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मुलायम सरकार ने हिन्दू कारसेवकों को दफनवा दिया था

1990 में अयोध्या में कारसेवा के दौरान उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह सरकार की पुलिस ने अनगिनत कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया था, मृतकों की संख्या काफी कम बताई गई और ऐसा करने के लिये मारे गए कारसेवकों का हिन्दू पद्धति के अनुसार अंतिम संस्कार करने के बजाय उन्हें दफना दिया गया था. रिपब्लिक टीवी चैनल ने स्टिंग के माध्यम से हैरतअंगेज तथ्यों का खुलासा किया है. टीवी चैनल ने क्षेत्र के तत्कालीन थाना प्रभारी का स्टिंग प्रसारित किया है.

स्टिंग के वीडियो में जन्मभूमि थाना प्रभारी (SHO) वीर बहादुर सिंह को यह कहते सुना जा सकता है कि अधिकांश लोगों को दफ़न करने का आदेश दिया गया था. मारे गए कारसेवकों में से कुछ को ही जलाया गया था. उस समय की मुलायम सिंह सरकार ने बहुत कम कारसेवकों के मारे जाने का दावा करने का षड्यंत्र रचा था.

यह भी कहा गया कि उस समय मुलायम सरकार ने साज़िशन केवल 16 कारसेवकों के मारे जाने का दावा किया था, लेकिन यह संख्या सैकड़ों में थी. रिपब्लिक टीवी के अनुसार सरकार ने गलत संख्या बताने के लिए ही कुछ कारसेवकों को जलाने की बजाय दफना दिया था.

30 अक्तूबर और 02 नवम्बर 1990, को राम जन्मभूमि पर खड़े निहत्थे कारसेवकों पर मुलायम की सेक्युलर स्टेट ने गोली चलवाई थी. और वर्ष 2016 में मुलायम सिंह ने स्वयं स्वीकार किया था कि कारसेवकों पर गोली चलवाना, मुस्लिमों की भावनाओं की रक्षा के लिए ज़रूरी था. हालाँकि बाद में यह भी कहा कि “मुझे अफ़सोस है कि मैंने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया.” मुलायम सिंह के अनुसार मुस्लिम अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए कारसेवकों पर गोली चलवाना ज़रूरी था, इसलिए उस समय ऐसा करना पड़ा. मुलायम सिंह उस समय मुस्लिमों का भरोसा जीतना चाहते थे इसलिए ऐसा निर्णय लिया था.

चैनल के खुलासे ने सत्य को उजागर कर दिया है, आश्चर्य है कि सेक्युलरिज्म का झंडा उठाने वाले राजनीतिज्ञों के साथ मीडिया हिन्दुओं की मौत पर उस समय भी चुप रहे और 28 वर्ष बाद तथ्यात्मक सच सामने आने के बाद भी चुप बैठे हैं. खुलासे के बाद इसे ही झुठलाने पर तुले हैं.

 

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Comments (1)

  • Anil Gupta

    मुलायम सिंह को अयोध्या आंदोलन को कुचलने और हिन्दू कारसेवकों को मरवाने के लिए विदेश (अरब देशों से) से भारी रकम मिली थी! मुलायम सिंह की सरकार में एक अधिकारी थे एस ए टी रिज़वी! वो १९८० में इलाहबाद (अब प्रयागराज) के जिलाधिकारी थे और दंगो के दौरान खुलकर हिन्दू विरोधी भूमिका के चलते उन्हें हटाने के लिए कांग्रेस नेता श्री संत बक्श सिंह (जो तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्व नाथ प्रताप सिंह के बड़े भाई थे) कांग्रेसियों का शिष्ट मंडल लेकर आये थे और उन्हें वहां से हटाया गया था! बाद में श्रीमती इंदिरा गाँधी ने उन्हें एनआरआई इन्वेस्टमेंट सेण्टर का प्रभारी बनाकर दुबई भेज दिया था जहाँ उन्होंने भारत में इन्वेस्टमेंट तो नहीं कराया हाँ कुख्यात बैंक ऑफ़ क्रेडिट एन्ड कॉमर्स इंटरनेशनल की शाखा जरूर भारत में खुलवा दी! ये वही बैंक है जिस पर बाद में भारी गोलमाल के आरोप लगे और उसी पैसे से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को बढ़ाया गया! तो ये ज़नाब मुलायम सिंह की सरकार में प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त के पद पर तैनात थे! अयोध्या आंदोलन के दौरान मुलायम सिंह ने इन्हे एक खास मिशन पर अरब देशों में भेजा और वहां से लौटने के बाद इनका पद नाम हो गया प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त एवं ‘विदेशी सहायता’! अब उन्होंने प्रदेश के लिए कौन सी विदेशी सहायता जुटाई ये तो वही जाने या भगवान जाने लेकिन इस बात की पूरी आशंका है की मुलायम सिंह को रामजन्म भूमि आंदोलन को कुचलने और कारसेवकों को मरवाने के लिए भारी विदेशी सहायता अरब देशों से प्राप्त हुई!

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