मनुष्य जन्म पूर्व जन्म के शुभ कर्मों का परिणाम – हेमचंद्र जी Reviewed by Momizat on . शिमला (विसंकें). हिमाचल शिक्षा समिति (विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान) के तहत प्रदेश में चल रहे विद्या मंदिरों के शिक्षकों के लिये 30 दिवसीय प्रशिक्षण व शिमला (विसंकें). हिमाचल शिक्षा समिति (विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान) के तहत प्रदेश में चल रहे विद्या मंदिरों के शिक्षकों के लिये 30 दिवसीय प्रशिक्षण व Rating: 0
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मनुष्य जन्म पूर्व जन्म के शुभ कर्मों का परिणाम – हेमचंद्र जी

शिमला (विसंकें). हिमाचल शिक्षा समिति (विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान) के तहत प्रदेश में चल रहे विद्या मंदिरों के शिक्षकों के लिये 30 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का मंगलवार को शुभारंभ हुआ. वर्ग का शुभारंभ विद्या भारती के राष्ट्रीय मंत्री हेमचंद्र जी ने किया. वर्ग का आयोजन वरिष्ठ माध्यमिक सरस्वती विद्यामंदिर विकासनगर परिसर में किया जा रहा है.

वर्ग के उद्घाट्न अवसर पर मुख्य वक्ता हेमचन्द्र जी ने कहा कि मनुष्य जन्म पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों द्वारा मिलता है. मनुष्य को मोक्ष प्राप्ति, सफल व सार्थक जीवन के लिए अच्छे कर्म करने चाहिए. दूसरों को शिक्षित करना, उसे नर से नारायण बनाना, शिक्षा का उद्देश्य है. विद्या भारती का विस्तृत परिचय देते हुए बताया कि राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत लोगों ने देशभक्ति, चरित्र निर्माण व संस्कारप्रद शिक्षा देने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मन्दिरों का कार्य 1952 में गोरखपुर में पहले शिशु मन्दिर की स्थापना के साथ प्रारम्भ किया. सन् 1977 में सरस्वती विद्या मन्दिरों के विधिवत संचालन के लिए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान का गठन किया गया. वर्तमान में विद्या भारती द्वारा पूरे देश भर में 25 हजार शिक्षण संस्थानों में 1 लाख 35 हजार आचार्य-दीदियों द्वारा 32 लाख छात्र-छात्राओं को शिक्षण दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि विद्या भारती सामान्य जन की शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है. अधिकांश विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं. उन्होंने उपस्थित आचार्यों से आह्वान किया कि सेवा और समर्पण द्वारा हर मन को हरने का कार्य करना है और समरसता का भाव जगा कर समाज को एक नई दिशा देनी है. प्रशिक्षण हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग है. इस दिनचर्या में हम अपने आप को व्यवस्थित करने का प्रयास करते हैं. सभी को अपने अनुकूल करने का प्रयास करते हैं. अपने विचारों के अनुकूल सभी को बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए. कार्यक्रम के अध्यक्ष चन्द्रमोहन जी ने कहा कि बच्चों को संस्कारित करना, उन्हें शिक्षित करना, समाज से जुड़े रहना अध्यापक के लिए महत्वपूर्ण है. आचार्यों में समर्पण और तकनीक का होना आवश्यक है. अध्यापक अपनी आत्मा द्वारा संचालित होता है. मन, कर्म और भाव को केन्द्रित कर निरन्तर अभ्यास से गुणवतापूर्ण आचार्य बनना सम्भव होगा. इस अवसर पर हिमाचल शिक्षा समिति के अध्यक्ष देवीरूप शर्मा जी, संगठन मंत्री राजेन्द्र कुमार जी सहित अन्य उपस्थित थे.

 

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