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विष पीकर अमर होने वाला देश भारत ही है – डॉ. मोहन भागवत जी

उज्जैन (विसंकेंभा). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारी संस्कृति के पदचिन्ह दुनियाभर में मिलते हैं. विष पीकर अमर होने वाला देश भारत ही हो सकता है. हमारा कर्तव्य बनता है कि दुनिया को राह दिखाने का काम करें. शिव का पहला नाम रुद्र है, रुद्र का अर्थ है शक्ति. बिना शक्ति के शिव होने का कोई मतलब नहीं है. विश्व की सारी दुष्ट शक्तियों को भस्म करने वाले रुद्र ही शिव हैं. हम लोगों को शक्ति की उपासना करनी पड़ेगी. सरसंघचालक जी उज्जैन में तीन दिवसीय शैव महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित जनों को संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि शारीरिक ताकत ही सब कुछ नहीं होती, उसके साथ आंतरिक ताकत होना भी आवश्यक है. हमको भौतिक बल के साथ आध्यात्मिक बल संपन्न संवेदनशील समाज बनाना होगा. दक्षिण में शिव की भभूति लगाकर बिना स्नान के भी चल सकता है. मन में कई विकार नहीं है तो शिव का प्रतीक भस्म लगाने से तन और मन पवित्र हो जाता है.

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में जब सभ्यता का विकास ही नहीं हुआ था, तब हमारे भारत में वेदों की ऋचाएं रच ली गई थीं. विश्व को शांति का मार्ग भारत ही दिखाएगा. भगवान शिव भारत ही नहीं, सृष्टि के कण-कण में विराजित हैं. शैव महोत्सव की प्राचीन परंपरा है, यह परंपरा जारी रहनी चाहिए. उज्जैन से प्रारभ हुआ शैव महोत्सव द्वादश ज्योतिर्लिंगों तक जाएगा. थोड़ी सी पूजा से प्रसन्न होने वाले भगवान शंकर ही हैं. उनका श्रृंगार भस्म से हो जाता है और भोग में भांग व धतूरा चढ़ता है.

शैव महोत्सव के अवसर पर भारतीय डाक विभाग द्वारा शैव महोत्सव-2018 विषय पर डाक टिकट जारी किया गया.

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