विद्या भारती का दो दिवसीय ज्ञान-विज्ञान मेला संपन्न Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली (इंविसंकें). विद्या भारती के विद्यालयों का दो दिवसीय विज्ञान मेला पंजाबी बाग स्थित सनातन धर्म सरस्वती बाल मंदिर विद्यालय में संपन्न हुआ. विज्ञान मेले नई दिल्ली (इंविसंकें). विद्या भारती के विद्यालयों का दो दिवसीय विज्ञान मेला पंजाबी बाग स्थित सनातन धर्म सरस्वती बाल मंदिर विद्यालय में संपन्न हुआ. विज्ञान मेले Rating: 0
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विद्या भारती का दो दिवसीय ज्ञान-विज्ञान मेला संपन्न

नई दिल्ली (इंविसंकें). विद्या भारती के विद्यालयों का दो दिवसीय विज्ञान मेला पंजाबी बाग स्थित सनातन धर्म सरस्वती बाल मंदिर विद्यालय में संपन्न हुआ. विज्ञान मेले में उत्तर भारत के पांच राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली के 600 प्रतिभागी विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रतियोगिताओं में भाग लिया. छात्रों ने विज्ञान प्रदर्शनी में मॉडल्स को प्रदर्शित किया. मेले का उद्धघाटन विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के महामंत्री सुरेश अत्री जी ने किया था.

इस दौरान छात्रों ने गंदे पानी को साफ़ करने की मशीन, कम्प्यूटर का इतिहास, कोयले का संरक्षण करने का वैज्ञानिक उपाय, दैनिक जीवन में रासायनिक चक्र, मॉडल्स द्वारा दर्शाया. यह प्रतियोगिताएं विज्ञान, गणित एवं कम्प्यूटर के विषयों में हुईं. प्रतियोगितायें पत्र वाचन, प्रश्न मंच एवं आचार्य पत्र वाचन द्वारा की गई. जिनमें प्राथमिक से वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों ने भाग लिया. इन प्रतियोगिताओं में पंजाब ने प्रथम, दिल्ली ने द्वितीय व हरियाणा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया.

मेले के आयोजन का मकसद विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विकास की तर्कसंगत सोच पैदा करने के साथ- साथ देशभक्ति का भाव भरना है. विज्ञान मेले के समापन के अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे. एनसीईआरटी के विज्ञान व गणित विभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष जी ने कहा कि ‘ज्ञान-विज्ञान मेले’ से छात्रों में वैज्ञानिक प्रतिभा विकसित करने का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. सर्वसाधारण समाज में विज्ञान एवं वैज्ञानिक सोच को लोकप्रिय करने के लिए इस तरह के मेले समय-समय पर होते रहने चाहिए, जिससे भारत की प्राचीन एवं अर्वाचीन महान उपलब्धियों की जानकारी बच्चों तक पहुंच सके. छात्रों में अपने देश को उन्नत बनाने का संकल्प जागृत करने की भावना का विकास हो तथा गौरवशाली संस्कृति का ज्ञान हो.

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