शाखाओं में खेल-खेल में दिए जाते हैं संस्कार – सुधीर कुमार जी Reviewed by Momizat on . प्रदेश भर में हुए सात खेल संगम, 4000 से अधिक खिलाड़ी सहभागी हुए फरीदाबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा प्रांत प्रचारक सुधीर कुमार जी ने कहा कि जीवन के गंभीर प्रदेश भर में हुए सात खेल संगम, 4000 से अधिक खिलाड़ी सहभागी हुए फरीदाबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा प्रांत प्रचारक सुधीर कुमार जी ने कहा कि जीवन के गंभीर Rating: 0
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शाखाओं में खेल-खेल में दिए जाते हैं संस्कार – सुधीर कुमार जी

प्रदेश भर में हुए सात खेल संगम, 4000 से अधिक खिलाड़ी सहभागी हुए

फरीदाबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा प्रांत प्रचारक सुधीर कुमार जी ने कहा कि जीवन के गंभीर रहस्य, ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों का संगम होते हैं खेल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा पर खेले जाने वाले खेलों के पीछे भी यही भाव छिपा होता है. खेल-खेल में देशभक्ति के भावों को जीवन में अपनाने की अनूठी पद्धति संघ शाखाओं ने विकसित की है. सुधीर जी गाँव नीमका स्थित स्टेडियम में आयोजित “हरियाणा खेल संगम” के अवसर पर संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि आज हरियाणा प्रांत में सभी सात विभागों में 7 स्थानों (फरीदाबाद, कैथल, झज्जर, गुरुग्राम, हिसार, sadora, दादरी) पर इसी प्रकार खेल संगम कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. जिनमें हरियाणा के सभी खंडों और नगरों से कबड्डी, खो-खो की टीमें आई थी. लगभग 4000 स्वयंसेवकों ने खेलों में भाग लिया. ये सभी टीमें पहले अपने जिलों में खंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओ में से विजयी होकर विभाग स्तर पर आई थीं. फरीदाबाद विभाग (फरीदाबाद महानगर पश्चिम, फरीदाबाद महानगर पूर्व, बल्लबगढ़ जिला व पलवल जिला) की कबड्डी व खो-खो की प्रतियोगिताओं का आयोजन नीमका गाँव में किया गया. यहाँ कबड्डी की कनिष्ठ आयु वर्ग की 23 टीम, वरिष्ठ आयु वर्ग की 22 टीमें तथा खो-खो की कुल 19 टीमों ने भाग लिया, कुल संख्या 803 रही.

किशोरावस्था में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में अनेक मेडल जीत चुके फरीदाबाद के उभरते सितारे अनमोल जैन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. अनमोल जैन ने कहा कि खेल सदैव खेल भावना और सद्भावना के साथ ही खेला जाना चाहिए. शूटिंग के माध्यम से विश्वभर में अपने देश का नाम रोशन करना ही मेरा उद्देश्य है.

डीएवी स्कूल गुरुग्राम में हरियाणा प्रान्त कार्यवाह देव प्रसाद जी ने 40 टीमों के प्रतियोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय पारंपरिक खेलों से सादगी, अनुशासन व चरित्र का निर्माण होता है. खेलों से परस्पर स्नेह, अपनी सात्विक शक्ति से जीतने की परंपरा बनती है. संघ विगत 90 वर्षों से खेलों के माध्यम से समाज निर्माण हेतू समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करता आ रहा है. युवाओं को चरित्रवान बनाने के लिए उन्हें जहाँ भारतीय चिंतन से अवगत कराया जाता है, वहीं भारतीय पारम्परिक खेलों के माध्यम से मातृभूमि के प्रति समर्पण भाव को जागृत किया जाता है. इसी उद्देश्य को लेकर संघ में खेल संगम जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.

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