पेट भरने वाली शिक्षा के बजाय युवाओं में कर्तव्यबोध जगाने वाली शिक्षा की जरूरत है – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . रायपुर (छत्तीसगढ़). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि विद्या के बगैर मानव की मुक्ति नहीं हो सकती. वर्तमान में पेट भरने वाली शिक्ष रायपुर (छत्तीसगढ़). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि विद्या के बगैर मानव की मुक्ति नहीं हो सकती. वर्तमान में पेट भरने वाली शिक्ष Rating: 0
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पेट भरने वाली शिक्षा के बजाय युवाओं में कर्तव्यबोध जगाने वाली शिक्षा की जरूरत है – डॉ. मोहन भागवत जी

DSC_0217रायपुर (छत्तीसगढ़). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि विद्या के बगैर मानव की मुक्ति नहीं हो सकती. वर्तमान में पेट भरने वाली शिक्षा के बजाय युवाओं में कर्तव्यबोध और जिम्मेदारी के साथ काम करने का बोध जगाने वाली शिक्षा की जरूरत है. देश-निर्माण के लिए जिस संस्कारित पीढ़ी की जरूरत है, सरस्वती शिशु मंदिर जैसे शैक्षणिक संस्थान उसके प्रमुख केन्द्र साबित हुए हैं.

पूजनीय सरसंघचालक जी राजधानी के बूढ़ापारा में स्थित छत्रपति शिवाजी आउटडोर स्टेडियम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे. वे यहां सरस्वती शिक्षा संस्थान के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने आए थे. सरस्वती शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में शिशु मंदिरों सहित 12 हजार से अधिक विद्यालय छत्तीसगढ़ में संचालित किये जा रहे हैं. प्रदेश भर से आए हजारों स्कूली भय्या-बहनों, आचार्यों तथा पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि शहरों के अलावा ग्रामीण और वनवासी इलाकों में भी विद्या भारती के स्कूल संचालित हो रहे हैं, जो बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. लेकिन हमारा काम यहीं नहीं रूकना चाहिए क्योंकि जो समाज में परिणामदायी कार्य करते हैं, उनसे समाज की अपेक्षा बढ़ जाती है. इसलिए विद्या भारती को ज्यादा बड़े लक्ष्य के साथ समाज निर्माण में योगदान देना होगा. उन्होंने कहा कि विद्या के बगैर मानव की मुक्ति नहीं हो सकती तथा देश के उत्तरोत्तर DSC_0219विकास के लिए जिस संस्कारयुक्त पीढ़ी की जरूरत है, उसकी पूर्ति वर्तमान शिक्षा प्रणाली से नहीं हो पा रही है. इसलिए विद्या भारती या सरस्वती शिशु मंदिरों के प्रति समाज की अपेक्षा बढ़ती जा रही है. उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि जब भी बोर्ड परीक्षा के परिणाम आते हैं, शिशु मंदिरों के छात्र प्रावीण्य सूची में जगह पाते हैं. उन्होंने कहा कि मातृभाषा  में शिक्षा होने पर छात्रों का मस्तिष्क का पूर्ण विकास होता है, उससे आगे की पढ़ाई में विषयों को समझने की अधिक क्षमता आ जाती है.

इसके पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष छगन मुंदड़ा ने आयोजनकर्ताओं को बधाई और शुभकामना देते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिरों ने लाखों विद्यार्थियों को तराशा है जो राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका अदा कर रहे हैं. आज की महंगी शिक्षा और पब्लिक स्कूलों के बढ़ते क्रेज के बीच सरस्वती शिशु मंदिर सर्वश्रेष्ठ विकल्प के तौर पर मौजूद है.

कार्यक्रम के मीडिया इंचार्ज अनिल द्विवेदी ने बताया कि कार्यक्रम की शुरूआत में मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया गया. तत्पश्चात भय्या-बहनों ने व्यायाम, सामूहिक गीत, घोष दल और सामूहिक नृत्य का प्रदर्शन किया. इस अवसर पर विद्याभारती के वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य तौर पर विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोविंद शर्मा, मार्गदर्शक रोशनलाल सक्सेना, राष्ट्रीय मंत्री श्रीराम अरावलकर, जयंती समारोह के संयोजक जुड़ावन सिंह ठाकुर, संगठन मंत्री लोमस राम साहू, प्रांत प्रचारक दीपक जी, चंद्रकिशोर श्रीवास्तव, डॉ. प्रफुल्ल शर्मा, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. सुरेन्द्र सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.

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