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मनुष्य, जीव और प्रकृति के मध्य संतुलन बनाने की आवश्यकता – डॉ. भगवती प्रकाश जी

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. भगवती प्रकाश जी ने कहा कि आज मनुष्य, जीव और प्रकृति के मध्य सामंजस्य बनाने की आवश्यकता है. हम जाने-अनजाने में पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुचांते हैं, इसकी भरपाई के लिए हमें प्रयास करने होंगे.

वे मंगलवार को विश्व संवाद केन्द्र की ओर से पर्यावरण और भारतीय चिंतन विषय पर आयोजित स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में खेती का आधार जैविक था, इसलिए सर्वाधिक खेती से कभी पर्यावरण को नुकसान नहीं हुआ. लेकिन वर्तमान में रासायनिक खेती से पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचा है. हमें जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए, ताकि पर्यावरण असंतुलन रोका जा सके. उन्होंने कहा कि वातारण में बढ़ रहे कार्बन और अन्य गैसों के उत्सर्जन से तापमान बढ़ रहा है. इसके चलते ग्लेश्यिर पिघल रहे हैं और समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है. नदियों की धाराएं टूटने लगी हैं.

कार्यक्रम की शुरूआत में पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. दीक्षिता ने भारतीय चिंतन और ऋषि मुनियों द्वारा पर्यावरण को बचाने के लिए किए कार्यों पर प्रकाश डाला. तथा वर्तमान समय में प्लास्टिक के उपयोग को रोकने का अनुरोध किया.

शिक्षाविद डॉ. अरविंद अग्रवाल ने गीता के उपदेश के माध्यम से पर्यावरण पर विचार व्यक्ति किए. दरबार अमरापुर स्थान जयपुर के संत नंदलाल जी ने कहा कि हमारे वेद हमें सिखाते हैं कि हमें प्रकृति के हर घटक के बारे में ध्यान रखना चाहिए. हमारे प्रत्येक महापुरुष ने पर्यावरण के लिए कुछ ना कुछ प्रयास किये हैं. जीवन से हमें पर्यावरण को संवारने का कार्य करना चाहिए. अमरापुर धाम भी हमेशा सामाजिक कार्यों में आगे रहता है.

विश्व संवाद केन्द्र की ओर से पर्यावरण पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया. इसी के साथ जयपुर में आयोजित होने वाली दूसरी सोशल मीडिया कॉन्क्लेव के पोस्टर का विमोचन भी किया गया.

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