“राष्ट्र चिंतन को समर्पित हो युवा” – अरुण जी जैन Reviewed by Momizat on . इंदौर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रान्त द्वारा आयोजित “राष्ट्र चेतना शिविर” का शुभारम्भ क्षेत्रीय प्रचारक अरुण जी जैन ने गुरु गोविन्द सिंह पुरम, इंदौर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रान्त द्वारा आयोजित “राष्ट्र चेतना शिविर” का शुभारम्भ क्षेत्रीय प्रचारक अरुण जी जैन ने गुरु गोविन्द सिंह पुरम, Rating: 0
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“राष्ट्र चिंतन को समर्पित हो युवा” – अरुण जी जैन

dsc_0001इंदौर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रान्त द्वारा आयोजित “राष्ट्र चेतना शिविर” का शुभारम्भ क्षेत्रीय प्रचारक अरुण जी जैन ने गुरु गोविन्द सिंह पुरम, सुपर कॉरिडोर, इंदौर में किया. श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व को समर्पित युवा शिविर स्थल का नाम “गुरु गोबिंद सिंह पुरम” रखा गया है.

शिविर स्थल पर प्रदर्शनी का उद्घाटन अखिल भारतीय धर्म जागरण प्रमुख शरद जी ढोले ने किया. प्रान्त भर से आये युवाओं के लिए अलग-अलग दस नगरों में विभाजित शिविर स्थल में की गई है. सभी नगरों को सिख पंथ के धर्म गुरु को समर्पित किया गया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्तीय राष्ट्र चेतना शिविर का उद्घाटन प्रान्त संघचालक डॉ. प्रकाश जी शास्त्री, क्षेत्रीय प्रचारक अरुण जी जैन, शिविर वर्ग अधिकारी सुमेर सिंह जी ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया.

शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता अरुण जी जैन ने संघ की स्थापना की पृष्टभूमि एवं इतिहास के बारे में अवगत कराया. उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक पू. डॉ. हेडगेवार जी के जीवन काल में राष्ट्र स्वतंत्रता के लिए चल रहे सामाजिक, धार्मिक, क्रन्तिकारी व राजनितिक क्षेत्रों के सभी समकालीन संगठनों व आन्दोलनों में सहभागी रहे. अनेक महत्वपूर्ण आन्दोलनों का नेतृत्व भी किया. इन सभी के आधार पर मूल्यांकन के बाद उन्होंने राष्ट्र की परतंत्रता के कारणों का सार प्रकट किया. उन्होंने राष्ट्र की अवनति के तीन प्रमुख कारण बताये –

dsc_0081१). आत्मविस्मृत समाज – हिन्दुत्व का श्रेष्ठ गौरवशाली अतीत, राष्ट्रीय एकात्मता व सामाजिक समरसता के ध्रुव विस्मरण.

२). आत्मकेंद्रित व्यक्ति – समाज हित दुर्लक्षित, स्वार्थपरता, एकाकीभाव.

३). सामूहिक अनुशासन का अभाव – परिणाम विघटित समाज तथा खण्डित राष्ट्र.

डॉ. हेडगेवार जी के जीवन काल के समय उन्हें यह आभास हो गया था कि राष्ट्र की उन्नति हेतु हिन्दू संगठन की आवश्यक्ता है और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की. उन्होंने व्यक्ति निर्माण के साथ – साथ ऐसे युवा तैयार करने का संकल्प लिया जो राष्ट्र चिंतन से ओत-प्रोत हों. आज के परिपेक्ष में भारत में कई चुनौतियाँ ध्यान पड़ती है. आज हमारे युवाओं को चाहिए कि वो भोगवादी जीवन शैली, सफल जीवन से अधिक सार्थक जीवन एवं राष्ट्र हित को महत्व दें. हमें देश में ऐसे युवा तैयार करने हैं जो राष्ट्र को समर्पित हो कर, राष्ट्र की प्रेरणा बने, तब हम भारत को परम वैभव तक पहुंचा पाएंगे. देश के युवा मिल कर एक शक्तिशाली राष्ट्र, एक समृद्ध राष्ट्र, एक प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकते है. इसलिए आज से ही इसी पल से राष्ट्र समर्पित कार्यो में युवा पीढ़ी को कार्य में लग जाना चाहिए. उद्घाटन सत्र में शिविरार्थियो ने संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो सामूहिक गीत गाया.  तीन दिन तक शिविरार्थी नियमित दिनचर्या के साथ शिविर में रहेंगे.

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