लाल ग्रह पर फहरेगा तिरंगा! Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिये बहुत ही खास दिन है. भारत का मंगलयान अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है. थोड़ी देर पहले मंगल यान मंगल गृह की कक्षा नई दिल्ली. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिये बहुत ही खास दिन है. भारत का मंगलयान अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है. थोड़ी देर पहले मंगल यान मंगल गृह की कक्षा Rating: 0
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लाल ग्रह पर फहरेगा तिरंगा!

1नई दिल्ली. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिये बहुत ही खास दिन है. भारत का मंगलयान अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है. थोड़ी देर पहले मंगल यान मंगल गृह की कक्षा में प्रवेश कर गया. मंगल ग्रह की यात्रा पर पिछले साल 5 नवंबर को चला ये मंगलयान अब मंगल की कक्षा में स्थापित होने के लिये तैयार है. लेकिन उससे पहले वैज्ञानिकों के लिये बड़ी चुनौती भी है. दरअसल, मंगलयान का इंजन पिछले 10 महीनों से बंद है. अब कक्षा में स्थापित करने से पहले उसे चालू करना है. आज वैज्ञानिक इसी काम को अंजाम देंगे. अगर ये चुनौती पार हो जाती है तो फिर भारत अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा में इतिहास रच देगा.

अंतरिक्ष में भारत के लिये आज का दिन अहम इसलिये है, क्योंकि मंगल पर भेजे गये मंगलयान के लिए परीक्षा की घड़ी नजदीक आ गई है. 10 महीने की यात्रा कर मंगलयान लाल ग्रह की कक्षा तक पहुंच गया है. अब बारी है इसको मंगल की कक्षा में स्थापित करने की. लेकिन यही भारतीय वैज्ञानिकों के लिये सबसे बड़ी चुनौती है.

मंगल मिशन को लेकर वैज्ञानिकों का जोश देखते बनता है. इसरो सैटलाइट ट्रैकिंग सेंटर के उपनिदेशक पिचमनी और उनके साथी उन पहले लोगों में हैं जो भारतीय मंगलयान “मार्स ऑर्बिटर मिशन” से सिग्नल प्राप्त करेंगे. ये वही टीम है जिसने पिछले साल नवंबर में कुछ घंटों के लिये अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट जाने के बावजूद धैर्य नहीं खोया. मार्स मिशन के आखिरी चरण पर अब एक बार फिर से तनाव भरे पल लौट आये हैं, जब मंगलयान को उसकी आखिरी कक्षा में स्थापित करना है.

वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती है पिछले 10 महीने से स्लीप मोड में रहे इंजन को चालू करने की. इंजन चालू करने के बाद ही ये पता चल सकेगा कि मंगलयान के इंजन ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं. इसके लिये भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह और अंतरिक्ष जैसा वातावरण तैयार कर धरती पर ही परीक्षण किया.

24 सितंबर को मंगलयान के मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित होने के ऐतिहासिक पलों के गवाह स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी बनेंगे. श्री मोदी प्रात:काल अभियान के शुरू होने के वक्त से लेकर मंगलयान के कक्षा में स्थापित हो जाने तक वैज्ञानिकों के साथ ही रहेंगे. जाहिर है प्रधानमंत्री की मौजूदगी वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ायेगी. 450 करोड़ की लागत का ये अभियान अगर सफल हो जाता है तो भारत चौथा देश होगा जो मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने वाला देश बनेगा. इससे पहले यूरोपियन स्पेस एंजेसी, नासा और रूस मंगल ग्रह के लिये अभियान कर चुके हैं. अब आशा यही है कि मंगलयान की यह यात्रा सफलतापूर्वक सम्पन्न हो और भारत लाल ग्रह पर अपना राष्ट्र ध्वज फहरा दे.

इस बीच, मंगल यान अभियान की सफलता के लिये विश्व हिन्दू परिषद ने 21 सितंबर को दिल्ली में मंगल यज्ञ किया. दक्षिणी दिल्ली के ईस्ट आफ़ कैलाश स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित इस मंगल यज्ञ का संचालन वैदिक विदुषी श्रीमती विमलेश आर्या ने किया. इस यज्ञ के माध्यम से ईश्वर से प्रार्थना की गई कि गत तीन सौ दिन से बन्द पड़ा इंजन बिना किसी व्यवधान के पुन: शुरू हो जाये. देश के कुशल वैज्ञानिकों को मंगल यान की सफ़लता हेतु शुभकामनायें व अग्रिम बधाई देते हुये विहिप दिल्ली के प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि इस अभियान की सफ़लता न सिर्फ़ भारत को एक वैज्ञानिक महा-शक्ति के रूप में पुन: प्रतिष्ठित करेगी बल्कि हमारे चहुंमुंखी विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी.

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