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राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व संचालिका उषा ताई चाटी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली. दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान दिल्ली में राष्ट्र सेविका समिति की तृतीय प्रमुख संचालिका उषा ताई चाटी जी की दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. विगत 17 अगस्त  2017 को उषा ताई चाटी का 96 वर्ष की अवस्था में लंबी बीमारी के बाद नागपुर में देहांत हो गया था. शोक सभा में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता अक्का जी, अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका सीता अन्नदानम, दिल्ली प्रांत कार्यवाहिका सुनीता भाटिया, प्रांत प्रचारिका विजया शर्मा सहित गणमान्य जन उपस्थित थे.

पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से उषा ताई के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया. शांता अक्का जी (समिति प्रमुख संचालिका) ने उषा ताई के जीवन से संबंधित कई घटनाओं का वर्णन किया. उषा ताई सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक थीं. वह देखने में साधारण 9 गज की साड़ी पहनने वाली साधारण महिला थी, लेकिन उनके गुणों, ज्ञान व योग्यता ने उन्हें असाधारण बना दिया था. उत्तर प्रदेश में संपर्क के दौरान एक बार कार्यकर्ताओं ने बताया कि उषा ताई के समक्ष समस्या रखने पर वह त्वरित समस्या का समाधान कर देती थीं. उषा ताई का अनेक विषयों पर अध्ययन व उनकी स्वाभाविकता समिति की बहनों को अपने साथ जोड़ती थी. कई बार तो तरुणी, बुद्धिजीवी व समाज के अन्य वर्गों से आई बहनों के साथ वे एक साथ बातचीत करतीं तथा उनकी शंकाओं व प्रश्नों का यथोचित उत्तर देती थीं. उषा का अर्थ है सुबह, प्रकाश की सूचना देने वाली. अपने जीवन के लगभग 80 वर्ष ताई ने समाज के उत्थान और समिति के विकास के लिए लगा दिए. उन्होंने सेविकाओं को विराट उद्देश्य के लिए तैयार किया.

आसाम का उदाहरण देते हुए शांता अक्का जी ने कहा कि समिति की एक बहन के घर जाने पर उनके पिता ने उषा ताई को चावल से बनी शराब देकर उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया. ताई ने कहा कि आप प्रेम से दे रहे हैं तो थोड़ा ही दें, इस तरह अपनी सादगी, विनम्रता से ताई ने उनका हृदय परिवर्तन किया. बाद में सेविका के पिता ने आसाम में संघ शाखा, समिति शाखा को प्रारंभ किया. ताई के लिए समिति कार्य ईश्वरीय कार्य था और इसी कार्य को उन्होंने आजीवन तन-मन से पूर्ण किया. ताई ने अस्वस्थ होने पर स्वेच्छा से प्रमुख संचालिका के दायित्व को प्रमिला ताई को सौंप दिया था.

सन् 1994 से 2006 तक राष्ट्र सेविका समिति की संचालिका रहीं उषा ताई चाटी अपने बाल्यकाल से ही समिति की नियमित सेविका रही. सन् 1927 में गणेश चतुर्थी के दिन विदर्भ के भंडारा में जन्मी उषा ताई की शिक्षा वहीं के मनरो हाई स्कूल में हुई. विवाह के पश्चात उषा ताई नागपुर आ गईं, जहां हिंदू मुलांची शाला में अध्यापन कार्य शुरू किया. उषा ताई ने छात्राओं के विकास हेतु ‘वाग्मिता’ विकास समिति की स्थापना की. वे निरंतर 30 साल तक इसकी अध्यक्षा भी रहीं.

उषा ताई मधुर व सुरीली आवाज की  धनी थीं. नागपुर आकाशवाणी केंद्र से संगीत कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी करती थी. उषा ताई ने आपातकाल के समय सत्याग्रह में भाग लिया और जेल भी गईं. उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति  की नागपुर नगर कार्यवाहिका, विदर्भ कार्यवाहिका सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया. 1994 में उषा ताई को राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका का दायित्व सौंपा गया और इस दायित्व को उन्होंने 2006 तक पूरी श्रद्धा से वहन किया.

उषा ताई को जोशी फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय एकात्मता पुरस्कार, स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय शिक्षण संस्था डोंबिवली ने विवेकानंद पुरस्कार तथा भोपाल का ओजस्विनी अलंकरण भी प्रदान किया गया. उन्होंने इन पुरस्कारों से प्राप्त धनराशि संघ मित्रा सेवा संस्थान को दान कर दी. उनके कार्यकाल में समस्या पीड़ित बालिकाओं के लिए निःशुल्क छात्रावास शुरू हुए. पूरे देश में फैले संगठन का नेतृत्व करना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, जिसमें उषा ताई सफल रही. आज उषा ताई के निधन से राष्ट्र सेविका समिति ने अपना एक पुरोधा खो दिया है. दिल्ली प्रांत सह कार्यवाहिका विदूषी जी ने मंच संचालन किया.

कार्यक्रम में ताई को समर्पित गीत के भाव ताई के जीवन को संक्षेप में समझाने के लिए काफी हैं –

छोड़कर पग चिन्ह अपने

मां किधर तुम खो गई

शस्य श्यामल इस धरा की

गोद में क्यों सो गई

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