को प्रातः साढ़े छह बजे (ज्येष्ठ कृष्ण 12, रविवार) यहां संघ कार्यालय ‘भारती भवन’ में निधन हो गया. वे 97 वर्ष के थे. उनका जन्म 23 सितम्बर 1918 को खंडवा (म.प्र.) में श्री रामचंद्र गोखले के घर में हुआ. उस दिन अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल 14) थी, इसी से उनका नाम अनंत रामचंद्र गोखले रखा गया. खंडवा में ‘गोखले बाड़ा’ के नाम से उनके पूर्वजों का विख्यात स्थान है. संघ के व्दितीय सरसंघचालक परम पूज्य स्व. गोलवलकर जी के पिता स्व. सदाशिव गोलवलकर इन्हीं के यहां गोखले बाड़ा में ही रहते थे.

गोखले जी जिन दिनों नागपुर में इंटर के छात्र थे, तब धंतोली सायं शाखा पर उन्होंने जाना प्रारम्भ किया. वहां साइंस कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज और मोरिस कॉलेज के छात्रावासों से बड़ी संख्या में छात्र आते थे. एक सितम्बर, 1938 को धंतोली शाखा पर ही गोखले जी ने संघ कार्य के लिये अपना जीवन पूर्ण रूप से समर्पित करने की प्रतिज्ञा ली.

श्रीगुरुजी के इस आह्वान पर वे 1942 में प्रचारक निकले. गोखले जी को 1942 में सर्वप्रथम उ.प्र. में कानपुर भेजा गया. विभाजन से पूर्व काशी और भरतपुर में संघ शिक्षा वर्ग लगे थे. भरतपुर के वर्ग में गोखले जी मुख्य शिक्षक थे. 1948-49 के प्रतिबंध काल में प्रत्यक्ष शाखा लगाना संभव नहीं था. प्रतिबंध काल की विपरीत परिस्थिति का भी उन्होंने बुद्धिमत्तापूर्वक संघ कार्य के विस्तार में उपयोग किया.

गोखले जी 1942 से 1951 तक कानपुर, फिर 1954 तक लखनऊ, 1955 से 58 तक कटक (उड़ीसा), 1959-73 तक दिल्ली में रहे. 1974-75 के प्रतिबंध काल में उनका केन्द्र नागपुर रहा. उस समय उन पर मध्यभारत, महाकौशल और विदर्भ का काम था. प्रतिबंध समाप्ति के बाद कुछ समय इंदौर केन्द्र बनाकर मध्य भारत प्रांत का काम संभाला. 1978 में वे फिर उ.प्र. में आ गये और जयगोपाल जी (प्रांत प्रचारक) के साथ पूर्वी उ.प्र. में सहप्रांत प्रचारक के नाते कार्य किया.

1998 में, प्रवास संबंधी कठिनाइयां होने पर उन्हें लोकहित प्रकाशन, लखनऊ का कामकाज संभाला. 2002 तक उन्होंने यह काम संभाला. इस दौरान 125 नयी पुस्तकें तैयार करायीं. उनके लिये सामग्री जुटाना, लेखक ढूंढकर उससे लिखवाना, फिर उसे सुसज्जित कर छपवाना, यह सब कार्य बहुत तन्मयता से उन्होंने किया.2002 में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सब दायित्वों से मुक्ति लेकर वे लखनऊ स्थित ‘भारती भवन’ में रहने लगे.

जब तक उनके शरीर ने साथ दिया, वे ‘भारती भवन’ की फुलवाड़ी की सिंचाई और गुड़ाई स्वयं करते थे. प्रातः शाखा में भी पूरे समय वे उपस्थित रहते थे. आग्रहपूर्वक वे अपने कमरे की सफाई से लेकर कपड़े आदि भी स्वयं धोते थे. जीवन के संध्याकाल में उन्हें इस बात पर गर्व था कि उन्होंने लगातार 60 साल तक सक्रिय प्रवासी जीवन बिताया. उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति संघ को दान दे दी थी, जिस पर उनकी इच्छानुसार संगठन का कार्यालय बना और एक इंटर कॉलेज भी खोला गया.

सायंकाल 5 बजे हुए उनके अंतिम संस्कार में कानपुर और अवध प्रांत के सैकड़ों स्वयंसेवक सम्मिलित हुये. उन्हें मुखाग्नि अवध प्रांत कार्यालय प्रमुख डा. संग्राम जी ने दी. अपने जीवन की हर श्वास राष्ट्र के लिये लेने वाले देशभक्त श्री गोखले को अग्नि को समर्पित करके समय  शोकाकुल वातावरण में सैकड़ों स्वयंसेवकों के अलावा अ.भा. सम्पर्क प्रमुख श्री हस्तीमल जी, अ.भा. कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री मधु भाईकुलकर्णी, अ.भा. सह व्यवस्था प्रमुख श्री बाल कृष्ण त्रिपाठी, भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमुख श्री रामाशीष जी, क्षेत्र प्रचारक श्री शिव नारायण जी, अवध प्रांत प्रचारक श्री संजय जी, तथा प्रांत कार्यवाह डा. अनिल ने सजल नेत्रों से अंतिम विदा ली.

दिल्ली स्थित संघ कार्यालय केशव कुंज में श्री गोखले को शोक सभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई. शोक सभा में सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी जी और श्री दत्तात्रेय जी, भाजपा नेता श्री अमित शाह और श्री गोपी नाथ मुंडे सहित सैंकड़ों स्वयंसेवक उपस्थित थे.

श्री सोनी ने कहा कि श्री गोखले ने  दायित्व या बिना दायित्व के दौरान श्रेष्ठ स्वयंसेवक, प्रचारक और कार्यकता का कमलवत जीवन जीने का श्रीमद्भगवद्गीता में उल्लिखित श्रेष्ठतम आदर्श प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि संघ के एकात्मता स्रोत में आने वाले अनेक महापुरुषों के बारे में सही एवं प्रामाणिक जानकारी संकलित कर लघु पुस्तिकाओं के रूप में प्रकाशित करने का उत्कृष्ट कार्य कभी भुलाया नहीं जा सकता. भावुक होकर उन्होंने कहा कि काश! उन्हें शतायु प्राप्त होती.

डा. जी एवं श्री गुरुजी के सान्निध्य से पावन हुए, सैकड़ों प्रचारकों और हजारों स्थानीय कार्यकर्ताओं के निर्माता, श्री अनंत रामचंद्र गोखले जी की स्मृति को पावन प्रणाम…

विशेष: शोक सन्देश भेजने के लिए पता:

श्री विनायक गोखले (भाई)

46/डी, फ्लैट नं. 9, शेवाले चैम्बर,

पुष्कर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी,

औंद रोड, खड़की, पुणे-411020

सम्पर्क: 020-24817312, मो.: 09922132823

 

 

About The Author

Number of Entries : 3679

Leave a Comment

Scroll to top