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राष्ट्र के प्रति समर्पण सिखाने वाली पाठशाला है संघ की शाखा – स्वान्त रंजन

उदयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वान्त रंजन जी ने कहा कि संघ की शाखा केवल खेल खेलने का स्थान नहीं है. संघ के तृतीय सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने कहा था कि संघ की शाखा सज्जनों की सुरक्षा का बिन बोले अभिवचन है, तरुणों को व्यसन मुक्त रखने वाला संस्कार पीठ है, आपत्ति-विपत्ति में त्वरित निरपेक्ष सहायता का आशा केन्द्र है, महिला सुरक्षा और सभ्य आचरण का आश्वासन है, दुष्ट ताकतों पर धाक जमाने की शक्ति है और सामाजिक – राष्ट्रीय कार्यों के लिए कार्यकर्ता प्रदान करने का विद्यापीठ है.

स्वान्त रंजन जी शनिवार को विद्या निकेतन सेक्टर-4 में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि संघ का प्रशिक्षण शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक तीनों स्तर पर होता है और स्वयंसेवक समाज के प्रति समर्पण का भाव मन में धारण करता है. स्वयंसेवक के मन में हर समय देश के प्रति समर्पण का भाव समाज को मजबूत करना है.

शांतिकाल में भी समाज का राष्ट्र के प्रति जाग्रत और सजग रहना जरूरी है. उन्होंने देश में सामाजिक तौर पर ऊंच-नीच के भाव से होने वाली घटनाओं पर कहा कि न तो यह भारतीय संस्कृति रही है, न ही कोई संत इसका समर्थन करते हैं. उन्होंने बाबा साहेब आम्बेडकर के समता-स्वतंत्रता-बंधुता के संदेश का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह उन्होंने भगवान बुद्ध से प्राप्त किया और आज भी प्रासंगिक है. यही भावना समाज में रहनी चाहिए. समाज को जाति, भाषा, प्रांत से ऊपर उठना होगा.

स्वान्त रंजन जी ने कहा कि समाज अब जागरूकता प्रकट भी करने लगा है. चुनावों में जनता ने क्षेत्रीय दलों के बजाय राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को सामने रखकर निर्णय करने में परिपक्वता दर्शायी.

उन्होंने कहा कि अपने संस्कारों, अपने आचार, अपने व्यवहार से भारत पूरे विश्व में अग्रणी हो रहा है. भारत को विश्व गुरु बनाना है, यह बड़ा कार्य है और इस लक्ष्य को हम जरूर पूरा करेंगे. उन्होंने गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश वर्ष, जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड के 100वें वर्ष और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा आजाद हिन्द फौज की स्थापना के 75वें वर्ष को याद करते हुए कहा कि हम सभी इनसे प्रेरणा लें और राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि रखें.

समारोह के मुख्य अतिथि कांकरोली द्वारिकाधीश पीठ के युवराज गोस्वामी डॉ. वागीश कुमार ने राष्ट्रनीति को हरेक नीति से आगे बताते हुए कहा कि व्यक्ति इतना व्यस्त हो गया है कि वह धर्म और राष्ट्र को भूलता जा रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए जा रहे कार्यों को राष्ट्र के प्रति समर्पित बताते हुए कहा कि संघ और संघ की विचारधारा की बदौलत ही योग को दुनिया ने मान्यता दी और विश्व ने योग दिवस मनाना शुरू किया. आज जहां भारत की बात होती है, वहां संघ की बात भी होती है. उन्होंने सभी से संघ को तन-मन-धन से योगदान देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि संघ के समर्पित कार्यकर्ताओं की बदौलत ही भारत विश्व गुरु के पद पर स्थापित होगा.

समारोह में वर्ग कार्यवाह गंगा बिशन जी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. प्रशिक्षण वर्ग में 210 शिक्षाथियों सहित शिक्षक-प्रबंधक आदि मिलाकर 325 स्वयंसेवकों ने 20 दिन तड़के 4 बजे से रात सवा दस बजे तक प्रशिक्षण लिया. सर्वाधिकारी डॉ. एम.एल. नागदा ने नगर निगम, पुलिस-प्रशासन, विद्या निकेतन विद्यालय आदि का विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए आभार प्रकट किया.

स्वयंसेवकों के अलग-अलग दलों ने दुर्ग रक्षा, शस्त्र से बचाव, नि:शस्त्र युद्ध, दण्ड योग, योगासन का प्रदर्शन किया. घोष दल ने भी प्रदर्शन किया.

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