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राष्ट्र के मूल संस्कारों को आहत करने वाली सामग्री के प्रति सचेत रहा जाए – इंदु शेखर

जयपुर (विसंकें). शेखावटी क्षेत्र के प्रथम पुस्तक समागम ‘ज्ञान गंगा पुस्तक मेले’ के दूसरे दिन 07 अप्रैल को सीकर के बद्री विहार में लेखन कार्यशाला का आयोजन हुआ.

मूल रूप से आलेख एवं समाचार लेखन पर आधारित कार्यशाला में वार्ताकार के रूप में राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष इंदु शेखर तत्पुरुष रहे. वार्ता के रूप में प्रारंभ कार्यशाला का संचालन डॉ. गौरव अग्रवाल ने किया. नव लेखकों एवं मीडिया से जुड़े या इच्छुक प्रतिभागियों के मध्य प्रारंभ में लेखन क्या और किस लिए के विषय से सत्र का प्रारंभ हुआ. सत्र में रचनात्मक लेखन के लिए आवश्यक बिंदु एवं तत्व पर चर्चा करते हुए इंदु शेखर जी ने कहा कि राष्ट्र के मूल संस्कारों को आहत करने वाली सामग्री के प्रति सचेत रहा जाए. लेखन में नवीनता और मौलिकता का आग्रह रहता है, परंतु स्रोतों की प्रामाणिकता जाने बिना यूं ही उनका उल्लेख कर देना लेखक की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठाता है. आयातित शब्द किस प्रकार से समाज के सोचने की प्रक्रिया को बदलते हैं और कई बार नुकसान पहुंचाते हैं, इसका उदाहरण राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद का संदर्भ देते हुए बताया कि अंग्रेजी के ism का रूपांतर हिंदी में वाद करने के कारण कई बार भ्रम की स्थिति बनती है. भारत में सदैव राष्ट्र एवं राष्ट्रबोध का चिंतन रहा है. कार्यशाला के अंतिम सत्र में समाचार लेखन का पूर्वाभ्यास किया गया.

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