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वेद और विज्ञान को अलग करने वाली भ्रांतियों से निकलना होगा – सुरेश सोनी जी

पुणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने कहा कि वेद और विज्ञान को अलग बताने वाली भ्रांतियों से हमें बाहर निकलना होगा तथा पुराने अंधविश्वास से निकलकर नए अंधविश्वास में जाने से बचना होगा. सह सरकार्यवाह जी विज्ञान भारती और डेक्कन कॉलेज अभिमत विश्वविद्यालय के तत्वाधान में पुणे के डेक्कन कॉलेज में आयोजित ‘तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन’ के उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे.

पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी, विज्ञान भारती के अध्यक्ष और प्रसिद्ध वैज्ञानिक विजय भटकर जी, विज्ञान भारती के कार्यवाह जयंत सहस्रबुद्धे जी, चिन्मय मिशन के पूर्व प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद जी, डेक्कन कॉलेज से अरुण जामखेडकर जी व डॉ. वसंत शिंदे जी, विज्ञान भारती के संस्थापक डॉ. के.आई. वासु जी मंच पर उपस्थित थे.

सुरेश सोनी जी ने कहा कि “कुछ मान्यताएं बनी हैं कि वेद यानि प्राचीन और विज्ञान अर्थात् आधुनिक. हमें इस मान्यता से बाहर निकलने की आवश्यकता है. पूर्व और पश्चिम का विज्ञान एक ही है, लेकिन दृष्टि में अंतर है. सेमेटिक दर्शन में विश्व दृष्टि जगत् के शोषण की थी, लेकिन मनुष्य के पास शोषण की वह ताकत नहीं थी. विज्ञान और तकनीक की प्रगति के कारण वह ताकत मनुष्य के हाथ में आई है. क्या जड़ और चेतन में अंतर है, इसके मूल में हमें जाना है.” उन्होंने कहा कि हमें भारतीय दर्शन की ओर लौटना होगा, क्योंकि टेक्नोलॉजी कनैक्ट कर सकती है, रिलेट नहीं कर सकती.

डॉ. वसंत शिंदे जी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय 2021 में 200 वर्ष पूरा करेगा. हम इस कार्यक्रम द्वारा वह उत्सव शुरू कर रहे हैं. इस कार्यक्रम के निष्कर्ष संबंधित प्राधिकरण तक पहुंचाए जाएंगे, ताकि भारतीय दर्शन और विज्ञान का समावेश पाठ्यक्रम में हो सके.

डॉ. विजय भटकर जी ने कहा कि इस देश के पास हजारों वर्षों के ज्ञान की विरासत है जो वैदिक काल से चली आ रही है. डिजिटल कम्प्यूटिंग की कल्पना मूल रूप से छंद शास्त्र में है. हम जिसे थ्योरी ऑफ एइवरिथिंग कहते हैं, वही सांख्यदर्शन है. लॉजिक यानि न्यायशास्त्र है. हमें उसका अध्ययन करना है और हमें विज्ञान का इतिहास जानना होगा. हमें विज्ञान के इतिहास का पुनर्लेखन करना होगा. आज के समाज की सारी समस्याएं आधे-अधूरे ज्ञान के कारण हैं. उन्होंने कहा कि भाषा और गणित साथ-साथ चलते हैं. हमें भाषा को केवल बोली के तौर पर नहीं, बल्कि रचना के रूप में सीखना होगा.

स्वामी तेजोमयानंद जी ने कहा कि धर्म वह है जो मनुष्य को सर्वांगीण भौतिक और आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाता है. वेदों में सारा ज्ञान है, लेकिन उसका उपयोग जानना आवश्यक है. अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी ने पुराने उदाहरणों और पश्चिमी लेखकों को उद्धृत करते हुए कहा कि हमारी वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टि अत्यंत विकसित थी. विज्ञान भारती के रूप में एक चिंगारी अग्निशिखा बन चुकी है और यह अग्निशिखा जलाने वाली नहीं, बल्कि प्रकाश देने वाली है. धर्म का अर्थ है –एकत्र आना. योग की प्रक्रिया में और विज्ञान की प्रक्रिया एकसाथ लाई जा सकती है. मेरे विचार में उन्हें एकत्र लाना चाहिए.

भारतीय वेद शास्त्र में व्याप्त विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयोजित यह सम्मेलन 10 जनवरी से 13 जनवरी तक चलेगा. तीन दिवसीय आयोजन में वेद और विज्ञान से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ सहभागी होंगे. इस सम्मेलन के साथ वेद विज्ञान सृष्टी नामक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया है.

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