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संघ का कार्य सामाजिक समरसता, एकात्मता को पुष्ट करने का प्रयास है – डॉ. अरुण जैन जी

हरदा, मध्यभारत (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का स्वयंसेवकों के शारीरिक कार्यक्रमों के प्रदर्शन के साथ स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर, इंदौऱ रोड, हरदा में समापन हुआ. समापन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र प्रचारक डॉ. अरुण जैन जी ने कहा कि ऐसे वर्गों से मिलने वाला प्रशिक्षण व्यक्ति निर्माण का ही भाग है. विश्व में सबसे विशाल और सशक्त संगठन के रूप में आज संघ जाना जाता है. यह हिन्दुत्व की विचार धारा को और अधिक सबल बनाने का प्रयास है. पूर्ण समाज में एकात्मता स्थापित हो, इस हेतु से संघ का कार्य सर्वत्र चल रहा है.

उन्होंने कहा कि संघ कार्य सामाजिक समरसता को पुष्ट करने का प्रयास है. अपने समाज में चल रही जातिवाद एवं कुरीतियों के कारण फैलने वाली विषमता समाप्त करके एकरस समाज की पुनर्स्थापना हो यही संघ का प्रयास है. संघ की शाखाओं के माध्यम से और अन्य अनेकानेक कार्यक्रमों के माध्यम से यह कार्य सम्पन्न हो रहा है. आज की शिक्षा से मनुष्य संस्कार विहीन होता जा रहा है. इसी का परिणाम है कि देश को लूटने वाले मुट्ठी भर आये थे, किन्तु करोड़ों लोगों पर सैकड़ों वर्षो तक शासन करते रहे. उन्होंने हिन्दुओं की फूट का लाभ उठाकर तथा उनकी कुरीतियों को हथियार बनाकर उन्हें लगातार कमजोर किया. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहकर तथा अनेक आंदोलनों में भाग लेकर यह अनुभव कर लिया था कि यदि हिन्दुस्थान से छुआछूत रूपी बीमारी को मिटाया नहीं गया तो देश स्वतंत्र होने के बाद भी स्वाबलंवी नहीं बन सकेगा. फलस्वरूप उन्होंने 1925 में विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की. अपनी स्थापना से ही संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य करते हुए हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य लगातार कर रहा है. संघ के माध्यम से समय समय पर अनेक आंदोलन किये गये, जिनके द्वारा हिन्दू समाज ने अपनी शक्ति को प्रदर्शित किया है. इन आंदोलनों में स्वतंत्रता के लिये किये गये प्रयास, हिन्दुओं को सुरक्षित पाकिस्तान से हिन्दुस्तान वापिस लाना, भारत चीन युद्ध में आंतरिक सुरक्षा व सेवा के कार्य करना, 1965 व 1971 के युद्ध में आंतरिक शांति बनाये रखना, आपातकाल का विरोध कर लोकतंत्र को पुनर्जीवित करना. 1990 में कारसेवा द्वारा सम्पूर्ण देश में जनजाग्रति लाना, रामसेतु आंदोलन व अमरनाथ यात्रा पर लगे प्रतिबंधों का विरोध कर हिन्दू समाज की सुप्त शक्ति को जगाकर उसे स्वाभिमानी एवं संगठित समाज के रूप में पहचान दिलाना शामिल है.

डॉ. अरुण जी ने स्वयंसेवकों को लगातार रचनात्मक कार्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया और कहा कि संघ के शिक्षा वर्ग की श्रृंखला देश के सारे प्रांतों में अभी सम्पन्न हुई है. कार्यकर्ताओं का बल इससे बढ़ेगा और मातृभूमि की सेवा में समर्पित होंगे.

कार्यक्रम के अध्यक्ष स्वामी नित्यचेतनजी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि संघ के पास अद्वितीय शक्तियां हैं, अपने स्वयंसेवकों के द्वारा वह लगातार बढ़ेगा ऐसा हमें विश्वास है. कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथि स्वागत तत्पश्चात ध्वज मानवंदना, गणसमता, सामूहिक समता, योगचाप, नियुद्ध, घोष, दण्ड, दण्डयोग, सूर्यनमस्कार, योगासन, गीत आदि का प्रदर्शन स्वयंसेवकों ने किया.

कार्यक्रम में प्रांत संघचालक सतीश पिंपलीकर डी, वर्गाधिकारी प्रिभाकांत शुक्ला जी, सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे. वर्ग का प्रतिवेदन वर्गकार्यवाह धन्नालाल दोगने जी द्वारा रखा गया तथा आभार वर्ग के प्रबंध प्रमुख राजेश खोदरे जी ने किया.

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