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शिक्षा संस्कृति की संवाहक है, और शिक्षक केंद्र बिन्दु – प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे जी

लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे जी ने कहा कि शिक्षा संस्कृति की संवाहक है, जिसका केंद्र बिन्दु शिक्षक बने. इसके लिए शिक्षक को ही सतत प्रयास करना होगा. गुरू शिष्य की परंपरा, शिक्षा के बाजारीकरण के कारण तार-तार हो चुकी है. शिक्षक मूल्यपरक शिक्षा के रोलमोडल बनें. समग्र शिक्षा गम्भीर चिन्तन-मनन कर पाठ्यक्रम में लागू की जाए, जिससे सार्थक परिणाम प्राप्त हों. देश में सम्यक सकारात्मक बदलाव के लिए शिक्षा में बदलाव जरुरी है.

प्रो. अनिरुद्ध जी राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश  के चयनित कार्यकर्ताओं के सम्मलेन एवं संगोष्ठी “शिक्षाः समग्र व व्यापक” विषय पर बोरा इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने शिक्षा के उन्नयन के लिए पांच सूत्रों पर चर्चा की. सरकारी स्कूलों के लिए निजी स्कूल चुनौती हैं और निजी स्कूलों में बाजारीकरण बढ़ रहा है. चिंता व्यक्त करते हुए कहा की शिक्षा कैरियर का मुद्दा हो गई है, वह ज्ञान व्यापी की जगह अर्थ व्यापी हो चुकी है. जबकि शिक्षा का मौलिक उद्देश्य मनुष्य की क्षमताओं का वर्धन करना है. हमें शिक्षा में परिवर्तन लाना होगा और इसे शिक्षा के अर्थशास्त्र की जगह शिक्षा को ज्ञान का शास्त्र बनाना होगा. जिससे नैतिक मूल्य, संस्कार और हुनर पैदा किया जा सके. उन्होंने भाषा पर कहा कि यह हमारी संस्कृति की निर्देशक है जो छात्रों में मौलिक चिंतन और खोज को विकसित करती है. आज हमारे देश में शिक्षा की तस्वीर उल्टी हो चुकी है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक नहीं मिलते और महाविद्यालयों में छात्र नहीं मिलते. इस गंभीर प्रश्न पर संगठनों, समाज व सरकारों को व्यापक विचार विमर्श करना होगा.

मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन “गोपाल जी” ने कहा कि तकनीक आसान और सस्ती हो, इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है. नई तकनीक को समाज के अनुकूल बनाने, प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढ़े सरकार इस पर काम कर रही है. शिक्षा की गुणवत्ता व रोजगार एक दूसरे से जुड़ा विषय है, जब शिक्षा में गुणवत्ता होगी तो रोजगार भी आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे.

विशिष्ट अतिथि बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल जी ने शिक्षकों को अपने दायित्व के प्रति सजग रहने के लिए आग्रह किया. हम एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाना चाहते हैं, वह समावेशी और नैतिक मूल्यों पर आधारित हो. आज निजी स्कूलों के प्रति अंग्रेजी को लेकर ही लोगों का रुझान बढ़ रहा है. बेसिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार की जरूरत है. यह तभी संभव है, जब अधिकारी व शिक्षक मिलकर इस दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगे. वर्तमान  शिक्षा सर्वांगीण विकास का कार्य नहीं कर पा रही. समग्र विमर्श से जो निष्कर्ष प्राप्त हों, उसे सरकार को दें. इन्हें लागू कर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की मार्ग पर सरकार बढ़ेगी.

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर जी ने शिक्षक पदाधिकारियों से आह्वान किया कि अधिकतम प्रयास एवं अधिकतम प्रवास से शिक्षक, शिक्षार्थी एवं राष्ट्रहित के कार्य संभव है.

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ओमपाल जी ने सम्मेलन की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि परिवार में संस्कारों व मार्गदर्शन का अभाव हो चुका है. बच्चों में असुरक्षा और अवसाद उत्पन्न हो रहे हैं, हम किस तरह की पीढ़ी की संरचना कर रहे हैं. यह आज देश के आगे ज्वलंत प्रश्न है. शिक्षा को सृजनात्मक बनाने की जरूरत है, जिससे कि बच्चों में जिज्ञासा पैदा हो. आज अंग्रेजी के आतंक को बच्चों के दिमाग से निकालना होगा और उन्हें संवेदनात्मक बनाने का कार्य शिक्षकों को ही करना है. संकल्पित शिक्षक समाज ही शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन ला सकता है. हमारा यह संगठन शिक्षकों में सेवा व कर्तव्य भाव नवजागृत करने को प्राथमिकता देता है.

अध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार सिंह जी ने कहा कि शिक्षा के लिए शिक्षक, अभिभावक, छात्र व सरकार चारों संगठक मिलकर जब काम करेंगे, तभी व्यवस्था में परिवर्तन संभव होगा. महामंत्री ऋषिदेव त्रिपाठी जी ने आभार ज्ञापन किया.

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