पत्रकारिता को अहंकार छोड़कर विनम्र होने की आवश्यकता – राम माधव जी Reviewed by Momizat on . पुणे (विसंकें). राम माधव जी ने कहा कि पत्रकारिता किसी जमाने में मिशन था. लेकिन अब इसने व्यावसायिकता का भी चरम पार कर लिया है. आज पत्रकारिता में अहंकार आ चुका है पुणे (विसंकें). राम माधव जी ने कहा कि पत्रकारिता किसी जमाने में मिशन था. लेकिन अब इसने व्यावसायिकता का भी चरम पार कर लिया है. आज पत्रकारिता में अहंकार आ चुका है Rating: 0
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पत्रकारिता को अहंकार छोड़कर विनम्र होने की आवश्यकता – राम माधव जी

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पुणे (विसंकें). राम माधव जी ने कहा कि पत्रकारिता किसी जमाने में मिशन था. लेकिन अब इसने व्यावसायिकता का भी चरम पार कर लिया है. आज पत्रकारिता में अहंकार आ चुका है और पत्रकारों को अधिक विनम्र होने की जरूरत है. पत्रकारिता तभी सफल हो सकती है, जब इसमें संवेदनशीलता हो. राम माधव जी विश्व संवाद केंद्र, पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत की ओर से दिए जाने वाले देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह में संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर दिलीप धारूरकर को वरिष्ठ पत्रकार पुरस्कार, मुस्तफा अतार को युवा पत्रकार पुरस्कार, गणेश कोरे को छायाकार पुरस्कार और इस वर्ष का प्रथम सोशल मीडिया पुरस्कार शेफाली वैद्य को प्रदान किया गया.

राम माधव जी ने कहा, “पत्रकार को चाहिए, कि हर एक पुरस्कार को एक जिम्मेदारी समझे. वैज्ञानिक बीस वर्षों में एक बार न्यूक्लिअर बम बनाते हैं, लेकिन पत्रकार हर दिन एक बम बनाते हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता एक मिशन था. उस दौरान हर एक बड़े नेता ने आंदोलन के साधन के रूप में पत्रकारिता का प्रयोग किया. लेकिन पत्रकारिता आज एक उद्योग बन चुका है. इसे उस समय के मिशन के रूप में फिर से लाना होगा.” आज की पत्रकारिता व्यावसायिकता से भी अधिक आंदोलक पत्रकारिता बनी है. “पत्रकारिता में अहंकार आया है. इसलिए आज लोगों को विनम्रता चाहिए. मुख्य धारा के मीडिया से अधिक सोशल मीडिया की जिम्मेदारी है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जीवन का अधिकार सर्वोच्च है. आज सच्चे अर्थों में मीडिया का लोकतंत्रीकरण हुआ है और यह देश के लिए अच्छा ही है.” मीडिया नम्र होकर देश के विकास में योगदान दे तो ठीक है, अन्यथा विकास के विरोध में जाने पर जनता उसे नहीं स्वीकारेगी.

उन्होंने कहा, कि “देश में एक भी व्यक्ति नहीं मरना चाहिए. महिला की इस समाज में क्या स्थिति है? क्या कोई महिला सफल राजनेता बन सकती है? साथ ही दलितों की स्थिति भी दयनीय है. इन सवालों के उत्तर हमें खोजने होंगे.”

देवर्षी नारद वरिष्ठ पत्रकार पुरस्कार दिलीप धारूरकर को प्रदान किया गया. उन्होंने कहा कि “यह मेरी जीवननिष्ठा को मिला हुआ पुरस्कार है. मैं इस क्षेत्र में आया उस समय वैचारिक आंतकवाद था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विचार रखना बिलकुल असंभव था. वह आंतकवाद आज भी है और वह बड़े पैमाने पर महसूस होता है. मीडिया को अब राष्ट्रीय जागरण की ओर आना होगा.”

युवा पत्रकार पुरस्कार मुस्तफा अतार को प्रदान किया गया. उन्होंने कहा कि “यह पुणे के लोगों से हुआ सत्कार है, इस कारण पुरस्कार से मुझे बहुत खुशी हुई है. तेरह वर्षों के कार्यकाल में पुणे के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करने का मैंने लगातार प्रयास किया. इस बात का मुझे गर्व है. लोगों के चेहरों पर दिखने वाली संतुष्टी ही मेरे काम की प्रेरणा है. मैं आगे भी यही काम करता रहूंगा.”

प्रथम सोशल मीडिया पत्रकारिता पुरस्कार प्राप्त करनेवाली शेफाली वैद्य ने कहा कि “इंटरनेट पर लिखना मैंने सन् 2013 से शुरू किया. तब कल्पना भी नहीं थी, कि मेरा लेखन इतना लोकप्रिय होगा. आज लगभग 8 लाख लोगों तक मेरा लेखन जाता है. इस लेखन ने मुझे कई मान-सम्मान दिलाए. मेरे परिवार और पाठकों को यह पुरस्कार समर्पित है. मुख्य धारा के मीडिया द्वारा असत्य बेचने का प्रयास इस समय जारी है. इसके जवाब में एक सच्चे नागरिक की आवाज के रूप में मैंने लिखना शुरू किया.”

कुलकर्णी ने कहा, “आज का युग नए मीडिया का युग है. इसलिए इस वर्ष से हमने सोशल मीडिया पुरस्कार देना शुरू किया है. विश्व संवाद केन्द्र का मुख्य काम मीडिया से संवाद करना है. प्रबोधन, प्रकाशन और प्रशिक्षण यह  विश्व संवाद केंद्र के कार्य के त्रिसूत्र है.”

कश्मीर के लोग हमारे है

कश्मीर का संदर्भ देकर राम माधव जी ने कहा कि हमें कश्मीर की केवल भूमि ही नहीं, बल्कि वहां के लोगों को भी अपना मानना होगा. कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है और इसमें चर्चा की कोई गुंजाईश नहीं है. वहां के लोगों को अपने हक मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह संविधान के दायरे में रहकर ही करना होगा. वहां कुछ लोग पाकिस्तानपरस्त है, लेकिन उनकी संख्या गिनीचुनी है. वहां की राष्ट्रवादी ताकतों को हमें शक्ति देनी होगी और इसके लिए कश्मीर के लोगों के दिल जीतने होंगे.

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