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प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त कर भारतीय भाषाओं को शामिल किया जाए – अतुल कोठारी जी

लखनऊ (विसंकें). शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रम, पुस्तक रचना और शिक्षार्थियों के व्यक्तित्व विकास व चरित्र निर्माण के मुद्दे पर मंथन को लेकर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की तीन दिवसीय बैठक रविवार को लखनऊ में संम्पन्न हुई. राजधानी के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के दौरान दो प्रस्ताव पारित किये गये. पहले प्रस्ताव के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गठित सचिवों की समिति जिसमें छठी कक्षा से ऊपर अंग्रेजी की अनिवार्यता की बात कही गई है, का विरोध किया गया. वहीं दूसरे प्रस्ताव के तहत यूजीसी द्वारा प्रस्तावित 38 हजार अंग्रेजी जर्नलों के अलावा भारतीय भाषाओं के जर्नलों को शोध के लिए शामिल करने की मांग की गई.

बैठक को सम्बोधित करते हुए न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ बत्रा जी ने कहा कि यूनेस्को द्वारा तैयार रिपोर्ट को न्यास की गतिविधियों व कार्यप्रणालियों में भी विचार किया जाएगा. भारतीय विचार के आधार पर शिक्षा नीति को बनाने की भी मांग की.

न्यास राष्ट्रीय सचिव अतुल भाई कोठारी ने कहा कि विधिक क्षेत्र में न्यायालयों के फैसले भारतीय भाषाओं में होने चाहिए. वहीं चिकित्सा शिक्षा व तकनीकी शिक्षा भी भारतीय भाषा में दी जानी चाहिए. चरित्र निर्माण व व्यक्तिव विकास के लिए अध्यापकों व छात्रों दोनों को साथ लेकर काम करना होगा, क्योंकि इनके बिना शिक्षा क्षेत्र की उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कर भारतीय भाषाओं को अपनाने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों के प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम भी उनमें राष्ट्र के प्रति अनुराग का भाव उत्पन्न करने वाला होना चाहिए.

भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. वृषभ जैन ने बताया कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, वैदिक गणित, प्रबंधन शिक्षा, पर्यावरण शिक्षा, शिक्षक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, भारतीय भाषा अभियान, चरित्र निर्माण एवं व्यक्तिव विकास, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा उत्थान पत्रिका व शिक्षा में स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा की गई. साल 2007 में स्थापित न्यास 19 राज्यों के विभिन्न विद्वानों को साथ लेकर शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि बैठक में न्यास द्वारा दिए जाने वाले मदन मोहन मालवीय शिक्षाविद् पुरस्कार के लिए गठित समिति ने शिक्षाविदो की सूची तैयार की है.

वैदिक गणित के मुद्दे पर देश के तीन विश्वविद्यालयों कालीदास संस्कृत विश्वविद्यालय नागपुर, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय भोपाल, पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय जालंधर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये.

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