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पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइज़र ने भारत की पहचान को स्वर देने का काम किया – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

नई दिल्ली (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य जी तथा सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी जी ने साप्ताहिक पत्र पाञ्चजन्य एवं ऑर्गनाइजर के विशेषांकों का विमोचन किया. पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर (भारत प्रकाशन) के 70 वर्ष पूर्ण होने पर नेहरु मेमोरियल सभागार, तीनमूर्ति भवन में दोनों राष्ट्रवादी साप्ताहिकों की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डालने के निमित्त विमोचन समारोह आयोजित किया गया.

डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि ऑर्गनाइजर और पाञ्चजन्य ने भारत की पहचान को स्वर देने का काम किया है. इन दोनों ही पत्रों ने भारत के स्वर को ही ध्वनित किया है, साथ देने वाले भले ही बदलते रहे हों. पाञ्चजन्य-ऑर्गनाइजर की यह दीर्घ संकल्पित यात्रा आसान नहीं थी. संसाधनों का अभाव था, लेकिन कार्यकर्ताओं की ध्येयनिष्ठा और विचार के सत्य की ताकत के कारण यह सफलता प्राप्त हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघ के मुखपत्र नहीं हैं. जिस विचार को लेकर संघ चला, वही विचार इनके लेखों में दिखाई देते हैं, इसलिए यह भ्रम पैदा होता है. किन्तु अध्यात्म के आधार पर देश को जोड़े रखने का संघ का विचार वास्तव में भारत का विचार है, जिसको ऑर्गनाइजर और पाञ्चजन्य ने भी अंगीकार किया. इनकी प्रकाशन संस्था का नाम भी भारत प्रकाशन इसीलिये है. यह राष्ट्रीय विचारों की पत्रिका है, संघ के विचारों की प्रतिध्वनि यहाँ के लेखों में अवश्य मिलती है. संघ का विचार संघ के सरसंघचालक, सरकार्यवाह, सह सरकार्यवाह तथा प्रचार टोली के अधिकारियों के वक्तव्यों में प्रकट होता है.

उन्होंने कहा कि आज दो तरह के भारत का चित्र समाज में दिखता है, एक का केंद्र पश्चिम में है जो अभारतीय अवधारण है. दूसरे की जड़ भारत से ही जुड़ी है, इनके बीच का संघर्ष आज दिखाई देता है. एक का केंद्र जेएनयू है, एक का बीएचयू है. सब मार्ग सामान हैं, यह बात केवल भारत मानता है. अब तक का भारत, ‘भारत’ को ही नकार रहा था, अब भारत की बात करने वाले शक्तिशाली हो गए हैं. इसलिए विश्व में भारत का मान बढ़ रहा है. भारत की अध्यात्म आधारित संस्कृति भारत जो जोड़े रखने में सक्षम है. पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर की सफलता का मूल मंत्र भी यही है कि उसने भारत की अध्यात्म की परंपरा को नहीं छोड़ा.

स्मृति ईरानी जी ने कहा कि 70 साल पहले किसने सोचा होगा कि नेहरु मेमोरियल में पाञ्चजन्य, ऑर्गनाइजर का कार्यक्रम होगा. कलम की असली ताकत तमाम प्रहारों और प्रलोभन के बावजूद इन दोनों साप्ताहिकों में आज भी अक्षुण है. उन्होंने कार्यक्रम की प्रसंशा करते हुए कहा कि पुराने सहयोगियों भुलाया नहीं और यहाँ इस अवसर पर सम्मानित किया, यह भारतीय विचार की ही महत्ता है. कुछ लोग यह मानते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का वो ही प्रतिनिधित्व करते हैं. पाञ्चजन्य, ऑर्गनाइजर के सन्दर्भ में यह लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित रहते हैं, जबकि हम अपने विरोधियों को भी अपने पृष्ठों में सम्मानपूर्वक स्थान देते हैं. उन्होंने प्रसंशा करते हुए कहा कि विज्ञापन के माहौल में भी एक विशेष वर्ग से विज्ञापन की लालसा छोड़कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र शक्ति के रूप में बने रहना पाञ्चजन्य, ऑर्गनाइजर की बहुत बड़ी उपलब्धि है. हिंदी और अंग्रेजी के आलावा प्रांतीय भाषाओं में भी इनके संस्करण निकालने होंगे क्योंकि अँधेरा बहुत है और दिये बहुत कम.

पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी ने कहा कि इन 70 सालों का चित्र इतना बड़ा है कि कोई भी कैनवास और कूची उसे चित्रित करने में छोटी पड़ जाएगी. राष्ट्रीय विचार को स्वर देने में पाञ्चजन्य की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है, भारतीय पत्रकारिता के सभी रंग इसमें समाहित हैं.

प्रफुल्ल केतकर जी ने कहा कि भारत एक राष्ट्र था, एक राष्ट्र है, यह विचार बार-बार ऑर्गनाइजर में प्रतिपादित होते रहा. यह सिर्फ 70 साल का समारोह नहीं है, अपितु इतने वर्षों में जनता से इन पत्रों को मिले प्यार का भी उत्सव है. आजादी के समय पाकिस्तान में हिन्दुओं के कत्लेआम को दुनिया के सामने ऑर्गनाइजर ने रखा, 2015 में केरल में वामपंथी हिंसा को सामने लाये. “वॉईस ऑफ नेशन” ऑर्गनाइजर का मूल मन्त्र और “भारत की बात” पाञ्चजन्य का मूल मन्त्र का अर्थ दो अलग-अलग भाषा के पाठकों के लिए सामान ही है.

इससे पूर्व दिल्ली प्रान्त संघचालक एवं भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक आलोक कुमार जी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्पादकीय दायित्व की पवित्र परंपरा को बनाए रखने के लिए हमें वचन देना होगा कि उसकी श्रेष्ठता बनाए रखेंगे. इस अवसर पर स्मृति ईरानी जी और डॉ. मनमोहन वैद्य जी पूर्व संपादक महेंद्र कुलश्रेष्ठ जी, पूर्व  प्रबंधक रूपलाल मेहरोत्रा जी को सम्मानित किया.

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