भगवान राम एक पंथ के नहीं, अपितु समस्त राष्ट्र के आदर्श पुरुष – चम्पत राय जी Reviewed by Momizat on . तरनतारन (पंजाब). विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय जी ने कहा कि यूं तो भारत के महान पुरुषों एवं मनीषियों ने समय-समय पर मर्यादा व आदर्श के तरनतारन (पंजाब). विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय जी ने कहा कि यूं तो भारत के महान पुरुषों एवं मनीषियों ने समय-समय पर मर्यादा व आदर्श के Rating: 0
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भगवान राम एक पंथ के नहीं, अपितु समस्त राष्ट्र के आदर्श पुरुष – चम्पत राय जी

तरनतारन (पंजाब). विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चम्पत राय जी ने कहा कि यूं तो भारत के महान पुरुषों एवं मनीषियों ने समय-समय पर मर्यादा व आदर्श के अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किये हैं, लेकिन मानवीय संबंधों की आदर्श स्थिति का अध्ययन करना हो तो भगवान श्री रामचन्द्र का आदर्श प्रकाश स्तंभ की तरह है. जो हजारों-लाखों वर्ष से भारतवर्ष का प्रत्यक्ष व अन्य का परोक्ष रूप से मार्गदर्शन करते चले आ रहे हैं. श्रीराम दशरथ के पुत्र या अयोध्या के राजा भर नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस के प्रेरणास्रोत, आदर्श एवं राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक हैं. वे तरनतारन के स्थानीय मंदिर वाला स्कूल में आयोजित “श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण से राष्ट्र निर्माण संकल्प सभा” में संबोधित कर रहे थे.

श्री राम जन्मभूमि के संबंध में उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद मंदिर अथवा मस्जिद का सामान्य विवाद नहीं है, यह भगवान की जन्मभूमि को वापस प्राप्त करने का संघर्ष है. यह हिन्दुस्थान के स्वाभिमान का संघर्ष है. श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष करते हुए हमारे पुरखों ने कई बार अपना रक्त बहाया, अपने आराध्य रामलला के लिए सर्वस्व बलिदान किया. 1992 में वह विवादित ढांचा ढह जाने के तुरंत बाद से ही उसके श्रीराम जन्मभूमि होने के प्रमाण मिलने आरंभ हो गए थे. गिरते ढांचे की चौड़ी-चौड़ी दीवारों के बीच से भगवान का एक बड़ा सिंहासन, घंटे-घड़ियाल आदि निकल-निकलकर गिरे थे. जिन्हें वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी अभिरक्षा में लिया गया था. इस घटना ने सिद्ध किया कि बाबर के सेनापति मीरबांकी द्वारा श्रीराम जन्मभूमि का विशाल मंदिर ढहाकर बनाए गए उस ढांचे की दीवारों के बीच मंदिर की वह सारी सामग्री दफन कर दी गई होगी, जो गिरते ढांचे के बीच में प्राप्त हुई थी. न्यायालय द्वारा उस स्थान पर खुदाई के आदेश दिए गए, जिसमें  भी उस भूमि के अंदर रामायणकालीन संरचनाएं होने की पुष्टि हुई. भारतीय पुरातात्विक विभाग की खुदाई तथा एक जापानी “सर्वेयर” कंपनी द्वारा किए गए “कार्बनिक परीक्षणों” में भी बाबरी ढांचे के नीचे किसी हिन्दू मंदिर के होने संबंधी प्रत्यक्ष प्रमाण मिले थे. जिन्हें प्रमुख आधार बनाकर ही माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में उसे श्रीराम जन्मभूमि बताया. हमारे सभी पौराणिक ग्रंथ भी भारत में एक ही अयोध्या होने और वहां राम के जन्मस्थान होने पर एकमत हैं. रामलला जहां विराजे हैं, वहां विराजे रहेंगे. वह जगह श्रीराम जन्मभूमि है, वह हमारा पावन देवस्थल है और उस पर हिन्दुओं का ही अधिकार है. श्री राम की जन्मभूमि पर उनका भव्य मंदिर बनेगा, इसी शुभकामना के साथ मैं भारतवासियों को बधाई देता हूं.

कार्यक्रम में उनके साथ महामंडलेश्वर १००८ स्वामी कमल पुरी जी, महामंडलेश्वर १००८ माता सुनीता देवी जी, महामंडलेश्वर १००८ स्वामी स्वरूपानंद जी, महामंडलेश्वर १००८ स्वामी रामधनी जी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री करुणा प्रकाश जी सहित अन्य उपस्थित थे.

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