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भीलवाड़ा में विहिप की केन्द्रीय प्रबंध समिति की बैठक संपन्न

भीलवाड़ा विहिप केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक

भीलवाड़ा विहिप केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक

भीलवाड़ा (विसंकें). विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति की बैठक भीलवाड़ा के अग्रवाल भवन में संपन्न हुई. बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा के साथ ही गत गतिविधियों की जानकारी सदस्यों के समक्ष रखी गई. साथ ही आगामी कार्य योजना पर भी विचार विमर्श किया गया. बैठक का आयोजन 27, 28 जून 2015 को किया गया था.

विहिप के महामंत्री चंपतराय जी ने बैठक में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. उन्होंने जनवरी से जून 2015 तक के कार्य का प्रतिवेदन रखा….

पुणे महानगर में सम्मेलन का प्रचार-प्रसार करने के लिए एक छह दिवसीय शिवदुर्गा गंगा यात्रा निकाली गई. शिवाजी महाराज के 7 किलों से जलकुम्भ भरकर लाए गए. शिवाजी महाराज की प्रतिमा एक सिंहासन पर आरूढ थी. यह गंगा यात्रा 22 महाविद्यालय और 35 क्षेत्रों में गई. मंगलूर (कर्नाटक) के हिन्दू सम्मेलन में लगभग एक लाख हिन्दू समाज एकत्र आया. जबलपुर के सम्मेलन में समाज की सहभागिता बढ़ाने के लिए मां नर्मदा की महाआरती का आयोजन किया गया. 108 जातियों की भागीदारी, 108 ब्राह्मणों की व्यवस्था, आरती हेतू पूर्व प्रशिक्षण, नर्मदा के घाट का माली समाज द्वारा निःशुल्क सजावट, सभी जातियों के प्रतिनिधियों को एक एक नर्मदा जलकलश दिया गया. ऐसा वातावरण बना कि घर-घर नर्मदा आई है, हिन्दू जागरण लाई है. हिन्दू सम्मेलन में 108 जातियों के प्रमुख मंच पर विराजमान थे. जिलाशः हिन्दू सम्मेलन -586 जिलाशः हिन्दू सम्मेलनों में 65,049 गांवों से लोग आए, 4,72,041 महिला, 18,15,627 पुरुष तथा 7,884 संत सहित कुल 22,95,552 लोग उपस्थित रहे.

भीलवाड़ा विहिप केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक

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धर्मप्रसार आयाम – स्वर्ण जयंती वर्ष में 48,651 हिन्दुओं को धर्मान्तरित होने से बचाया गया तथा 33,975 व्यक्ति अपने पूर्वजों की परंपरा में वापस लाए गए. गुजरात में 284 अल्पसंख्यक समाज की कन्याओं का विवाह सम्पन्न कराया. कुल 7776 व्यक्तिों को संस्कृति की दीक्षा प्रदान की गई है. उत्तराखण्ड में 49 बहिनों को स्वधर्म से अपने मूलधर्म में वापिसी की. उत्तर गुजरात में नेत्र चिकित्सा शिविर में 1300 रोगियों के मोतियाबिंद के आपरेशन किए गए. अन्य मेडिकल कैम्पों में 4050 रोगियों का निःशुल्क उपचार किया गया. त्रिपुरा के 345 विद्यालयों में 12425 विद्यार्थी शिक्षा-संस्कार प्राप्त कर रहे हैं. बांसवाड़ा में बालगोकुलम् योजना (बालकों को गोद लेने की योजना) में 127 बालक-आवासीय छात्रावासों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. ब्यावर (राजस्थान) में 150 स्थानों पर राम महोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किये गये. जिसमें लगभग 14600 व्यक्तियों ने भाग लिया. भगवान राधाकृष्ण की मूर्ति की स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा की गयी, कार्यक्रम में 92 गावों से 6,000 व्यक्तियों ने भाग लिया. पृथ्वीराज चैहान की जयंति मनायी गयी, कार्यक्रम में 197 गांवों के 14625 व्यक्तियों ने भाग लिया.

सेवा आयाम – भारत में 15 स्थानों में सेवाकुम्भ हुए जिसमें 138 ट्रस्टों के 2331 ट्रस्टी/कार्यकर्ता सहभागी हुए. सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 166 सेवा संस्थाओं के 4478 बालक/बालिकाओं द्वारा परम्परागत लोकनृत्य, कथक, भरतनाट्यम, नाटिका, संस्कृत नाटक,

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अभिनय गीत, सामूहिक योगासन, गरबा-रास, देशभक्ति गीत के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए. सभी कार्यक्रमों को देखने के लिए डेढ़ हजार लोग सम्मिलित हुए. सेवा कार्य विस्तार, कार्यकर्ता प्रशिक्षण एवं भारत के प्रत्येक जिले में कोई एक सेवा कार्य स्थापित करने का संकल्प लिया गया. पाकिस्तान के सिन्ध प्रांत से पीडि़त होकर भारत आए हिन्दू परिवारों के बच्चों को परिषद के प्रयत्नों से दिल्ली के विविध विद्यालयों में प्रवेश के साथ ही उन्हें पिछड़ी जाति वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं भी मिलने लगेंगी. महाशिवरात्रि पर मथुरा में पैदल पदयात्री कावंरियों की सेवा का चिकित्सा शिविर लगा, 1000 कावंरियों की सेवा की गई.

गोरक्षा आयाम – जयपुर शहर के मुहाना थाने के अन्तर्गत लावारिस हालत में पकड़े गये ट्रक में बेरहमी से ठूंस-ठूंस कर भरी 39 गाय व 2 बछड़े मिले. सभी गाय व बछडे़ भूख-प्यास तथा घुटन से मर चुके थे. प्रशासन एवं कार्यकर्ताओं की सजगता एवं तत्परता से ट्रक नम्बर के आधार पर गौ-तस्कर मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया. गौमांस निर्यात और गौहत्या के विरूद्ध दिल्ली के जंतर-मंतर पर संतों के सान्निध्य व समस्त गौरक्षक संगठनों के संयुक्त प्रयत्नों से प्रदर्शन किया गया. जैन मुनि मैत्री प्रभसागरजी महाराज अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे. देश में अपनी गोशाला -375, सम्पर्कित गोशाला-1424, गोग्रास के रथ-200, पंचगव्य औषधि निर्माण केन्द्र-341, पंचगव्य बिक्री केन्द्र-450, पंचगव्य चिकित्सा केन्द्र-150, गोवंश मुक्त कराया-16550, गोविज्ञान परीक्षा  में 18 प्रान्तों के 630 स्कूलों में 1,33,730 परीक्षार्थी बैठे.

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सामाजिक समरसता – 304 स्थानों पर समरसता गोष्ठियाँ, 310 स्थानों पर अम्बेडकर जयंती, 355 स्थानों पर रविदास जयंती तथा 5500 परिवारों को गोद लिया गया. गंजबासौदा, मध्य प्रदेश के महावीर विहार में संत रविदास की कथा का आयोजन किया गया. गायत्री परिवार के द्वारा गायत्री पूजन करवाया गया. प्रतिवर्ष जम्मू में माता वैष्णों देवी के दर्शन के लिए समरसता यात्रा फरवरी मास में आयोजित की जाती है. सभी से एक व्यसन त्यागने का संकल्प कराया जाता है. धार्मिक समरसता यात्रा के माध्यम से विगत 3 वर्षों में 450 परिवारों को संस्कारित किया जा चुका है. माता वैष्णों देवी दर्शन यात्रा में गए गरीब परिवार में जो बच्चों की स्कूल फीस भरने में असमर्थ पाया जाता है, उस बच्चे के लिए समाज के समर्थ वर्ग से शिक्षा हेतु अभिभावक नियुक्त किया जाता है जो उस बालक की कक्षा 12वीं तक की शिक्षा व्यय व संस्कार का चिंतन करता है. वर्तमान में इस प्रकल्प में 170 बच्चे विभिन्न स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

मातृशक्ति कार्य            – जम्मू में दुर्गावाहिनी एवं मातृशक्ति की बहनों द्वारा श्रीराम महोत्सव के अवसर पर रामलला की झांकियां निकाली गईं. छोटी चैक, नोह, हिमाचल में दुर्गावाहिनी संगोष्ठी में 235 कालेज छात्राएं सहभागिनी हुईं. गोष्ठी का विषय ‘साइबर क्राइम’ था. ग्वालियर सेण्ट्रल जेल में बंदी स्त्रियों को आशा सिंह ने हिन्दू संस्कृति के बारे में जानकारी दी. समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करनेवाली पांच महिलाओं को ग्वालियर में आयोजित महिला सम्मेलन में सम्मानित किया गया. कोल्हापुर महिला सम्मेलन में 500 से अधिक मातृशक्ति उपस्थित रही. स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर सम्पूर्ण भारत में दुर्गावाहिनी की बहिनों द्वारा 1184 स्थानों पर गोष्ठियां आयोजित की गईं, जिसमें 70928 बहिनों की भागीदारी रही और सामाजिक समरसता निर्माण तथा अपने परिवार के संस्कारों की रक्षा के लिए महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की गई. देश में 203 स्थानों पर महिला सम्मेलन हुए जिसमें 49905 उपस्थिति रही. 32 स्थानों पर दुर्गावाहिनी के शौर्य प्रशिक्षण वर्गों में 3805 बहिनों ने भाग लिया.

संस्कृत – उज्जैन में संस्कृत के उत्थान के लिए देशभर के प्रमुख कार्यकर्ताओं का सम्मेलन हुआ. दिल्ली में अखिल भारतीय प्रशिक्षण शिविर में चार विश्वविद्यालयों के कुलपति पधारे. एनसीआरटी गुड़गांव में राष्ट्रीय विद्वत गोष्ठी में 200 विद्वानों की सहभागिता रही.

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ग्राम शिक्षा मंदिर योजना – धनबाद (झारखण्ड) में एकल परिणाम कुंभ सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर आयोजित हिन्दू सम्मेलन में 40,000 वनवासी उपस्थित थे तथा कार्यकर्ता सम्मेलन में भारत और भारत के बाहर के देशों से 2000 बन्धु पधारे थे. इस अवसर पर एकल अभियान कार्यकर्ताओं ने अपने 25 वर्षों की यात्रा पर आत्मचिंतन किया. हजारीबाग में संत सम्मेलन हुआ.

विश्व समन्वय कार्य – हिन्दु हैरिटेज फाउण्डेशन के तत्वावधान में पतित पावनी “मां-गंगा“ के तट पर 15वीं हैरिटेज सेमिनार का आयोजन 27 फरवरी से 01 मार्च 2015 तक किया गया. जिसमें 09 देशों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. जापान, कोरिया, रूस, चीन, नुरो (दक्षिणी अफ्रीका), उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, रोमानिया सहित अनेक देशों से आए छात्र-छात्राओं को डाक्यूमेन्टरी फिल्म के द्वारा मां गंगा के साथ वेदों, उपनिषदों, आयुर्वेद व अन्य संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गयी. सायंकाल प्रतिदिन मां गंगा की आरती में सम्मिलित होते थे. विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों तथा “गायत्री परिवार“ के “देव संस्कृति विश्वविद्यालय“ के अनुपम प्रकल्पों की जानकारी दी गई. कार्यक्रम के माध्यम से विदेशी छात्रों को हिन्दी का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है तथा भारतीय संस्कृति, इतिहास, महापुरुष, त्यौहार व दर्शन के साथ-साथ समृद्ध भारतीय जीवन मूल्यों से भी जोड़ा जाता है.

भीलवाड़ा विहिप केन्द्रीय प्रबंध समिति बैठक

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अयोध्या के चारों ओर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर 20 दिवसीय परिक्रमा का आयोजन हुआ. देश के कई राज्यों से हिन्दुओं ने परिक्रमा में भागीदारी की. अयोध्या से प्रतिदिन संत परिक्रमा में सम्मिलित होते थे. सामान्यतया 250 तक संख्या प्रतिदिन रहती थी. स्थानीय समाज ने उदार हृदय से परिक्रमा में चलने वाले संतों का सत्कार किया. छत्तीसगढ़ में एक मास की कालावधि में 13 कोटि विजयमंत्र ‘‘श्रीराम जय राम जय जय राम’’ का लेखन हुआ, 42000 कापियां छापी गयी थीं. समापन पर होमात्मक यज्ञ हुआ.

केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक हरिद्वार में 25 व 26 मई, 2015 को सम्पन्न हुई. राज्यों से 112 संत पधारे. तीन विषयों पर संतों ने अपने विचार रखे और प्रस्ताव पारित किए गए. वे हैं – 1. गंगा की अविरलता ही गंगा की निर्मलता और गंगा की रक्षा का एकमात्र मार्ग है. 2. श्वेतक्रांति और भारत के गांव व गरीब किसान के विकास का आधार गोवंश की रक्षा में निहित है 3. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पर संतों का संकल्प.

 

 

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