वीर सावरकर को भारतीय इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला Reviewed by Momizat on . भुवनेश्वर. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में विनायक दामोदर सावरकर का त्याग एवं बलिदान अतुलनीय है. हमारा देश आज हर क्षण जिस स्थिति से गुजर रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठ भुवनेश्वर. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में विनायक दामोदर सावरकर का त्याग एवं बलिदान अतुलनीय है. हमारा देश आज हर क्षण जिस स्थिति से गुजर रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठ Rating: 0
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वीर सावरकर को भारतीय इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला

28_05_2015-28bhup03-c-2भुवनेश्वर. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में विनायक दामोदर सावरकर का त्याग एवं बलिदान अतुलनीय है. हमारा देश आज हर क्षण जिस स्थिति से गुजर रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या जिस हिसाब से बढ़ रही है, इस तरह की स्थिति में अखण्ड भारत के भूगोल को मजबूत करने के लिए वीर सावरकर के त्याग व बलिदान को याद करने की जरूरत है. भारत रक्षा मंच ओडिशा की तरफ से सावरकर जी की 128वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने संबोधित किया.

स्थानीय बुद्ध मंदिर परिसर में रक्षा मंच के राज्य अध्यक्ष डॉ विमलेंदु महाती की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर भाग लेकर पूर्व प्रशासक कल्याण राय ने वीर सावरकर की वीरता एवं देश को आजाद कराने में उनके योगदान पर जानकारी दी. राय ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सावरकर के जीवन आदर्श को अपने जीवन में अपनाना होगा. भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय सचिव अनिल धीर ने वीर सावरकर के कारावास जीवन, उन पर हुए अत्याचारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सावरकर जी को भारतीय इतिहास में जो स्थान मिलना चाहिए था, वह आज तक नहीं मिल पाया है. भारत रक्षा मंच के सह संयोजक मुरली मनोहर शर्मा ने कहा कि सावरकर जैसे अद्वितीय स्वतंत्रता सेनानी का आदर्श वर्तमान समय में प्रासंगिक है. आज देश के स्वतंत्रता एवं अखंडता पर खतरा दिखाई दे रहा है. जिस प्रकार से बांग्लादेशी गैरकानूनी ढंग से घुसपैठ कर रहे हैं, उसके परिणाम स्वरूप भारत के फिर टुकड़े- टुकड़े होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. बांग्लादेशी अनुप्रवेशकारी को भारत की धरती से हटाने के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी. भारत रक्षा मंच ने जो अपना अभियान शुरू किया है, इसे निर्णायक रूप देना होगा तथा इसे देशव्यापी करना होगा. शर्मा ने कहा कि देश के प्रति हमारा जो कर्तव्य है, उसका सही ढंग से पालन करना होगा. इस अवसर पर सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भाषा साहित्य एवं संस्कृति क्षेत्र में परशुराम द्विवेदी तथा भारत विभाजन के प्रत्यक्षदर्शी तथा स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्रहंस को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में राज्य महासचिव देव प्रसाद मिश्र ने स्वागत भाषण दिया.

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