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विजयादशमी पर दिये सरसंघचालक जी के उद्बोधन पर शिमला में परिचर्चा

शिमला (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के नागपुर में विजयादशमी के अवसर पर दिये उद्बोधन पर शिमला के लैण्डमार्क होटल में परिचर्चा का आयोजन किया गया. परिचर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पश्चिम क्षेत्र राजस्थान के संघचालक और पैसेफिक विश्वविद्यालय के कुलपति व अर्थशास्त्री डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने कहा कि संघ पिछले 92 वर्षों से समाज निर्माण के कार्य में लगा हुआ है, प्रतिवर्ष सरसंघचालक जी का नागपुर  विजयादशमी का उद्बोधन हम सबके लिए आगामी वर्ष के लिए पाथेय होता है. उनके इस वर्ष के वक्तव्य में देश, समाज व देश के नागरिकों से संबंधित महत्वपूर्ण 80 विषय आए हैं. 21 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ में योग पर 177 देशों ने भारत का सह प्रायोजक बनने का निर्णय लिया. हमारे प्राचीन वाँग्मय में वर्णन किया गया है कि आधी घटी दीर्घ श्वास से आयु बढ़ती है. तनाव से शरीर के टेरोमर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन 12 मिनट में डीप ब्रीदिंग से टेरोमरज कम होते हैं.

परिचर्चा में उपस्थित प्रतिभागियों ने कहा कि डोकलाम में भारत सरकार द्वारा चीन पर कूटनीतिक दबाव के कारण भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छवि मजबूत हुई. सुझाव था कि गौ आधारित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए. विश्व स्तर पर दूध के दो प्रकार ए-1 व ए-2 हैं. जर्सी और होस्टन गाय के दूध का प्रकार ए-1 होता है, वैज्ञानिकों ने इस दूध से 25 प्रकार की बीमारियाँ होने की संभावनाएं बताई हैं, बचपन में ही मधुमेह की बीमारी भी इसका एक ज्वलंत उदाहरण है. न्यूजीलैण्ड की संसद में दूध व गोवंश की गुणवत्ता सुधारने के लिए भारतीय गौ और गोवंश के विषय में प्रस्ताव पारित हुआ है. ब्राजील गोवंश की नस्ल सुधार के लिए भारतीय गोवंश की गिर नस्ल को निर्यात कर रहा है.

विजयादशमी उद्बोधन के विषयों पर परिचर्चा में नौणी विवि तके उपकुलपति एस.सी. शर्मा जी ने कहा कि डॉ. हरगोविन्द खुराना को शोध के लिए भारतीय विवि में वातावरण नहीं मिल पाया, जिससे वह अमेरिका के विस्कोन्सिस, वि.वि. चले गये और वहाँ स्वतन्त्रता पूर्वक शोध के फलस्वरूप नोबल पुरस्कार प्राप्त किया. सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पी.सी. कपूर जी ने जैविक खेती पर नीति बनाने की बात कही. पालमपुर कृषि विवि के उपकुलपति डॉ. अशोक जी ने भी देशी नस्ल की सुधार  के लिए नीति निर्माण पर जोर दिया, साथ ही कहा कि कैमिकल खादों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की बढ़ती हुई बंजरता के खतरे से निपटने के लिए नीति बनाई जाए. पीएचडी के शोध में जैविक कृषि का विषय भी हो. जीएम फसलों पर कहा कि इनको तुरंत ही हटाया जाए. डॉ. अजय श्रीवास्तव जी ने महाराष्ट्र में नवबौद्धों के विषय में जानकारी दी एवं बौद्ध समाजसेवी कुशक बकुला जिन्होंने मंगोलिया में भारतीयता का प्रचार किया.

सेवानिवृत्त प्रसाशनिक अधिकारी जे.एस. राणा जी ने सुरक्षा सशक्तिकरण, लघु व कुटीर उद्योगों व कश्मीरी हिन्दुओं की वापसी के विषय में सुझाव दिए. हि.प्र. विवि से डॉ. गुरूप्रिया कपूर जी ने जनसंख्या का विषय एवं अवैध रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों की म्यांमार वापसी का सुझाव दिया. सेवानिवृत्त एडीजीपी केसी सड्याल जी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति राजनीतिज्ञों के एटिट्यूड में दृढ़ता पर जोर देने की बात कही.

वरिष्ठ पत्रकार राकेश लोहमी जी ने कहा कि डोकलाम में – अस्थाई विराम हुआ, हम अपनी सैन्य शक्ति बढाएं और तय करें कि मिलावटी और विषैला दूध नहीं खरीदेंगे. वरिष्ठ पत्रकार पी.सी. लोहमी जी ने कहा कि अभी तक के तथाकथित भारतीय बुद्धिजीवी डिग्रीधारी शिक्षित थे, किन्तु वे अल्प जानकारी वाले रहे हैं, हमें अपनी संस्कृति से दूर किया गया. सेवानिवृत्त ब्रिगे. जगदीश वर्मा जी ने कहा कि भाषाओं के अन्दर संतुलन बनाया जाए. छात्र शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शिक्षा, योगदा सत्संग से जुडे़ तो उनके जीवन में परिवर्तन आया.

डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा जी ने कहा कि ये सारे सुझाव तो सरकार के स्तर पर ही लागू किये जा सकते हैं. संघ का कार्य तो राजनीति और सरकार से अलग है. साढ़े तीन करोड़ अमरीकी योग करते हैं, पुर्तगाल की संसद ने योग के ऊपर प्रस्ताव पारित करने को यूएन को पत्र लिखा था कि वहाँ के लोगों की जीवन शैली में परिवर्तन आए. उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों का हल समाज कर सकता है और आह्वान किया कि हम सभी समाज जीवन में सक्रिय होकर परिवर्तन ला सकते हैं. अभिभावक तय करें कि संतानों की शिक्षा कैंसी हो. जम्मू-कश्मीर में सन् 1955 से 2014 तक 35ए पर चर्चा ही नहीं हुई, अब हो रही है इसको हटना ही चाहिए. प्राचीन वाँग्मय पर रिसर्च हो तो अपना देश विश्व स्तर पर अधिक मजबूत रूप में उभरेगा. इस परिचर्चा में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक डॉ. वीर सिंह राँगड़ा जी सहित गणमान्यजन उपस्थित थे.

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