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शिक्षा व्यवस्था में भारतीय दृष्टि आवश्यक

भोपाल (विसंकें). भारतीय शिक्षण मंडल मध्यभारत प्रान्त की बैठक भोपाल में हुई. बैठक में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनलाल छीपा की उपस्थिति में प्रान्त अध्यक्ष के रूप में डॉ. आशीष डोंगरे को सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया. प्रांत उपाध्यक्ष का दायित्व संदीप कुलश्रेष्ठ, सचिव पंकज नाफड़े, सह सचिव रश्मि चतुर्वेदी एवं सुरेश गोहे को दिया गया. संपर्क प्रमुख विनोद शर्मा, प्रांत शालेय प्रकल्प संयोजक नितिन विटवेकर, प्रांत शैक्षिक प्रकोष्ठ संयोजक संजय पटवा, प्रांत अनुसंधान संयोजक डॉ. सुविज्ञा अवस्थी, प्रांत महिला प्रकोष्ठ संयोजक अर्चना पांडे एवं प्रांत युवा आयाम संयोजक की जिम्मेदारी लोकेन्द्र सिंह को दी गयी है. आईसेक्ट विश्वविद्यालय के डॉ. संतोष चौबे के मार्गदर्शन एवं पूर्व प्रांताध्यक्ष मनोज प्रधान के संरक्षण में नयी कार्यकारिणी अपना कार्य करेगी.

इस अवसर पर प्रान्त अध्यक्ष डॉ. आशीष डोंगरे ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था अनेक प्रकार से प्रश्नों के घेरे में खड़ी है. हमारा युवक महंगी शिक्षा प्राप्त करके भी हताशा, निराशा एवं बेरोजगारी से त्रस्त है. शिक्षा व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करने के लिए शिक्षा में भारतीय दृष्टिकोण आवश्यक है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यकर्ताओं को भारत के पुनरुत्थान के लिए बहुत तेजी से कार्य करना होगा. हम सबको भारत हित के लिए शिक्षा व्यवस्था को विकसित करना होगा.

आईसेक्ट विश्वविद्यालय के डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल एक स्वयंसेवी संगठन है, जो विगत पांच दशकों से शिक्षा क्षेत्र में भारतीय प्रारूप विकसित करने के लिए अनुसंधान, प्रबोधन, प्रशिक्षण तथा प्रकाशन का कार्य कर रहा है. यह कार्य मंडल 24 राज्यों में 268 शाखाओं के माध्यम से कर रहा है. पूरे देश में 4000 से अधिक शिक्षाविदों के विचारों को संकलित कर मंडल में एक समग्र एवं एकात्म शिक्षा के प्रारूप ‘‘भारतीय शिक्षण रूपरेखा’’ का निर्माण किया गया. आज की शिक्षा व्यवस्था में कौशल उन्नयन पर अधिक जोर देना होगा. इस अवसर पर अखिल भारतीय संयुक्त महामंत्री अरुणा सारस्वत दीदी ने भी नयी कार्यकारिणी को शुभकामनाएं दी और अपने विचार व्यक्त किये.

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