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भारत की जनशक्ति के सदुपयोग से आयेंगे अच्छे दिन

कानपुर. विश्व संवाद केंद्र में नारद जयन्ती के उपलक्ष्य में बोलते हुये श्री नरेन्द्र जी (उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख) ने कहा कि नारद जी अपनी शक्ति सदैव “सर्वोन्नति एवं सर्वजन हिताय” के उच्चतम उद्देश्य की पूर्ति में लगाते थे. उन्होंने देवताओं की सकारात्मक और दानवों की नकारात्मक दोनों शक्तिओं का सदुपयोग कर समुद्र मन्थन जैसे असम्भव कार्य को सम्भव किया, जिससे निकले धनवन्तरि द्वारा आयुर्वेद जैसे रत्न की उत्पत्ति हुई. इस आयुर्वेद का उपयोग आज लोगों को असाध्य एवं भयानक रोगों से मुक्त कर अमरत्व की प्राप्ति में हो रहा है. नारद जी ने महर्षि वाल्मीकि की शक्ति का उपयोग कर रामायण जैसा विश्व का प्रथम महाकाव्य को लिखने की प्रेरणा दी, जो आज भी विश्व के जनमानस का कल्याण कर आदर्श पथप्रदर्शक का कार्य कर रहा है.

उन्होंने कहा कि जब संघ ने नारद जयन्ती मनाने का कार्य प्रारम्भ किया तो लोग इसका उपहास करते थे पर आज इस कार्य की सराहना सारे पत्रकार जगत में की जाती है तथा उनके प्रथम पत्रकार होने की सत्यता को स्वीकृति प्राप्त हुई है. नारद जी की पत्रकारिता (संवाद प्रसारण) हमेशा सकारात्मक तथा पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों के अनुरूप थी. श्री नारद ने युधिष्ठिर को सुशासन की आदर्श नीतियों के ज्ञान अपने भक्ति सूत्र के 84 श्लोकों में विस्तार पूर्वक किया है, जिससे नागरिकों की सभी समस्याओं का राजा द्वारा कैसे समाधान किया जाये और सुशासन की स्थापना की जाये, जिससे राज्य का प्रत्येक नागरिक लाभान्वित एवं सुखी हो का उल्लेख किया है. उनके इन श्लोकों का उपयोग उच्चतम आदर्शपूर्ण पत्रकारिता की स्थापना में भी किया जा सकता है.

आज कुछ पत्रकार क्षणिक लाभ के लिए नकारात्मक पत्रकारिता का सहारा लेते है, जिसके दुष्परिणाम सभी पत्रकारों को झेलना पड़ता है और पत्रकारिता पर अविश्वास पैदा होता है. सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में जनता की अहम भूमिका होती है, इसी भूमिका निर्वहन करते हुये जनता ने देश की भ्रष्टतम सरकार को उखाड़ फेंका और ‘अच्छे दिनों’ की आशा में देश के आदर्श महानायक को सत्ता सौंपी. अब आवश्यकता इस बात की है कि भारत की 125 करोड़ जनता फिर एक बार इस महानायक की अगुवाई में राष्ट्र के नवनिर्माण के लिये कमर कस कर तैयार हो जायेगी तो दुनिया की कोई भी शक्ति ‘अच्छे दिन आने’ से रोक नहीं सकती है और भारत अपने खोये हुये गौरव को प्राप्त कर विश्व-गुरु के पद पर पुनः स्थापित हो जायेगा.

कानपुर के महापौर कै. जगतवीर सिंह दोण ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुये बताया कि वे जब चुनाव में खड़े हुये थे तो कुछ समाचार माध्यमों ने उनसे सिर्फ इस बात के लिए पैसे माँगे थे कि वे उनके खिलाफ कुछ नहीं छापेंगे.

इसके पूर्व विषय प्रतिपादन करते हुये श्रीराम कथा वाचक डा. मनोज दास ने देवर्षि नारद कृतित्व एवं व्यक्ति पर गहन प्रकाश डाला.

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के श्री देवी प्रसाद जी ने सकारात्मक पत्रकारिता का नवीनतम उदारहण देते हुये सत्ता परिवर्तन में उनके योगदान की सराहना की.

कार्यक्रम में कानपुर प्रेस क्लब के मंत्री सुनील साहू, कार्यकारिणी सदस्य बृजेश दीक्षित, श्याम जी शुक्ल, संजय सक्सेना, मनोज कलवार आदि पत्रकारों का भी सम्मान हुआ. कार्यक्रम में प्रमुख रुप से डा. ईश्वर चन्द्र गुप्त, अर्जुन दास खत्री, वासुदेव वासवानी, अरविन्द कुमार, मोहन अग्रवाल, मीरा मिश्रा, तुष्मुल मिश्रा आदि उपस्थित थे.

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्जवलन एवं वैदिक मत्रोच्चार के साथ हुआ तथा समापन “वन्देमातरम्” के सुमधुर गान के साथ हुआ.

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