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पत्र लेखन व नागरिक पत्रकारिता की विधा के प्रति आमजनों को प्रेरित करने की आवश्यकता – नरेन्द्र ठाकुर जी

राज्य स्तरीय पत्र लेखक एवं नागरिक पत्रकारिता सम्मान समारोह

ग्वालियर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि पत्र लेखन विधा अब विलुप्त होती जा रही है, इसका स्थान अब सोशल मीडिया ने ले लिया है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोग नकारात्मक विचार जल्दी पकड़ते हैं और सकारात्मक एवं राष्ट्रवादी विचार का उतना प्रचार प्रसार नहीं हो पाता है, जितना होना चाहिए. इसलिए हमें ऐसी विचारधारा को आगे बढ़ाना है जो राष्ट्र का विकास करे और समाज के सभी वर्गों को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोडे. इसके लिए आवश्यक है कि नागरिक पत्रकारिता के प्रति लोग जागरुक हों, इसकी विभिन्न विधाओं के लिए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए.

नरेन्द्र जी रविवार को राष्ट्रोत्थान भवन स्थित विवेकानंद सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय पत्र लेखक एवं नागरिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. मामा माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास ग्वालियर के तत्वाधान में स्व. मामा माणिकचन्द वाजपेयी की स्मृति में राज्य स्तरीय पत्र लेखक एवं नागरिक पत्रकारिता सम्मान समारोह तथा समसामयिक विषयों पर नागरिक पत्रकारिता की भूमिका पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराडकर जी उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती जी ने की. नरेन्द्र जी ने कहा कि मामाजी जैसे विराट व्यक्तित्व को स्मरण करना तथा उनके सिखाए मार्ग पर चलना जीवन का सौभाग्य ही होता है तथा हर व्यक्ति को ऐसा अवसर प्राप्त नहीं होता है. मामाजी की स्मृति में पिछले १२ वर्षों से इस प्रकार की स्पर्धा आयोजित की जा रही है जो प्रशंसनीय है.

उन्होंने कहा कि नागरिक पत्रकारिता में पत्र लेखन तो है ही, समाचार लेखन एवं सोशल मीडिया का समाज विकास में किस प्रकार उपयोग होना चाहिए, इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है. आज हर व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से पत्रकार है तथा सभी के अपने विचार हैं. लेकिन अच्छे व सकारात्मक विचारों को अधिक से अधिक प्रसारित करने की दिशा में हमें कार्य करना चाहिए. मीडिया व समाचार पत्र में क्या प्रकाशित हो रहा है, इसको लेकर पाठकों एवं दर्शकों की प्रतिक्रिया भी आनी आवश्यक है. क्योंकि पाठक अपनी प्रतिक्रिया के माध्यम से समाचार पत्र के विचार को परिवर्तित करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए पत्र लेखन की विधा को बढ़ाना आवश्यक है तथा जिला स्तर पर इसका प्रशिक्षण होना चाहिए.

व्यक्तिगत जीवन में श्रेष्ठता आवश्यक – श्रीधर पराडकर जी

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराडकर जी ने कबीर दास जी के दोहे से अपनी बात प्रारंभ की. उन्होंने कहा कि व्यक्ति को ऐसे कार्य करके संसार से जाना चाहिए कि लोग यह कहें – यह व्यक्ति बहुत अच्छा था, इसे अभी और रहना चाहिए था. व्यक्ति को व्यक्तिगत जीवन में श्रेष्ठ होना चाहिए तथा अपनी ईश्वरदत्त प्रतिभा का समाज में प्रसार करना चाहिए. पत्रकारिता में मामाजी का चरित्र बिरले ही देखने को मिलेगा, यदि मामाजी ५००-७०० साल पहले होते तो आज हम उनकी जीवनी श्रीकृष्ण की तरह पढ़ रहे होते. ऐसा व्यक्तित्व जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है, ऐसा जीवन मामाजी ने जिया है. मामाजी आज पत्रकारों के आदर्श हैं.

न्यास द्वारा तात्कालिक पत्र लेखन में अमित सिंह कटियार को प्रथम, ज्योति दोहरे को द्वितीय, तात्कालिक समाचार लेखन में विनोद दुबे को प्रथम, गौरव वाजपेयी को द्वितीय, पत्र लेखन में उदयभान रजक को प्रथम, वीरेन्द्र सिंह विद्रोही को द्वितीय, रमेश कटारिया को तृतीय, सर्वश्रेष्ठ स्तम्भ लेखन का पुरस्कार जावेद खान, सर्वश्रेष्ठ छायाकार का पुरस्कार मनीष शर्मा को प्रदान किया गया.

ऑनलाइन पत्र लेखकों का हुआ सम्मान

मामा माणिकचन्द वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास ग्वालियर द्वारा प्रथम बार ऑनलाइन सोशल मीडिया के माध्यम से पत्र लिखने वाले लेखकों की भी प्रतियेागिता आयोजित कराई गई. जिसमें फेसबुक पर ५० प्रविष्टियां, ट्विटर पर २६ प्रविष्टियां, यू ट्यूब पर ४ प्रविष्टियां एवं ब्लॉग पर १ प्रविष्टी एवं ईमेल पर ३ फोटो प्राप्त हुए. जिसमें ट्विटर के लिए अतुल गर्ग, यू टयूब के लिए देवाशीष सोनी को सम्मानित किया गया.

इस अवसर पर जागरण पत्रिका हिन्दू गर्जना द्वारा गुरु गोबिन्द सिंह जी के ३५०वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक का विमोचन किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम की प्रस्तावना कार्यक्रम संयोजक सुधीर शर्मा जी ने रखी. कार्यक्रम का संचालन राजेश वाधवानी जी ने किया, अतिथियों का आभार प्रदर्शन न्यास के सचिव अतुल तारे जी ने किया.

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