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भाव, ज्ञान और कर्म से ही मानव की पहचान बनती है – प्रो. एसपी सिंह जी

गोरखपुर (विसंकें). लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एसपी सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता एक क्रांतिकारी विचार है. किसी भी देश की एकता के लिए यह आवश्यक शर्त है. बरगद की तरह विचार कभी खत्म नहीं होते, समय आने पर वे प्रासंगिक हो जाते हैं. प्रो. एसपी सिंह जी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्विद्यालय के संवाद भवन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस जी की 100वें तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के 125वें जन्म जयंती वर्ष के शुभ अवसर पर ‘संवाद भवन’ दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, में ‘एकात्म मानव चिंतन एवं सामाजिक समरसता’ विषय पर संगोष्ठी तथा ‘पूर्वा संवाद’ विशेषांक व ध्येयमार्ग के लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. प्रो एसपी सिंह जी ने कहा कि सबका शरीर हाड़-मांस से ही बना है. भाव, ज्ञान और कर्म से उसकी पहचान बनती है. इन्हीं गुणों की प्रमुखता के नाते हममें से ही कुछ लोग महान बन जाते हैं. आप भी इन गुणों के जरिए अपनी अलग पहचान बना सकते हैं. संघ के तमाम स्वयंसेवक ऐसा कर भी रहे हैं.

संगोष्ठी के अध्यक्ष गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार जी ने कहा कि समरसता समग्र तरक्की की अनिवार्य शर्त है. इसके लिए शिक्षा और प्रेरणा को हथियार बनाएं. ऐसी शिक्षा दें, जिससे लोग अच्छा इंसान बन सकें. ऐसे लोगों को समरस समाज और उसके लाभ के बारे में बताएं. इसके बाद इन लोगों को समाज को समरस बनाने के लिए प्रेरित करें. आपस में संवाद बढ़ाएं. प्रौद्योगिकी की प्रगति के साथ इसका कम होना दुखद और खतरनाक है. विश्व संवाद केंद्र की पहल सराहनीय है. यह सिलसिला जारी रहना चाहिए. विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे आयोजनों में हर संभव सहयोग करेगा.

गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा शास्त्र के प्राध्यापक एवं विशिष्ट अतिथि हर्ष कुमार सिन्हा जी ने कहा कि महापुरुष, उनका कालखंड और नाम से उनकी विचारधारा अलग हो सकती है. पर, सबका मूल कमोवेश समान ही है. मसलन करुणा, मानवता, भाईचारा, ममता और समता आदि. मेरी समझ से पंडित दीनदयाल के सामाजिक समरसता, गांधी के स्वराज और डॉ. आंबेडकर के समानता एवं स्वतंत्रता के अधिकार के मूल में भी यही भाव हैं. गांधीजी ने वंचित तबके की पीड़ा को महसूस किया था. इसी तबके का होने के नाते डॉ. आंबेडकर ने इसे भोगा था. पंडित दीनदयाल में हालातकी वजह से ये विचार आए थे. उन्होंने कहा कि हर कोई अपने काम को ईमानदारी एवं पारदर्शी तरीके से करे तो समरस समाज की स्थापना संभव है, दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं रहा. इस मौके पर अतिथियों द्वारा ‘पूर्वा संवाद’ और ‘ध्येयमार्ग’ नामक दो पत्रिकाओं का विमोचन भी किया.

कार्यक्रम में शिवनारायण जी  क्षेत्र प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश, प्रान्त संघचालक विद्याभूषण पांडेय जी, भाग संघचालक डॉ. महेन्द्र जी, प्रांत प्रचारक मुकेश विनायक खांडेकर जी, सह प्रांत प्रचारक कौशल किशोर जी, सहित अन्य उपस्थित थे.

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